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जनवरी, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

थारू जनजाति में प्रचलित लोककथा : खरिया और भरिया

लोककथा : खरिया और भरिया  नमस्कार दोस्तों आज हम थारू जनजाति कि संस्कृति के संरक्षण के लिए सदियों से प्रचलित लोककथाओं और लोकगीतों को शुरू करने जा रहे हैं। यूं तो थारू जनजाति के लोगों की अपनी कोई भाषा नहीं है। लेकिन सर्वाधिक प्रभाव ब्रजभाषा का देखने को मिलता है। किंतु समय परिर्वतन के साथ पहाड़ी, खड़ी बोली और हिन्दी का प्रभाव देखने को मिलता है। यदि हमारे द्वारा लिखी यह कहानी आपने कभी सुनी हो तो कमेंट अवश्य करें। खरिया और भरिया : लोककथा  यह कहानी दो भाइयों की है - खरिया और भरिया। इस कहानी में खरिया बड़ा भाई और थोड़ा चालक था वहीं बढ़िया छोटा भाई और बहुत सीधा साधा था। यह कथा थारू समाज के उसे समय की है जब उनके पास धन के रूप में केवल खेती और मवेशी हुआ करते थे। एक गांव में दो भाई रहा करते थे। दोनों भाई बहुत मेहनती थे लेकिन अक्सर वे आपस के छोटे छोटे विवादों में फंस जाया करते थे। एक दिन अचानक पिता की मृत्यु जाती है। उनके पिता की मृत्यु के बाद, खरिया ने चालाकी से घर की संपत्तियों का बंटवारा कुछ इस तरह किया : कंबल का बंटवारा : खरिया ने कहा, "भाई, यह कंबल दिन में मेरा रहेगा और रात में तुम्...

मेरी पहली मोहब्बत : काव्य संग्रह

          काव्य संग्रह मेरी पहली मोहब्बत, Part -1 अक्सर यह रातों के आंसू , दिल में सैलाब लेकर आते हैं छूट रहा है वो पल मेरा , जहां खुशियों का सवेरा निकलता है।  जाने क्यों वक्त कम-सा लगता है।  कामयाबी मिलेगी यह तो यकीन है।  फिर भी कुछ अधूरा-सा लगता है । कहने को तो जिंदगी बहुत बड़ी है । करने को एक मुकाम बाकी है।  हौसलों में तो जान है,  बस एक उड़ान बाकी है।  हर पल बीत रहा है कुछ ऐसे।  मानो मुट्ठी में रेत भरी है जैसे  जाने क्यों वक्त कम-सा लगता है सब कुछ तो है जिंदगी में।  फिर भी कुछ कम-सा लगता है।  मस्ती की, मौज किया,  खूब खाया, खूब पिया , हर पल जिंदगी को,  एक नया मोड़ दिया। बहुत से राही ही मिले थे सफर में, सपनों का सागर था मन में, डर था टूट ना जाए , मेरा खुदा रूठ ना जाए। मैंने जो भी चाहा मिला था रब से, सब कुछ तो है जिंदगी में, फिर भी कुछ कम-सा लगता है। जाने यह कैसी चाहत है ? जाने यह कैसी नजाकत है? दुखों का साया कुछ यूं घबराया,  खुशी का पल जब ऐसे आया । हर लम्हों को जिया मैं ऐसे , फूलों से बाग भरा था ज...

वारेन हेस्टिंग्स - प्रथम गवर्नर जनरल (Upsc answer writing)

