Economics Important MCQ अर्थशास्त्र विषय से विगत 5 वर्षों के दौरान उत्तराखंड समूह ग की सभी परीक्षाओं में पूछे गये महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न :- अर्थशास्त्र के महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न :- प्रश्न 1. निम्न कथनों में से कौन-सा कथन सही है/हैं? कथन - I : मुद्रा बैंक की स्थापना प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अधीन 2020 में की गई थी। कथन - II : 'मुद्रा' ऋण शिशु, किशोर और तरुण स्कीम के अन्तर्गत प्रदान किये जाते हैं। (A) केवल कथन - I (B) केवल कथन – II (C) दोनों कथन I और II (D) न कथन - I और न कथन – II उत्तर: (B) केवल कथन – II व्याख्या: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) की शुरुआत 8 अप्रैल 2015 को हुई थी, न कि 2020 में। इस योजना के तहत गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि लघु/सूक्ष्म उद्यमों को 10 लाख तक का ऋण दिया जाता है, जिसे तीन श्रेणियों: शिशु (50,000 तक), किशोर (5 लाख तक) और तरुण (10 लाख तक) में विभाजित किया गया है। प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-सा एक मानव पूँजी निर्माण का उपयुक्त घटक नहीं है? (A) शिक्षा पर व्यय ...
काव्य : संग्रह
हेलो दोस्तों ,
कविताओं का सफर जारी है । कविताएं कब दिल पर उतर जाए जानें कब रूह में समा जाएं, जानें कब संगीत बन जाए। यह तो लिखने वाला भी नहीं जानता बस वो दिल की सच्चाई , विचार , फीलिंग लिखते हैं और चंद शब्दों के सामने प्रस्तुत करते हैं। कोई गायक उन शब्दों को समझ लें तब एक संगीत निकलता है। पहला प्रयास मेरी डायरी से , अपनी कविता को गाने का रूप देने की पहली दफा कोशिश की है। वैसे तो यह एक गाना है। जिसे अगला भाग कह सकते हैं "हंसू जब मैं गाऊ तुझे " धुन तो वहीं से मिली है। लेकिन रचना अलग है। शीर्षक है "मैं तेरा इंतजार करूं"
मैं तेरा इंतजार करूं
बात आधी है अधूरी ,
कैसे तुझे मैं बताऊं।
बात-करते, बात-करते,
तुझ में ही खो जाऊं।।
मिटा दे जो फासले है ये ,
बता दे कोई बात है अगर
दिला दे जो राहत मुझे,
मैं तेरा दीदार करूं,
मैं तेरा इंतजार करूं ।
रात आधी है अधूरी ,
चलने को है लंबी दूरी।
बिन तेरे कदम कैसे बढ़ाऊ?
तुझे-देखते, तुझे देखते
सफर यूं ही कट जाए।
दे दे कोई साथ मेरा,
थाम ले जो हाथ मेरा ।
मोहब्बत आधी है अधूरी ,
कैसे मैं यह निभाऊं,
कहने को तो साथ है तेरा,
पर क्यों नहीं है तू हर जगह।।
तू आजा मेरी बाहों में,
बता दे मुझे है जो गिलेे।
तू बस चल दे साथ मेरे।
चलो कहीं हम तुम मिले ।
मैं तेरा दीदार करूं,
मैं तेरा इंतजार करूं।।
By : sunil
उम्मीदें
अब मैं खुश हूं ,
अब मैं उम्मीद नहीं रखता
मैंने अक्सर यह पाया है,
उम्मीदें टूट जाया करती हैं।
शायद उतना दुख न हो जिंदगी में,
उम्मीदों का टुटना ही बड़ा दुःख बन जाता है।
अब मैं हंसता बहूत हूं,
अब मैं नफरतों के बीज नहीं बोता।
दुनिया मनचली है, बस प्रेम की ही कमी है,
बिखर गए हैं मोती इन्हें कवि पिरोएगा,
द्वेष भरा है जिनके मन में, प्रेम-बीज बोएगा।
ना तो मुझे मशहूर होने का शौक है ,
ना तो मशहूर होने का कोई इरादा।
मैं बस अपना काम करता हूं ,
मैं तो बस अल्फाज लिखता हूं।
दिल की गहराइयों को छूने की चाह रखता हूं .
साहिल पहुंचे मंजिल तक ऐसा पैगाम लिखता हूं।
By : sunil
यदि आपको मेरी कविताएं पसंद आती हैं। तो अधिक से अधिक लोगों को शेयर करें। उपयुक्त सभी कविताएं स्वरचित है। इसी तरह की अन्य कविताएं पढ़ने के लिए नीचे में दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
धन्यवाद।
इन्हें भी पढ़ें।
Very nice
जवाब देंहटाएं