पृथ्वी की आंतरिक संरचना "नमस्कार साथियों/छात्रों, आज के इस लेख में हम पृथ्वी की आंतरिक संरचना पढ़ने वाले हैं। यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है प्रत्येक परीक्षा में 2-3 प्रश्न यहां से अवश्य पूछे जाते हैं। देवभूमि उत्तराखंड द्वारा यह प्रयास किया गया है कि सभी तथ्यों को आसान भाषा में परिभाषित किया जा सके। इस लेख में दिए गए सभी तथ्य 6-12 तक की एनसीईआरटी पुस्तक और माजिद हुसैन की भूगोल से लिए गए हैं। प्रस्तावना, जिस पृथ्वी पर हम रहते हैं, उसके बाहरी रूप—जैसे ऊंचे पर्वत, गहरी नदियाँ, विशाल महासागर और हरे-भरे मैदानों से तो हम भली-भांति परिचित हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस ठोस जमीन पर हम खड़े हैं, उसके हजारों किलोमीटर नीचे पैर पसारकर बैठी दुनिया कैसी दिखती होगी? जैसे एक पके हुए आम का सबसे बाहरी हिस्सा उसका पतला छिलका होता है, बीच में उसका रसदार गूदा और सबसे अंदर एक ठोस गुठली होती है; या जैसे एक उबले हुए अंडे में सबसे बाहर एक पतला सफेद छिलका, फिर सफेद भाग और केंद्र में पीला भाग (Yolk) होता है—ठीक वैसे ही हमारी पृथ्वी भी परतों में बंटी हुई है। भले ...
हिन्दी भाषा के प्रमुख साहित्यकार नमस्कार दोस्तों आज हम हिंदी साहित्य के सिलेबस के अनुसार बाहरी राज्यों में जन्म लेने वाले साहित्यकारों का अध्ययन करेंगे। जो उत्तराखंड की परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं आज के लेख में गजानन माधव मुक्तिबोध के जीवन परिचय और उनकी प्रमुख सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे । इससे पूर्व हम सुमित्रानंदन पंत, राहुल सांकृत्यायन, महादेवी वर्मा, शैलेश मटियानी और मंगलेश डबराल के बारे में विस्तार से पढ़ चुके हैं। जिनके लिंक लेख के अंत में नीचे दिए गए हैं। तो आईए जानते हैं गजानन मुक्तिबोध के बारे में विस्तार से - गजानन माधव मुक्तिबोध हिंदी साहित्य में 'अंधेरे के कवि' और फेंटेसी के बेजोड़ शिल्पी के रूप में विख्यात गजानन माधव मुक्तिबोध का नाम आधुनिक हिंदी काव्य के इतिहास में सबसे अलग और चमकीला है । वे प्रगतिशील चेतना और प्रयोगवाद के एक ऐसे अनूठे सेतु थे, जिन्होंने कविता को आत्म संघर्ष, आत्मा खोज और व्यवस्था के खिलाफ एक तीव्र बौद्धिक हथियार बनाया। जीवन परिचय गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवंबर, 1917 को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के 'श्...