पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
उत्तराखंड के प्रमुख साहित्यकार आज के लेख में हम मंगलेश डबराल के जीवन परिचय एवं उनकी सभी रचनाओं का विस्तृत अध्ययन करेंगे। जैसा कि आप सभी जानते हैं हम उत्तराखंड समूह ग की सभी परीक्षाओं हेतु हिन्दी सिलेबस के अनुसार उत्तराखंड के साहित्यकारों की क्रमानुसार अध्ययन कर रहे हैं। इसी क्रम में हम आज भाग -05 में मंगलेश डबराल के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे। मंगलेश डबराल का सम्पूर्ण जीवन परिचय पहाड़ों से पलायन कोई आज की समस्या नहीं है, पहाड़ों में शुरुआत से ही बेरोजगारी रही है जिस कारण आजीविका की तलाश में वहां के निवासी पलायन करते हैं नौकरी की तलाश में, और एक दिन मंगलेश भी चल पड़ा शहर की ओर जब वे नौकरी की तलाश में दिल्ली और भोपाल जैसे बड़े शहरों में आए, तो उन्होंने देखा कि कैसे आधुनिकता की दौड़ में मनुष्य अपनी संवेदनाएं और अपनी जड़ें खोता जा रहा है। वे स्वयं संगीत (विशेष रूप से भारतीय शास्त्रीय संगीत) के बहुत शौकीन थे, जिसने उनकी कविताओं को एक आंतरिक लय प्रदान की। उन्होंने महसूस किया कि जो बातें वे अपनी पत्रकारिता की खबरों में नहीं कह पाते, उन्हें व्यक्त करने के लिए कविता ही ...