उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Era) अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है। इस काल का कोई लिखित प्रमाण नहीं है, इसलिए इसका इतिहास गुफाओं में मिले शैल-चित्रों (Rock Paintings), पत्थरों के औजारों और प्राचीन कंकालों के आधार पर लिखा गया है। आइए जानते हैं विस्तार से - “धूल से भरी राहें और तपता हुआ सूरज... उत्तर भारत के एक गुमनाम गाँव के किनारे एक ऊँचा सा मिट्टी का टीला था। लोग वहाँ से ईंटें उखाड़ रहे थे, कोई अपने घर की दीवार बना रहा था, तो कोई उन पत्थरों को कचरा समझकर फेंक रहा था। वहीं दूर खड़ा एक अंग्रेज अफसर, जिसका नाम अलेक्जेंडर कनिंघम था, यह सब बड़े गौर से देख रहा था। उसके पास एक पुरानी किताब थी—चीनी यात्री ह्वेनसांग की डायरी। कनिंघम को यकीन था कि जिस टीले को लोग 'कचरा' समझ रहे हैं, उसके नीचे सम्राट अशोक का कोई महान शहर या बुद्ध का कोई पवित्र मठ दफन है। वो बेचैनी और वो खत कनिंघम रात भर सो नहीं पाए। उन्हें लग रहा था जैसे वो दफन शहर उन्हें पुकार रहे हों। उन्होंने सोचा, "अगर आज मैंने इन पत्थरों को नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियाँ कभी नहीं...
मां का संदेश
सफर -ए- Upsc
मां सब जानती है, अपने बच्चे को भलीभांति पहचानती है ।आपको लगता होगा - कि आप मां के बिना नहीं रह सकते हैं, लेकिन सच तो यह है मां अपने बच्चों के बिना नहीं रह सकती है । लेकिन मां को भी मालूम है - ममता के आंचल में बच्चे को बड़ा करना मूर्खता है। क्योंकि दुनिया में जुल्मों से भरी पड़ी है। कदम-कदम पर बहरूपिये खड़े हैं , जो ठगने को तैयार खड़े हैं। धोखा है , झूठ है, फरेब है, भ्रष्टाचार है। मां बचपन में ही बहुत कुछ सिखा देती है। लेकिन सारा दिन घर पर रहकर बाहरी दुनिया की बदलती तस्वीर नहीं दिखा पाती है । इसलिए दिल पर पत्थर रखकर अपने बच्चे को शिक्षा प्राप्ति के लिए खुद से दूर करती है। ताकि वह दुनिया की व्यवस्था को समझ सके। असहाय और बेसहारों की मदद करें । ऐसे ही एक मां अपने बच्चे को पढ़ने के लिए घर से दूर भेजती है। 10 वर्ष से ही वह बच्चा दुनिया को समझने लगता है। आसपास का माहौल देखता है । और तरह-तरह के बच्चों से, शिक्षकों से, व्यवसायियों से , खिलाड़ियों से , दोस्तों से मिलता है । वह देखता है , हर किसी में कुछ ना कुछ खूबी थी। इस तरह वह अपने आप में खूबी तलाशने लगता है। और इन्हीं बातों को सोचते हुए एक सपना सजाता है। वह अंत में upsc की परीक्षा की तैयारी करता है। और उसके सपनों को पूरा करने में उसकी मां हर संभव प्रयास करती है। दुनिया के रंगों में उसका ध्यान ना भटके इसलिए हमेशा एक संदेश देती है। तो वह संदेश क्या है ? अपनी मां के सभी संदेशों से प्रेरित होकर एक काव्य रचना की है।
मां का संदेश
बारिश आए, धूप आए ,
सर्द आए, वसन्त आए ।
तू वस इतना काम करना ,
हर हाल में पढ़ा़ई जारी रखना।
आएंगे मौसम मनलुभावन के ,
उड़ेगी पतंगे , खुले आसमानों में ,
मन विचलित, तृष्णा कल्पित ,
निर्भय होकर सफर करना।
शादी आये, बर्थ डे आए ,
प्यार आए, वेलेंनाटाइन डे आए ,
तू बस इतना याद रखना,
हर हाल में अफसर बनना ,
चाहे बीत जाए ये साल पूरा ।
मेहनत पूरी दिल से करना,
उम्मीदों का दीया बनाकर ,
जग रोशन करने की बारी रखना ।
दोस्तों यदि आपको मेरी कविताएं पसंद आती है तो मेरी कविताओं को अधिक से अधिक शेयर कीजिए। यदि आप यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं । तो मुझसे संपर्क (6396956412) कर सकते हैं। तैयारी में मेरी मदद कर सकते हैं और खुद की भी मदद कर सकते हैं। हाल ही में मैंने पिछले कुछ सालों के मेंस के उत्तर - लेखन का प्रयास किया है । कुछ वर्तमान समय के प्रश्नों के उत्तर लेखन का अभ्यास दृष्टि आईएएस की मदद से कर रहा हूं। मेरे द्वारा दिए गए उत्तर आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं।
नई शिक्षा नीति 2020 : उत्तर लेखन
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद : उत्तर लेखन
Bahut Sundar rachna h
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