सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

गजानन माधव मुक्तिबोध : Biography

हिन्दी भाषा के प्रमुख साहित्यकार  नमस्कार दोस्तों आज हम हिंदी साहित्य के सिलेबस के अनुसार बाहरी राज्यों में जन्म लेने वाले साहित्यकारों का अध्ययन करेंगे।‌ जो उत्तराखंड की परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं आज के लेख में गजानन माधव मुक्तिबोध के जीवन परिचय और उनकी प्रमुख सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे । इससे पूर्व हम सुमित्रानंदन पंत, राहुल सांकृत्यायन, महादेवी वर्मा, शैलेश मटियानी और मंगलेश डबराल के बारे में विस्तार से पढ़ चुके हैं। जिनके लिंक लेख के अंत में नीचे दिए गए हैं। तो आईए जानते हैं गजानन मुक्तिबोध के बारे में विस्तार से - गजानन माधव मुक्तिबोध  हिंदी साहित्य में 'अंधेरे के कवि' और फेंटेसी के बेजोड़ शिल्पी के रूप में विख्यात गजानन माधव मुक्तिबोध का नाम आधुनिक हिंदी काव्य के इतिहास में सबसे अलग और चमकीला है । वे प्रगतिशील चेतना और प्रयोगवाद के एक ऐसे अनूठे सेतु थे, जिन्होंने कविता को आत्म संघर्ष, आत्मा खोज और व्यवस्था के खिलाफ एक तीव्र बौद्धिक हथियार बनाया।  जीवन परिचय  गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवंबर, 1917 को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के 'श्...

उम्मीदें : काव्य संग्रह by sunil

       काव्य : संग्रह


हेलो दोस्तों ,
कविताओं का सफर जारी है । कविताएं कब दिल पर उतर जाए जानें कब रूह में समा जाएं, जानें कब  संगीत बन जाए। यह तो लिखने वाला भी नहीं जानता बस वो दिल की सच्चाई , विचार , फीलिंग लिखते हैं और चंद शब्दों के सामने प्रस्तुत करते हैं। कोई गायक उन शब्दों को समझ लें तब एक संगीत निकलता है। पहला प्रयास मेरी डायरी से , अपनी कविता को गाने का रूप देने की पहली दफा कोशिश की है। वैसे तो यह एक गाना है। जिसे अगला भाग कह सकते हैं "हंसू जब मैं गाऊ तुझे " धुन तो वहीं से मिली है।  लेकिन रचना अलग है। शीर्षक है "मैं तेरा इंतजार करूं"

मैं तेरा इंतजार करूं


बात आधी  है अधूरी , 
कैसे तुझे मैं बताऊं।
 बात-करते, बात-करते, 
 तुझ में ही खो जाऊं।।
मिटा दे जो फासले है ये ,
बता दे कोई बात है अगर 
दिला दे जो राहत मुझे, 
मैं तेरा दीदार करूं, 
मैं तेरा इंतजार करूं ।

रात आधी है अधूरी , 
चलने को है लंबी दूरी।
बिन तेरे कदम कैसे बढ़ाऊ?
 तुझे-देखते, तुझे देखते 
सफर यूं ही कट जाए।
 दे दे कोई साथ मेरा,  
थाम ले जो हाथ मेरा ।

मोहब्बत आधी है अधूरी , 
कैसे मैं यह निभाऊं,
 कहने को तो साथ है तेरा,
 पर क्यों नहीं है तू हर जगह।।
 तू आजा मेरी बाहों में,
 बता दे मुझे  है जो गिलेे।
 तू बस चल दे साथ मेरे।
 चलो कहीं हम तुम मिले ।
मैं तेरा दीदार करूं, 
मैं तेरा इंतजार करूं।।

   By : sunil

उम्मीदें


अब मैं खुश हूं ,
अब मैं उम्मीद नहीं रखता
मैंने अक्सर यह पाया है,
उम्मीदें टूट जाया करती हैं।
शायद उतना दुख न हो जिंदगी में,
उम्मीदों का टुटना ही बड़ा दुःख बन जाता है।

अब मैं हंसता बहूत हूं,
अब मैं नफरतों के बीज नहीं बोता।
दुनिया मनचली है, बस प्रेम की ही कमी है,
बिखर गए हैं मोती इन्हें कवि पिरोएगा, 
द्वेष भरा है जिनके मन में, प्रेम-बीज बोएगा।

ना तो मुझे मशहूर होने का शौक है ,
ना तो  मशहूर होने का कोई इरादा।
 मैं  बस अपना काम करता हूं ,
मैं तो बस अल्फाज लिखता हूं।
दिल की गहराइयों को छूने की चाह रखता हूं .
साहिल पहुंचे मंजिल तक ऐसा पैगाम लिखता हूं।

   By : sunil

यदि आपको मेरी कविताएं पसंद आती हैं। तो अधिक से अधिक लोगों को शेयर करें। उपयुक्त सभी कविताएं स्वरचित है। इसी तरह की अन्य कविताएं पढ़ने के लिए नीचे में दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
धन्यवाद।

इन्हें भी पढ़ें।

कविता लेखन

ख्याब सजे हैं आंखों में


टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

If you have any doubts.
Please let me now.