पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
काव्य संग्रह
मेरी पहली मोहब्बत,
Part -1
अक्सर यह रातों के आंसू ,
दिल में सैलाब लेकर आते हैं
छूट रहा है वो पल मेरा ,
जहां खुशियों का सवेरा निकलता है।
जाने क्यों वक्त कम-सा लगता है।
कामयाबी मिलेगी यह तो यकीन है।
फिर भी कुछ अधूरा-सा लगता है ।
कहने को तो जिंदगी बहुत बड़ी है ।
करने को एक मुकाम बाकी है।
हौसलों में तो जान है,
बस एक उड़ान बाकी है।
हर पल बीत रहा है कुछ ऐसे।
मानो मुट्ठी में रेत भरी है जैसे
जाने क्यों वक्त कम-सा लगता है
सब कुछ तो है जिंदगी में।
फिर भी कुछ कम-सा लगता है।
मस्ती की, मौज किया,
खूब खाया, खूब पिया ,
हर पल जिंदगी को,
एक नया मोड़ दिया।
बहुत से राही ही मिले थे सफर में,
सपनों का सागर था मन में,
डर था टूट ना जाए ,
मेरा खुदा रूठ ना जाए।
मैंने जो भी चाहा मिला था रब से,
सब कुछ तो है जिंदगी में,
फिर भी कुछ कम-सा लगता है।
जाने यह कैसी चाहत है ?
जाने यह कैसी नजाकत है?
दुखों का साया कुछ यूं घबराया,
खुशी का पल जब ऐसे आया ।
हर लम्हों को जिया मैं ऐसे ,
फूलों से बाग भरा था जैसे।
हर पल बीत रहे हैं कुछ ऐसे
जाने क्यों अजीब सा लगता है?
सब कुछ तो है जिंदगी में ।
फिर भी कुछ कम सा लगता है।
मेरी पहली मोहब्बत,
Part - 2
हाल कुछ ऐसा हो गया है ,
बेचैनी बढ़ गई है ,
हार्ट फेल हो गया है,
कुछ तो हुआ है इस दिल को।
क्यों हर रात नई-सी लगती है ,
एक किरण सुबह की ,
उमंगो का गुलदस्ता लिए,
खिड़की से दस्तक देती है ।
ख्वाबों की मोहब्बत, कहां हकीकत होती है?
एक हां के इंतजार में हूं ,
पता नहीं वो किसकी है ?
दिल में मचलता एक तूफान है ।
क्या उसके दिल में भी है कुछ ऐसा?
या मेरी मंजिल खो गई है ?
अब दिल महफिलों में सहम-सा जाता है।
आंखें किसी और के मिलने से पहले झुक जाती हैं।
उसके सिवा कोई और दिल में ना आ जाए ।
यह सोचकर ही धड़कन रुक जाती है।।
और अब मैं क्या कहूं अपनी मोहब्बत के बारे में,
रात को सोने के बाद जो आते हो ,वो ख्याल हो तुम।
जो किसी से ना कहा जा सके ,वो ख्वाब हो तुम।
भावार्थ
हेलो दोस्तों प्रस्तुत कविता "मेरी पहली मोहब्बत" काल्पनिक कविता है। कृपया वास्तविकता पर ना जाएं। लेकिन यह भी सत्य है कल्पना वास्तविकता पर आधारित होती है। बहुत सारे तथ्य जब मिलते हैं तब कल्पनाएं होती हैं। वास्तविकता, कल्पना और भावों से मिलकर काव्य की रचना होती है। प्रस्तुत कविता में कवि मुश्किल में है कि वह अपनी पहली मोहब्बत को चुने या फिर अपने सपनों को या अपने लक्ष्य को । क्योंकि जब लक्ष्य की ओर बढ़ता है। तो मोहब्बत छूट जाती है। और मोहब्बत में पड़ता है तो मंजिल छूट जाती है। कवि की जिंदगी में सब कुछ है। सच्चे मित्र हैं, परिवार है, सगे-संबंधी हैं, आर्थिक स्थिति अच्छी है। बस कमी है तो एक हमसफर की, एक जीवन साथी, एक सच्चा जीवन साथी जो जिंदगी को खुशियों से भर देता है। जो शायद ही किसी किसी को नसीब होता है।
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Sundar
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