वारेन हेस्टिंग्स - प्रथम गवर्नर जनरल  2016 प्रश्न पत्र -2  (इतिहास) प्रश्न 2 (a) यह कहना कहां तक सही होगा कि भारत में क्लाइव यद्यपि अंग्रेजी साम्राज्य के संस्थापक थे । तो वारेन हेस्टिंग्स इसके प्रशासनिक आयोजक थे? समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भारत में  रॉबर्ट क्लाइव मद्रास के बंदरगाह पर क्लर्क बन कर आया था। प्लासी के युद्ध 1757 में रॉबर्ट क्लाइव ने अहम भूमिका निभाई । अपनी सूझबूझ और कूटनीति रणनीति से प्लासी की जंग जीत ली। इस तरह रॉबर्ट क्लाइव को कंपनी ने बंगाल का गवर्नर नियुक्त कर दिया। पहली बार भारत के प्रांत में ब्रिटिश राज स्थापित हो गया था। इसी कारण रॉबर्ट क्लाइव को अंग्रेजी साम्राज्य का संस्थापक माना जाता है । रॉबर्ट क्लाइव बड़ा बुद्धिमान, राजनीतिक मामलों में चतुर और कूटनीतिक व्यक्ति था । वह कठिन परिस्थितियों को जल्दी समझ लेता था। वह एक बड़ा दूरदर्शी राजनीतिज्ञ भी था । बंगाल का गवर्नर बनने के बाद बंगाल पर खुद शासन ना करके एक कठपुतली राजा मीर जाफर को गद्दी पर बिठाया। 1760 के बाद इंग्लैंड वापस चला गया । लेकिन 1765 में पुनः क्लाइव को बंगाल का गवर्नर बनाकर भेजा । बंगाल का स...

मां का संदेश : काव्य संग्रह by sunil

          मां का संदेश सफर -ए- Upsc मां सब जानती है, अपने बच्चे को भलीभांति पहचानती है ।आपको लगता होगा - कि आप मां के बिना नहीं रह सकते हैं,‌ लेकिन सच तो यह है मां अपने बच्चों के बिना नहीं रह सकती है । लेकिन मां को भी मालूम है - ममता के आंचल में बच्चे को बड़ा करना मूर्खता है। क्योंकि दुनिया में जुल्मों से भरी पड़ी है। कदम-कदम पर बहरूपिये खड़े हैं , जो ठगने को तैयार खड़े हैं।  धोखा है , झूठ है, फरेब है, भ्रष्टाचार है।  मां बचपन में ही बहुत कुछ सिखा देती है। लेकिन सारा दिन घर पर रहकर बाहरी दुनिया की बदलती तस्वीर नहीं दिखा पाती है । इसलिए दिल पर पत्थर रखकर अपने बच्चे को शिक्षा प्राप्ति के लिए खुद से दूर करती है। ताकि वह दुनिया की व्यवस्था को समझ सके। असहाय और बेसहारों की मदद करें । ऐसे ही एक मां अपने बच्चे को पढ़ने के लिए घर से दूर भेजती है। 10 वर्ष से ही वह बच्चा दुनिया को समझने लगता है। आसपास का माहौल देखता है । और तरह-तरह के बच्चों से,  शिक्षकों से, व्यवसायियों से , खिलाड़ियों से , दोस्तों से मिलता है । वह देखता है , हर किसी में कुछ ना कुछ खूबी थी...

Upsc answer writing in hindi by sunil

 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्रश्न संख्या - 11 (dhirsti Ias answer writing ) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 धारणीय विकास लक्ष्य -4 (2030) के साथ अनुरूपता में है । इसका ध्यान भारत में शिक्षा प्रणाली की पुनः संरचना और पुनः स्थापना है । इस कथन का नाम आलोचनात्मक निरीक्षण कीजिए। उत्तर:- संयुक्त राष्ट्रीय संघ ने 2015 से 2030 तक विश्व का परिदृश्य बदलने के उद्देश्य से धारणीय विकास के 17 लक्ष्य और 169 विशिष्ट लक्ष्यो को अपनाया है । धारणीय विकास का अर्थ है - विकास के नाम पर आने वाली योजनाओं और उसके परिणामों का लाभ सभी देशों को समान रूप से मिल सके। उन्हीं लक्ष्यों में शामिल है "अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा" जिसकी प्राप्ति के लिए भारत देश ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 नई शिक्षा नीति का उद्देश्य देश के सभी विद्यालयों और उच्च शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तनकारी कार्य सुधार लाना है। भारत में आजादी के बाद 3 नई शिक्षा नीति  बनाई जा चुकी हैं। प्रथम- शिक्षा नीति आजादी के बाद 1968 में आई थी । उसके बाद अनेकों बदलावों के साथ 1986 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेत...

