पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
Uttarakhand October Current Affairs 2025 देवभूमि उत्तराखंड द्वारा बेवसाइट पर जनवरी से दिसंबर तक के पिछले 2 वर्ष के करेंट अफेयर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जो आगामी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सभी करेंट अफेयर्स को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इसके अलावा उत्तराखंड लोवर पीसीएस परीक्षा 2026 में भी 20-22 प्रश्न पूछे जाते हैं। अतः सभी प्रश्नों को ध्यानपूर्वक अवश्य पढ़ें। उत्तराखंड स्पेशल करेंट अफेयर्स 2025 प्रश्न 1 : देवलेश्वर महादेव मंदिर में बैकुंठ चतुर्दशी मेले की अनूठी विशेषता क्या है? a) रामलीला का मंचन b) 'चक्रव्यूह' नाटक का मंचन c) कृष्ण लीला का प्रदर्शन d) दुर्गा पूजा व्याख्या: उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल स्थित गगवाडस घाटी में सिद्धपीठ श्री देवलेश्वर महादेव मंदिर में बैकुंठ चतुर्दशी मेले का आयोजन किया जाता है। हालांकि, प्रसिद्ध बैकुंठ चतुर्दशी मेला मुख्य रूप से श्रीनगर स्थित कमलेश्वर महादेव मंदिर में लगता है, लेकिन इस मंदिर में भी इसका आयोजन होता है। इस मेले की शुरुआत डांग गांव से आने वाली शिव ध्वजा यात्रा से होती है। इस धार्मिक उत्सव की एक अनूठी विशेषता यह है कि यहाँ महाभा...