उत्तराखंड के प्रमुख साहित्यकार आज के लेख में हम मंगलेश डबराल के जीवन परिचय एवं उनकी सभी रचनाओं का विस्तृत अध्ययन करेंगे। जैसा कि आप सभी जानते हैं हम उत्तराखंड समूह ग की सभी परीक्षाओं हेतु हिन्दी सिलेबस के अनुसार उत्तराखंड के साहित्यकारों की क्रमानुसार अध्ययन कर रहे हैं। इसी क्रम में हम आज भाग -05 में मंगलेश डबराल के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे। मंगलेश डबराल का सम्पूर्ण जीवन परिचय पहाड़ों से पलायन कोई आज की समस्या नहीं है, पहाड़ों में शुरुआत से ही बेरोजगारी रही है जिस कारण आजीविका की तलाश में वहां के निवासी पलायन करते हैं नौकरी की तलाश में, और एक दिन मंगलेश भी चल पड़ा शहर की ओर जब वे नौकरी की तलाश में दिल्ली और भोपाल जैसे बड़े शहरों में आए, तो उन्होंने देखा कि कैसे आधुनिकता की दौड़ में मनुष्य अपनी संवेदनाएं और अपनी जड़ें खोता जा रहा है। वे स्वयं संगीत (विशेष रूप से भारतीय शास्त्रीय संगीत) के बहुत शौकीन थे, जिसने उनकी कविताओं को एक आंतरिक लय प्रदान की। उन्होंने महसूस किया कि जो बातें वे अपनी पत्रकारिता की खबरों में नहीं कह पाते, उन्हें व्यक्त करने के लिए कविता ही ...
उत्तराखंड के प्रमुख साहित्यकार : शैलेश मटियानी आज हम उत्तराखंड के प्रमुख साहित्यकारों की सीरीज में चौथे प्रमुख साहित्यकार शैलेश मटियानी के जीवन परिचय एवं उनकी सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से पढ़ने वाले हैं। यूं तो आपने अनेकों किताबें पढ़ी हैं लेकिन जहां तक मैं समझता हूं बहुत कम छात्र होंगे जिन्होंने शैलेश मटियानी के बारे में विस्तार से पढ़ा होगा। कोई भी साहित्यकार शौक से रचनाएं नहीं लिखते। हालांकि की रचनाएं रुचि पर निर्भर हैं लेकिन उस भी ज्यादा निर्भर करती है परिस्थितियां। जो सबकी अलग-अलग होती है। उत्तराखंड की माटी से सरोकार रखने वाले और हिंदी साहित्य में 'आंचलिक कथाकार' व 'मजदूरों-शोषितों के मसीहा' के रूप में प्रतिष्ठित शैलेश मटियानी का नाम समकालीन कथा साहित्य में एक विशेष स्थान रखता है। उन्होंने हिंदी कहानी और उपन्यास को केवल मध्यवर्गीय समाज से हटाकर बोरीवली के कुलियों, अलमोड़ा की वादियों के उपेक्षित लोगों और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के वास्तविक यथार्थ से जोड़ा। तो आइए आज हम जानते हैं शैलेश मटियानी कैसे साहित्यकार बने। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा कहां ...