हिन्दी भाषा के प्रमुख साहित्यकार नमस्कार दोस्तों आज हम हिंदी साहित्य के सिलेबस के अनुसार बाहरी राज्यों में जन्म लेने वाले साहित्यकारों का अध्ययन करेंगे। जो उत्तराखंड की परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं आज के लेख में गजानन माधव मुक्तिबोध के जीवन परिचय और उनकी प्रमुख सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे । इससे पूर्व हम सुमित्रानंदन पंत, राहुल सांकृत्यायन, महादेवी वर्मा, शैलेश मटियानी और मंगलेश डबराल के बारे में विस्तार से पढ़ चुके हैं। जिनके लिंक लेख के अंत में नीचे दिए गए हैं। तो आईए जानते हैं गजानन मुक्तिबोध के बारे में विस्तार से - गजानन माधव मुक्तिबोध हिंदी साहित्य में 'अंधेरे के कवि' और फेंटेसी के बेजोड़ शिल्पी के रूप में विख्यात गजानन माधव मुक्तिबोध का नाम आधुनिक हिंदी काव्य के इतिहास में सबसे अलग और चमकीला है । वे प्रगतिशील चेतना और प्रयोगवाद के एक ऐसे अनूठे सेतु थे, जिन्होंने कविता को आत्म संघर्ष, आत्मा खोज और व्यवस्था के खिलाफ एक तीव्र बौद्धिक हथियार बनाया। जीवन परिचय गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवंबर, 1917 को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के 'श्...
पुरानी साइकिल
काव्य संग्रह
पुरानी साइकिल
होकर पुरानी साइकिल पर सवार,
मैं मिलने चला पुराने यार ,
याद आए वो लम्हे,
याद आई वो गलियां ,
जिन पर कई लम्हे गुजार ।
आज भी मेरे बचपन से,
मुझे बड़ा है प्यार।
वो संतरे की गोलियां
एक रुपए में आती थी चार ।
स्कूल जाते , बहाना बनाते
घर वाले कभी ना मनाते ।
अपनी हरकतों से थे लाचार ,
जान कर भी गलती करते बार-बार
वो कंचे की गोलियां ,
निशाने के थे सरताज,
वो बल्ले की फंटियों से
मारते थे सरहद पार ।
पैर नहीं थकते जब तक ,
हम खेलते बार-बार।
थकान क्या होती है ?
मुश्किलें क्या होती है ?
मालूम नहीं,
धुन के पक्के थे गबार ।
सोचते इन बातों को,
बात करते रातों को ,
पता ही नहीं चला ,
कब बड़े हो गए यार।।
नादानी
मुझमें मैं एक नादानी है।जानता है सब कुछ मन ।फिर भी यह कैसी मनमानी है?ऐसा नहीं है , समझ नहीं है ,ऐसा भी नहीं है, समझदारी नहीं हैशायद जिम्मेदारियों से डरता हूं।इसलिए एक बचपना छुपा कर रखता हूं।मालूम है एक दिन बड़ा हो ही जाना हैजिम्मेदारियों के तले दबी जाना है।फिर भी यह कैसी मनमानी है।चाहत बहुत है , कुछ कर गुजरने कीमालूम है ! यूं ही नहीं मिलती है मंजिले,हर कदम पर एक बड़ी कुर्बानी है ,देख रहा हूं दुनिया को ,समझ रहा हूं लोगों को ,गमों का पिटारा है सबके मन में ,एक नहीं , दो नहीं घर-घर की कहानी ।इससे अच्छी तो मेरी नादानी।
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Awesome Bhai... beautiful lines
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएंShandarr
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