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उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल (प्री history of uttrakhand)

उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Era) अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है। इस काल का कोई लिखित प्रमाण नहीं है, इसलिए इसका इतिहास गुफाओं में मिले शैल-चित्रों (Rock Paintings), पत्थरों के औजारों और प्राचीन कंकालों के आधार पर लिखा गया है। आइए जानते हैं विस्तार से - “धूल से भरी राहें और तपता हुआ सूरज... उत्तर भारत के एक गुमनाम गाँव के किनारे एक ऊँचा सा मिट्टी का टीला था। लोग वहाँ से ईंटें उखाड़ रहे थे, कोई अपने घर की दीवार बना रहा था, तो कोई उन पत्थरों को कचरा समझकर फेंक रहा था। वहीं दूर खड़ा एक अंग्रेज अफसर, जिसका नाम अलेक्जेंडर कनिंघम था, यह सब बड़े गौर से देख रहा था। उसके पास एक पुरानी किताब थी—चीनी यात्री ह्वेनसांग की डायरी। कनिंघम को यकीन था कि जिस टीले को लोग 'कचरा' समझ रहे हैं, उसके नीचे सम्राट अशोक का कोई महान शहर या बुद्ध का कोई पवित्र मठ दफन है। वो बेचैनी और वो खत  कनिंघम रात भर सो नहीं पाए। उन्हें लग रहा था जैसे वो दफन शहर उन्हें पुकार रहे हों। उन्होंने सोचा, "अगर आज मैंने इन पत्थरों को नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियाँ कभी नहीं...

मेहरबानी : काव्य संग्रह by sunil

मेहरबानी : काव्य संग्रह

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जरा गौर फरमाना........।

मेहरबानी 


दोस्तों,
आप सभी की मेहरबानी है,
आप लोगों से जुड़ी जिंदगानी है,
आपके प्यार और सहयोग से ,
मेरे अरमानों में तूफानी है ,
थोड़े से शब्द है, थोड़ी-सी जुबानी है 
थोड़ी हकीकत है , छोटी-सी कहानी है
चुरा सकूं मैं ! वो लम्हे दुनिया से,
जो बच्चों को सुनानी है ,
दिन भी गजब के है,  रातें भी सुहानी है।
कोई इंतजार करें ना करें,  मेरे आंखों में रवानी है।
मंजिल मुझे मिले या आपको,
दोस्ती तो हर हाल में निभानी है ।
स्वार्थ का भावना ना रखो - मेरे यारों,
हर शख्स ! देवभूमि की रूहानी है।

दिल से शुक्रिया............. Sunil

नया साल मुबारक हो

दोस्तों देर से ही सही पर नए साल बधाई तो बनती ही है। दरअसल कविता तो मैंने पहले ही लिख दी थी लेकिन किसी कारणवश पोस्ट नहीं कर पाया तो वह नए साल की कविता कुछ इस प्रकार थी।

सफर ए जिंदगी

बीस था,  बीत गया,
 बीस को जाने दो,
सफर ए जिंदगी
 मुबारक हो ,

कोई दोस्ती के लिए जिए,
 कोई मोहब्बत के लिए जिए,
कोई ठहर गया है , कोई चल रहा है ,
गमों का सफर, फिर भी बढ़ रहा है।
 सफ़र-ऐ-जिंदगी, मुबारक हो सबको।
 2021 का नया साल प्यारा हो सबको।

कोई उम्मीद से हारा ,
कोई जज्बातों से हारा ,
जैसे - तैसे 2020 बीत गया,
 ना कोई हमारा , ना कोई तुम्हारा।
कोई गरीबी से हारा ,
कोई नीति से हारा ,
सरकार के नुमाइंदे खुश रहे हैं,
क्योंकि 2021 है हमारा।

By : sunil

दोस्तों ! यहां पर मैं एक बात कहना चाहूंगा। आपका 2020 कैसा भी रहा हो। बीस था  बीत गया तो उसे जाने दो। मैंने भी अभी शुरू किया है। आप भी कर सकते हैं , अपने लक्ष्य तक बढ़ सकते हैं। अब 2021 में नयी सांस भरो,  नए  इरादे करो और अपने लक्ष्य तक पहुंचने तक तब तक मत रुको । जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए । विवेकानंद जयंती पर सभी दोस्तों को हार्दिक बधाइयां।

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