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भारती चंद की अमर गाथा (35वां चंद शासक)

भारती चंद की अमर गाथा   आज हम इस लेख में चंद राजाओं के बारे में विस्तार से पढ़ने वाले हैं। हालांकि चंद राजवंश केवल उत्तराखंड तक ही सीमित था और बहुत बड़ा साम्राज्य नहीं था लेकिन चंद राजवंश का सम्पूर्ण इतिहास रोचकमय है और यह हमें सिखाता है जिंदगी में उतार चढ़ाव आते हैं लेकिन उस उतार चढ़ाव में संतुलन किस प्रकार स्थापित करना होता है। इतने उतार चढ़ाव के बाद भी चंद राजवंश 700 वर्ष शासन किया।  तीन राजाओं की तिकड़ी भारती चंद - रत्न चंद - कीर्ति चंद चंद वंश की स्थापना के 400 साल बीत चुके थे लेकिन चंद शासक फिर भी पूर्ण रूप से आजाद नहीं थे वो अभी डोटी (नेपाल) के राजा को कर दे रहे थे, हालांकि इससे पूर्व 26वें चंद शासक ने थोहर चंद स्वयं को स्वतंत्र राजा घोषित कर दिया और 31वें चंद शासक गरुड़ ज्ञान चंद ने सोर और सीरा क्षेत्रों को जीत लिया था फिर भी चंद वंश अधीन था डोटी राजाओं के, कितने राजा आए और गये लेकिन किसी ने डोटी पर आक्रमण करने का दुस्साहस नहीं किया। ऐसे में जन्म होता है एक वीर का जिसका नाम भारती चंद होता है और वह चंद वंश का 35वां शासक बनता है और वो डोटी पर आक्रमण करने वाला पहला र...

महादेवी वर्मा का जीवन परिचय एवं उनकी रचनाएं (paart-03)

उत्तराखंड के प्रमुख साहित्यकार  महादेवी वर्मा  जैसा कि आप सभी जानते हैं कि देवभूमि उत्तराखंड द्वारा उत्तराखंड की परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सभी साहित्यकारों का अध्ययन किया जा रहा है, इससे पूर्व राहुल सांकृत्यायन और सुमित्रानंदन के बारे में पढ़ चुके हैं।  आज के लेख में हम महादेव वर्मा के बारे में विस्तार जानेंगे जिसमें उनका जीवन परिचय और उनकी सभी प्रमुख रचनाओं का सामान्य परिचय के साथ पढ़ेंगे। महादेवी वर्मा की रचनाओं से प्रतिवर्ष प्रत्येक परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते हैं इसलिए परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण लेखिका हैं। अतः अंत तक जरूर पढ़ें। हिंदी साहित्य में 'आधुनिक मीरा' के नाम से विख्यात और छायावाद के चौथे प्रमुख स्तंभ के रूप में प्रतिष्ठित महादेवी वर्मा का नाम आते ही करुणा, वेदना और रहस्यवाद का एक अलौकिक संसार सामने आ जाता है। वे न केवल एक महान कवयित्री थीं, बल्कि एक उत्कृष्ट रेखाचित्रकार, निबंधकार और नारी स्वतंत्रता की प्रबल समर्थक भी थीं। जीवन परिचय और बचपन महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च, 1907 को होली के दिन उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद शहर में हुआ था। उनके परिवार में ...

उत्तराखंड के साहित्यकार : राहुल सांकृत्यायन

उत्तराखंड के प्रसिद्ध साहित्यकार : राहुल सांकृत्यायन  जैसा कि आप जानते हैं इस लेख से पूर्व सुमित्रानंदन के जीवन परिचय और उनकी प्रमुख रचनाओं के बारे में पढ़ चुके हैं। आज हम राहुल सांकृत्यायन के जीवन परिचय और उनकी सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे। अतः ध्यानपूर्वक पूरा लेख पढ़ें। हिंदी साहित्य में 'महापंडित' और 'घुमक्कड़ शास्त्र के जनक' के रूप में विख्यात राहुल सांकृत्यायन का नाम आधुनिक हिंदी गद्य के इतिहास में सबसे अनूठा है। वे केवल एक लेखक या कवि नहीं थे, बल्कि एक असाधारण भाषाविद्, इतिहासकार, पुरातत्वविद् और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने ज्ञान की खोज में अपना पूरा जीवन यात्राओं में समर्पित कर दिया। आइए, उनके संपूर्ण जीवन और अद्वितीय साहित्य को विस्तार से समझते हैं। जीवन परिचय, राहुल सांकृत्यायन का जन्म 9 अप्रैल, 1893 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के 'पंदहा' नामक गांव (उनके ननिहाल) में हुआ था। उनका पैतृक गांव आजमगढ़ का 'कनैला' था। उनके बचपन का नाम केदारनाथ पांडेय था। उनका शुरुआती जीवन बहुत सरल नहीं था; बचपन में ही उनकी माता कुलवंती देवी का निध...

