उत्तराखंड के प्रमुख साहित्यकार महादेवी वर्मा जैसा कि आप सभी जानते हैं कि देवभूमि उत्तराखंड द्वारा उत्तराखंड की परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सभी साहित्यकारों का अध्ययन किया जा रहा है, इससे पूर्व राहुल सांकृत्यायन और सुमित्रानंदन के बारे में पढ़ चुके हैं। आज के लेख में हम महादेव वर्मा के बारे में विस्तार जानेंगे जिसमें उनका जीवन परिचय और उनकी सभी प्रमुख रचनाओं का सामान्य परिचय के साथ पढ़ेंगे। महादेवी वर्मा की रचनाओं से प्रतिवर्ष प्रत्येक परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते हैं इसलिए परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण लेखिका हैं। अतः अंत तक जरूर पढ़ें। हिंदी साहित्य में 'आधुनिक मीरा' के नाम से विख्यात और छायावाद के चौथे प्रमुख स्तंभ के रूप में प्रतिष्ठित महादेवी वर्मा का नाम आते ही करुणा, वेदना और रहस्यवाद का एक अलौकिक संसार सामने आ जाता है। वे न केवल एक महान कवयित्री थीं, बल्कि एक उत्कृष्ट रेखाचित्रकार, निबंधकार और नारी स्वतंत्रता की प्रबल समर्थक भी थीं। जीवन परिचय और बचपन महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च, 1907 को होली के दिन उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद शहर में हुआ था। उनके परिवार में ...
उत्तराखंड के प्रसिद्ध साहित्यकार : राहुल सांकृत्यायन जैसा कि आप जानते हैं इस लेख से पूर्व सुमित्रानंदन के जीवन परिचय और उनकी प्रमुख रचनाओं के बारे में पढ़ चुके हैं। आज हम राहुल सांकृत्यायन के जीवन परिचय और उनकी सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे। अतः ध्यानपूर्वक पूरा लेख पढ़ें। हिंदी साहित्य में 'महापंडित' और 'घुमक्कड़ शास्त्र के जनक' के रूप में विख्यात राहुल सांकृत्यायन का नाम आधुनिक हिंदी गद्य के इतिहास में सबसे अनूठा है। वे केवल एक लेखक या कवि नहीं थे, बल्कि एक असाधारण भाषाविद्, इतिहासकार, पुरातत्वविद् और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने ज्ञान की खोज में अपना पूरा जीवन यात्राओं में समर्पित कर दिया। आइए, उनके संपूर्ण जीवन और अद्वितीय साहित्य को विस्तार से समझते हैं। जीवन परिचय, राहुल सांकृत्यायन का जन्म 9 अप्रैल, 1893 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के 'पंदहा' नामक गांव (उनके ननिहाल) में हुआ था। उनका पैतृक गांव आजमगढ़ का 'कनैला' था। उनके बचपन का नाम केदारनाथ पांडेय था। उनका शुरुआती जीवन बहुत सरल नहीं था; बचपन में ही उनकी माता कुलवंती देवी का निध...