तू देश की पुकार बन जा : काव्य संग्रह by sunil

 देश की पुकार  : काव्य संग्रह नमस्कार मित्रों 72 वें गणतंत्र दिवस पर देवभूमि उत्तराखंड की तरफ से सभी देशवासियों को हार्दिक बधाईयां। आज की  कविता देश के उन वीरों के लिए है । जो सरहद पर खड़े हैं जो हमारी देश की दीवार है । जो  वीर है,  जो शेर हैं । और उन वीरों की सभी मां को हमारा सलाम जिसने ऐसे वीरों को जन्म दिया है । जिसने देश की रक्षा के लिए इतना बड़ा त्याग किया है। और देश की उन माताओं को भी सलाम जो अपने बेटे को आर्मी में भेजने को तैयार है। अपने बेटे-बेटियों की तैयारी में उत्साह बढ़ाते हैं। कदम कदम पर साथ निभाती है सहयोग के लिए हमेशा तैयार रहती है। मां के त्याग और स्नेह से प्रेरित मेरी कविता देश के वीरों के लिए "तू देश की पुकार बन जा" तू देश की पुकार बन जा तू पर्वत तू पहाड़ बन जा । तू शेर की दहाड़ बन जा ।। ना पैर रखे कोई फिरंगी, सरजमी पर । तू सरहद की दीवार बन जा।। अम्बर बरसे, धरती तरसे ।। अडिग सा तू खड़ा रहा।। गर उठे कोई सर सीमा पर।। लहू से लथपथ तलवार बन जा। तू फरिश्ता, तू शहंशाह। सरहद का सरताज बन जा। मुकम्मल है कई जिंदगी तेरी वजह से, तू देश की पुकार बन जा।। क्यो...

पुरानी साइकिल : काव्य संग्रह by sunil

        पुरानी साइकिल             काव्य संग्रह                       पुरानी साइकिल  होकर पुरानी साइकिल पर सवार,  मैं मिलने चला पुराने यार , याद आए वो लम्हे,  याद आई वो गलियां , जिन पर कई लम्हे गुजार । आज भी मेरे बचपन से,  मुझे बड़ा है प्यार।  वो संतरे की गोलियां  एक रुपए में आती थी चार । स्कूल जाते , बहाना बनाते  घर वाले कभी ना मनाते । अपनी हरकतों से थे लाचार , जान कर भी गलती करते बार-बार वो कंचे की गोलियां , निशाने के थे सरताज,  वो बल्ले की फंटियों से  मारते थे सरहद पार । पैर नहीं थकते जब तक , हम खेलते बार-बार। थकान क्या होती है ? मुश्किलें क्या होती है ? मालूम नहीं,  धुन के पक्के थे गबार । सोचते इन बातों को,  बात करते रातों को , पता ही नहीं चला , कब बड़े हो गए यार।। नादानी मुझमें मैं एक नादानी है।  जानता है सब कुछ मन । फिर भी यह कैसी मनमानी है?  ऐसा नहीं है ,  समझ नहीं है ,  ऐसा भी नहीं है, समझदारी नहीं...

