हिन्दी भाषा के प्रमुख साहित्यकार नमस्कार दोस्तों आज हम हिंदी साहित्य के सिलेबस के अनुसार बाहरी राज्यों में जन्म लेने वाले साहित्यकारों का अध्ययन करेंगे। जो उत्तराखंड की परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं आज के लेख में गजानन माधव मुक्तिबोध के जीवन परिचय और उनकी प्रमुख सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे । इससे पूर्व हम सुमित्रानंदन पंत, राहुल सांकृत्यायन, महादेवी वर्मा, शैलेश मटियानी और मंगलेश डबराल के बारे में विस्तार से पढ़ चुके हैं। जिनके लिंक लेख के अंत में नीचे दिए गए हैं। तो आईए जानते हैं गजानन मुक्तिबोध के बारे में विस्तार से - गजानन माधव मुक्तिबोध हिंदी साहित्य में 'अंधेरे के कवि' और फेंटेसी के बेजोड़ शिल्पी के रूप में विख्यात गजानन माधव मुक्तिबोध का नाम आधुनिक हिंदी काव्य के इतिहास में सबसे अलग और चमकीला है । वे प्रगतिशील चेतना और प्रयोगवाद के एक ऐसे अनूठे सेतु थे, जिन्होंने कविता को आत्म संघर्ष, आत्मा खोज और व्यवस्था के खिलाफ एक तीव्र बौद्धिक हथियार बनाया। जीवन परिचय गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवंबर, 1917 को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के 'श्...
Uttarakhand October Current Affairs 2025 देवभूमि उत्तराखंड द्वारा बेवसाइट पर जनवरी से दिसंबर तक के पिछले 2 वर्ष के करेंट अफेयर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जो आगामी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सभी करेंट अफेयर्स को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इसके अलावा उत्तराखंड लोवर पीसीएस परीक्षा 2026 में भी 20-22 प्रश्न पूछे जाते हैं। अतः सभी प्रश्नों को ध्यानपूर्वक अवश्य पढ़ें। उत्तराखंड स्पेशल करेंट अफेयर्स 2025 प्रश्न 1 : देवलेश्वर महादेव मंदिर में बैकुंठ चतुर्दशी मेले की अनूठी विशेषता क्या है? a) रामलीला का मंचन b) 'चक्रव्यूह' नाटक का मंचन c) कृष्ण लीला का प्रदर्शन d) दुर्गा पूजा व्याख्या: उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल स्थित गगवाडस घाटी में सिद्धपीठ श्री देवलेश्वर महादेव मंदिर में बैकुंठ चतुर्दशी मेले का आयोजन किया जाता है। हालांकि, प्रसिद्ध बैकुंठ चतुर्दशी मेला मुख्य रूप से श्रीनगर स्थित कमलेश्वर महादेव मंदिर में लगता है, लेकिन इस मंदिर में भी इसका आयोजन होता है। इस मेले की शुरुआत डांग गांव से आने वाली शिव ध्वजा यात्रा से होती है। इस धार्मिक उत्सव की एक अनूठी विशेषता यह है कि यहाँ महाभा...