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मई, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कोठारी आयोग : शिक्षा का एक ऐतिहासिक दस्तावेज

कोठारी आयोग : शिक्षा का एक ऐतिहासिक दस्तावेज 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) से पूर्व, भारत की शिक्षा व्यवस्था औपनिवेशिक प्रभावों और व्यापक असमानताओं से ग्रस्त थी। 1854 की "वुड्स शिक्षा प्रणाली" ने औपनिवेशिक शिक्षा का आधार तैयार किया, जिसमें अंग्रेजी भाषा, पश्चिमी ज्ञान और रटने पर अत्यधिक ज़ोर दिया गया। उच्च शिक्षा को प्राथमिकता दी गई, जबकि प्राथमिक शिक्षा उपेक्षित रही। शिक्षा का उद्देश्य भारतीयों को ब्रिटिश शासन में सहायक बनाना था। इस प्रणाली ने विभिन्न प्रकार के विद्यालयों (सरकारी, मिशनरी, निजी) में शिक्षा के स्तर और गुणवत्ता में भारी असमानताएं पैदा कीं। जाति, लिंग और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव व्याप्त था। लड़कियों और महिलाओं के लिए शिक्षा तक पहुंच अत्यंत सीमित थी। उस समय पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान और रटने पर ज़ोर दिया गया था, जबकि व्यावहारिक शिक्षा और कौशल विकास को नजरअंदाज किया गया था। शिक्षा का मूल्यांकन मुख्य रूप से परीक्षाओं पर आधारित था, जिसके कारण रटने और परीक्षा में सफल होने पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित किया गया।  स्वतंत्रता के पश्चात भारत में शि

पौरव वंश का इतिहास (उत्तराखंड का इतिहास)

 उत्तराखंड का इतिहास पौरव राजवंश अल्मोड़ा जनपद के तालेश्वर नामक (वर्तमान पिथौरागढ़) स्थान से तांबे एवं अष्टधातु के अभिलेख प्राप्त हुए हैं। जिसमें यह उल्लेख मिलता है कि छठी शताब्दी में ब्रह्मपुर में पौरवों का शासन था। इस वंश के प्रमुख शासकों में विष्णुवर्मन प्रथम, वृषवर्मन, अग्निवर्मन, धुतिवर्मन तथा विष्णुवर्मन द्वितीय का नाम आता है। इसके अतिरिक्त मार्कंडेय पुराण में भी पौरवों का उल्लेख मिलता है। तालेश्वर ताम्रपत्रों में कत्यूरियों की राजधानी कार्तिकेयपुर का उल्लेख एक ग्राम के रूप में हुआ है। पौरव वंश की पृष्ठभूमि  उम्मीद है आपने उत्तराखंड के इतिहास की अध्ययन सीरीज में कुणिंद वंश का इतिहास विस्तार पूर्वक पढ़ लिया होगा। जैसा कि आप जानते हैं कि उत्तराखंड में शासन करने वाली पहली राजनीतिक शक्ति कुणिंद थी जिसका सबसे शक्तिशाली शासक  अमोघभूति था। अमोघभूति की मृत्यु के पश्चात कुणिंद शासकों का विघटन प्रारंभ हो गया। जहां एक तरफ कुणिंद शासकों का साम्राज्य सिकुड़ता जा रहा था। वहीं दूसरी तरफ बाहरी शक्तियों का आक्रमण बढ़ता जा रहा था। उत्तरवर्ती कुणिंदो के समकालीन कुणिंदों के आधे भाग पर शकों ने अधिकार

Most important current affairs in Hindi 2022

       करेंट अफेयर्स 2022 May current affairs देवभूमि उत्तराखंड द्वारा most important affairs हिंदी में तैयार किए जाते हैं। जिनकी भविष्य में होने वाली आगामी परीक्षाओं ukpcs, uppcs , uksssc , upsssc , ssc chsl, CGL में शत-प्रतिशत आने की संभावना होती है। यहां से आप यहां प्रत्येक सप्ताह के माह करेंट अफेयर पढ़ सकते हैं। आज की प्रश्नोत्तरी में मई माह के करंट अफेयर दिए गए हैं। जिनका विस्तृत वर्णन भी किया गया है। Most important current affairs in Hindi  (1) भारतीय बैडमिंटन संघ का नया अध्यक्ष किन्हें नियुक्त किया गया है ? (a) एस. राजू (b) हिमंत बिस्वा सरमा (c) रेणु सिंह (d) मनोज सोनी व्याख्या :- हिमंत बिस्वा सरमा एक भारतीय राजनीतिज्ञ है । जो वर्तमान समय में असम के मुख्यमंत्री हैं इसके अलावा हाल ही में उन्हें बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मौजूदा 2022 से 2026 तक निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है । बैडमिंटन संघ की स्थापना 1934 में हुई थी व इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है Answer - (b) (2) राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस कब मनाया जाता है (a) 1 अक्टूबर (b) 5 अक्टूबर (c) 5 नवंबर (d) 1 दिसंबर व्याख्या :- पर्यावरण

थारू संस्कृति , थारू परंपराऐं, थारू रीति रिवाज

          थारू संस्कृति क्या आप जानते हैं शादी से पहले भुईयां अर्थात भूमिसेन देवता की पूजा क्यों की जाती है ?  क्या आप जानते हैं भुईयां (भूमिसेन देवता) को गांव से ही बाहर क्यों स्थापित किया जाता है? क्या आप जानते हैं भुईयां में ही सात ही देवता क्यों पूजे जाते हैं ? थारू जनजाति और उनकी परंपराऐं आइए दोस्तों इन्ही सब सवालों की आज हम विचार करेंगे जो थारू जनजाति की परंपराओं और रीति-रिवाजों से संबंधित है यूं तो भारत में अनेक जातियों भूमिसेन देवता की पूजा करती हैं । भूमिसेन देवताओं को विभिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है। ऐसे ही एक प्राचीन जनजाति थारू जनजाति जिन्हें प्रकृति का रक्षक भी कहा जाता है । वह भूमिसेन देवता को भुईयां के नाम से सम्बोधित करती है। थारू जनजाति मुख्यत: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में निवास करती है। इसके अलावा बिहार उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में भी निवास करती है लेकिन यहां चर्चा उत्तराखंड की थारू जनजाति की जा रही है जो महाराणा प्रताप को अपना वंशज मानती है। यदि आपने उधम सिंह नगर के खटीमा और सितारगंज क्षेत्र में भ्रमण किया है। आपने पाया होगा कि वहां के गां