Hindi Sahitya (सुमित्रानंदन पंत के बारे में जानें विस्तार से)

हिन्दी साहित्य  "नमस्कार दोस्तों, आज हम इस लेख से हिन्दी साहित्य के सभी प्रमुख साहित्यकारों की एक श्रृंखला शुरू कर रहे हैं। जिसमें प्रत्येक साहित्यकार के बारे में विस्तार से बताया गया है। और इसके साथ ही शार्ट नोट्स हमारे टेलीग्राम चैनल पर उपलब्ध कराए जाएंगे। और अन्त में 200 बहुविकल्पीय प्रश्न तैयार किए जाएंगे। यदि आप सभी साहित्यकारों के बारे में पढ़ना चाहते हैं तो संपर्क करें। आज के इस आर्टिकल में हम उत्तराखंड समूह ग और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के हिंदी पाठ्यक्रम के अंतर्गत आने वाले सुकुमार सुमित्रानंदन पंत के जीवन परिचय और उनकी सभी प्रमुख रचनाओं के बारे में पढ़ेंगे। सुमित्रानंदन पंत हिंदी साहित्य के 'सुकुमार कवि' और छायावाद के प्रमुख स्तंभ सुमित्रानंदन पंत का जीवन और उनकी रचनाएँ हिंदी जगत की अनमोल धरोहर हैं। अल्मोड़ा की वादियों से निकलकर ज्ञानपीठ पुरस्कार तक पहुँचने का उनका सफर बेहद प्रेरणादायक है। आइए, उनके जीवन, शिक्षा और साहित्य के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं। जीवन परिचय और बचपन का संघर्ष सुमित्रानंदन पंत का जन्म 20 मई, 1900 को कौसानी (अब जिला बागेश्वर,...

सर्वनाम और उसके भेद (भाग -05)

सर्वनाम और उसके भेद (भाग -05) देवभूमि उत्तराखंड द्वारा उत्तराखंड की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु हिन्दी के सम्पूर्ण नोट्स प्रश्नोत्तरी सहित तैयार किए जा रहे हैं। सभी नोट्स प्राप्त करने के लिए संपर्क करें -9568166280 सर्वनाम क्या है? सर्वनाम :- सर्वनाम दो शब्दों से मिलकर बना है। सर्व+नाम (सभी + नाम)। संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते है। अर्थात किसी वाक्य में एक ही शब्द की बार-बार पुनरावृति न हो, इसके लिए संज्ञा के स्थान पर सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किया जाता है। जैसे - मैं, तुम, वह, यह, आप, कौन, कोई, इसका, उसका, तुम्हारा, हमारा और आपका आदि । उदाहरण :-  अमित दिल्ली रहता है,  वह नहाँ नौकरी करता है. पिताजी विदेश रहते हैं,  वे वहाँ नौकरी करते है सर्वनाम के भेद 1. पुरुषवावक उत्तम पुरुष -  मध्यम पुरुष अन्य पुरुष  2. निश्चयवाचक 3. अनिश्चयवाचक 4. सम्बधवाचक 5. प्रश्नवाचक 6. निजवाचक 1. पुरुषवाचक सर्वनाम :- वे सर्वनाम शब्द जिनका प्रयोग बोलने वाला व्यक्ति अपने लिए, सुनने वाले के लिए या किसी अन्य के लिए प्रयोग करता है। जैसे - मैं, हम, तू, आप, ये, वे,...

हिन्दी प्रश्नोत्तरी -03 (शब्दों का वर्गीकरण)

हिन्दी प्रश्नोत्तरी (भाग -03) शब्दों के वर्गीकरण से सम्बंधित महत्त्वपूर्ण प्रश्न  वर्तमान परिक्षा के पैटर्न को देखते हुए दिए गए लेख में शब्दों के वर्गीकरण (हिन्दी नोट्स भाग -03) से 40+ बहुविकल्पीय प्रश्नों को तैयार किया गया है। इस प्रश्नोत्तरी में तार्किक प्रश्न, सुमेलित, कथन-कारक वाले बहुविकल्पीय प्रश्नों को तैयार किया गया है। उम्मीद करते हैं इन प्रश्नों के हल करने से आपके हिन्दी में शब्दों के वर्गीकरण से सम्बंधित सभी प्रश्नों के उत्तर सही करने में मदद मिलेगी। हिन्दी प्रश्नोत्तरी (भाग-03) (1) शब्दों का वर्गीकरण कितने आधारों पर किया जा सकता है? (a) दो (b) तीन (c) चार (d) पाँच (2) उत्पत्ति / स्रोत / इतिहास के आधार पर कौन से शब्द नहीं आते हैं? (a) तत्सम शब्द (b) योगिक शब्द (c) देशज शब्द (d) विदेशी शब्द (3) निम्न कथनों पर विचार कीजिए  कथन 1: तद्भव शब्दों में अनुस्वार का प्रयोग होता है। कथन 2: तत्सम शब्दों में चंद्रबिंदु का प्रयोग होता है। उत्तर दीजिए  (a) केवल कथन 1 सही है (b) केवल कथन 2 सही है (c) दोनों कथन सही हैं (d) दोनों कथन गलत हैं (4) तद्भव शब्द "पाहन" का तत्सम रूप क्...