पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
चंद्रयान मिशन -3 से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न (Chandrayan Misson -3) चंद्रयान मिशन-3 वर्ष का सर्वाधिक महत्वपूर्ण करेंट अफेयर्स टॉपिक है। यहां से इस वर्ष प्रत्येक परीक्षा में शत प्रतिशत प्रश्न आने की संभावना है। देवभूमि उत्तराखंड द्वारा इस टॉपिक को तैयार करने हेतु महत्त्वपूर्ण प्रश्नों का सेट तैयार किया गया है। जो सभी पैटर्न पर आधारित है। अतः सभी प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़ें। चंद्रयान मिशन -3 इसरो द्वारा भारत का चंद्रयान -3 मिशन 14 जुलाई 2023 को दोपहर 2:35 पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ। यह रॉकेट LVM3-M4 से लांच किया गया। तथा इसमें लगे प्रमुख रॉकेट इंजन का नाम ICE क्रायोजेनिक था। जिसमें लगभग 27000 किलोग्राम से भी अधिक की ईंधन की क्षमता थी। और चंद्रयान-3 का कुल वजन 3900 किलोग्राम था। पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 384400 किलोमीटर है। पहली बार चांद पर कदम रखने का खिताब अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग को प्राप्त है जिन्होंने 20 जुलाई 1969 को चांद पर पहला कदम रखा था। चंद्रयान मिशन -3 की कुल लागत 615 करोड रुपए थी। इसके साथ विक्रम नाम का लैंडर तथा प्रज्ञान नाम ...