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Uksssc Mock Test 2026

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काव्य संग्रह : वक्त जाया न करो

हिन्दी काव्य संग्रह

वक्त जाया न करो

यूं तो हर किसी पर,
वक्त जाया न करो,
तराशों उनको,
जो मोम की तरह हैंं।
रूठे तो मान जाए,
पिघलाएं तो पिघल जाए।
तपिश की सीमा पार करके,
जिस सांचे में ढाले ढल जाए।।

यूं तो हर किसी पर,
वक्त जाया न करो,
तराशों उनको,
जो तराजू की तरह हैं,
मुश्किलें कितनी भी बढ़ जाए,
कभी कम तो कभी ज्यादा हो जाए।
एक समय ऐसा हो,
सब कुछ सन्तुलन हो जाए।।

यूं तो हर किसी पर 
वक्त जाया न करो
तराशों उनको
जो पानी की तरह है,
परिस्थितियों को पहचान कर
स्वयं समर्पण हो जाए,
गम का कोई एहसास न हो
जिस पात्र में डालो वैसा हो जाए।।




Yu to har kisi par,
vakt jaya na kro,
Tarsho unko,
jo mom ki tarah hain,
Ruthe to maan jaye,
Pighalaye to pighal jaye,
Tapis ki seema paar karke,
Jis saanche mai dhale dhal jaye।।

Yu to har kisi par,
vakt jaya na kro,
Tarsho unko jo
 taraju ki tarah hain,
Mushkile kitni bhi bad jaye,
Kabhi kam to kabhi jyda ho jaye,
Bus ek samay aisa ho,
Sab santulan ho jaye।।

Yu to har kisi par,
vakt jaya na kro,
Tarsho unko jo
paani ki tarah hai,
Paristhtiyu ko pechan kar,
Swaym samrpan ho jaye,
Gum ka koi ehsaas na ho,
Jis paatr mai daalo, vaisa ho jaye।।


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