हिन्दी भाषा के प्रमुख साहित्यकार नमस्कार दोस्तों आज हम हिंदी साहित्य के सिलेबस के अनुसार बाहरी राज्यों में जन्म लेने वाले साहित्यकारों का अध्ययन करेंगे। जो उत्तराखंड की परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं आज के लेख में गजानन माधव मुक्तिबोध के जीवन परिचय और उनकी प्रमुख सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे । इससे पूर्व हम सुमित्रानंदन पंत, राहुल सांकृत्यायन, महादेवी वर्मा, शैलेश मटियानी और मंगलेश डबराल के बारे में विस्तार से पढ़ चुके हैं। जिनके लिंक लेख के अंत में नीचे दिए गए हैं। तो आईए जानते हैं गजानन मुक्तिबोध के बारे में विस्तार से - गजानन माधव मुक्तिबोध हिंदी साहित्य में 'अंधेरे के कवि' और फेंटेसी के बेजोड़ शिल्पी के रूप में विख्यात गजानन माधव मुक्तिबोध का नाम आधुनिक हिंदी काव्य के इतिहास में सबसे अलग और चमकीला है । वे प्रगतिशील चेतना और प्रयोगवाद के एक ऐसे अनूठे सेतु थे, जिन्होंने कविता को आत्म संघर्ष, आत्मा खोज और व्यवस्था के खिलाफ एक तीव्र बौद्धिक हथियार बनाया। जीवन परिचय गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवंबर, 1917 को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के 'श्...
शब्द विचार रूप परिवर्तन प्रयोग के आधार पर विकारी शब्द संज्ञा सर्वनाम विशेषण क्रिया अविकारी अव्यव क्रिया विशेषण संबंधबोधक समुच्चयबोधक विस्मयादिबोधक निपात विकारी शब्द - वह शब्द जिनका रूप, लिंग, वचन, कारक, काल के अनुसार परिवर्तित हो जाता है। विकारी शब्द कहलाते हैं। जैसे - संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया संज्ञा क्या है ? संज्ञा का शाब्दिक अर्थ है - नाम। संज्ञा सम+ज्ञा से मिलकर बना है जिसका अर्थ समान जानना है । किसी व्यक्ति, वस्तु और स्थान आदि के नाम की जाति अथवा किसी भाव के अर्थ का बोध कराने वाले शब्द संज्ञा कहलाते हैं। संज्ञा के भेद व्युत्पत्ति के आधार पर संज्ञा के तीन भेद हैं। रूढ़ संज्ञा - ऐसी संज्ञाऐं जिनके खंड निरर्थक होते हैं। जैसे - आम, घर, हाथ, यौगिक संज्ञा - ऐसी संज्ञाऐं जिनके खंड निरर्थक होते हैं। जैसे - रसोईघर, पुस्तकालय, हिमालय योगरूढ़ संज्ञा - ऐसी संज्ञाऐं जिनके खंड सार्थक हों, परंतु जिसका अर्थ खण्ड शब्दों से निकलने वाले अर्थ से भिन्न हो। जैसे - पंकज, लम्बोदर, दशानन संज्ञा के प्रकार व्यक्तिवाचक संज्...