विश्व गुरु भारत : काव्य संग्रह by sunil

 विश्व गुरु : भारत 72वां गणतंत्र दिवस  26th Republic day 72वें गणतंत्र दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य पर मेरे द्वारा स्वरचित कविता "विश्व गुरु भारत"  लेकिन इससेेेे पहले कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां 1966 के बाद ऐसा पहली बार होगा है कि भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में किसी दूसरे देश का प्रमुख मुख्य अतिथि के रूप में नहीं होगा।  साथ ही पहले की अपेक्षा परेड में कम दस्त शामिल होंगी और 15 साल से कम के बच्चे की एंट्री नहीं होगी। खास बात यह है कि राफेल विमान गणतंत्र दिवस के उपलक्ष पर उड़ान भरेगा । और भारतीय वायु सेना की पहली महिला फाइट विमान उड़ाने वाली लेफ्टिनेंट भावना कांत परेड में शामिल होंगी।             प्रत्येक युवा केेे लिए मेरी कविता द्वारा एक संदेश - प्रत्येक भारतवासी को भारत को विश्व गुरुुुु बनाने की प्रतिज्ञा करनी चाहिए  इन्हीं शब्दों से प्रेरित मेरी कविता। विश्व गुरु : भारत मालूम है मुझे सफर  लंबा तय करना है।।  फिर चलना तो प्रारंभ करना है,  मुझे नहीं पता मंजिल क्या होगी।  लेकिन ...

उम्मीदें : काव्य संग्रह by sunil

       काव्य : संग्रह हेलो दोस्तों , कविताओं का सफर जारी है । कविताएं कब दिल पर उतर जाए जानें कब रूह में समा जाएं, जानें कब  संगीत बन जाए। यह तो लिखने वाला भी नहीं जानता बस वो दिल की सच्चाई , विचार , फीलिंग लिखते हैं और चंद शब्दों के सामने प्रस्तुत करते हैं। कोई गायक उन शब्दों को समझ लें तब एक संगीत निकलता है। पहला प्रयास मेरी डायरी से , अपनी कविता को गाने का रूप देने की पहली दफा कोशिश की है। वैसे तो यह एक गाना है। जिसे अगला भाग कह सकते हैं "हंसू जब मैं गाऊ तुझे " धुन तो वहीं से मिली है।  लेकिन रचना अलग है। शीर्षक है "मैं तेरा इंतजार करूं" मैं तेरा इंतजार करूं बात आधी  है अधूरी ,  कैसे तुझे मैं बताऊं।  बात-करते, बात-करते,   तुझ में ही खो जाऊं।। मिटा दे जो फासले है ये , बता दे कोई बात है अगर  दिला दे जो राहत मुझे,  मैं तेरा दीदार करूं,  मैं तेरा इंतजार करूं । रात आधी है अधूरी ,  चलने को है लंबी दूरी। बिन तेरे कदम कैसे बढ़ाऊ?  तुझे-देखते, तुझे देखते  सफर यूं ही कट जाए।  दे दे कोई साथ मेरा, ...

Tipu sultan : upsc mains answer writing

 टीपू सुल्तान : शेर-ए-मैसूर 2019 प्रश्न पत्र -2 प्रश्न संख्या -1 (a) टीपू सुल्तान मैसूर में महत्वाकांक्षी विभागीय इरादे वाला एक शक्तिशाली केंद्रीकृत एवं सैन्यकृत राज्य के निर्माण का प्रयास प्राप्त कर रहा था । समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। टीपू सुल्तान जटिल चरित्र और नए विचारों वाला व्यक्ति था । समय के साथ बदलने की इच्छा रखता था । उसने एक शक्तिशाली केंद्रीकृत एवं संयुक्त राज्य के निर्माण के लिए नए निम्न कार्य किए :- टीपू सुल्तान के राज्य काल में मैसूर आर्थिक रूप से फला फूला क्योंकि टीपू ने पारंपरिक खेती में बदलाव किए। नए कैलेंडर को लागू किया । सिक्के ढलाई की नई प्रणाली  और माप तोल की नई प्रणाली को अपनाया। टीपू सुल्तान ने मैसूर में नई शैली की बंदूकों और तोपों का निर्माण किया । 1000 गज मारक क्षमता वाली मिसाइल का निर्माण 18वीं सदी में ही कर लिया था । एक राजनीतिक रूप से 18 वीं सदी के किसी भी शासक की तुलना में वह दक्षिण भारत के लिए या दूसरे भारतीय शासकों के लिए अंग्रेजी राज्य के खतरे को अधिक ठीक तरह से समझता था । टीपू सुल्तान बारे में एक ब्रिटिश पर्यवेक्षक ने लिखा था कि "यह  खेती...

बक्सर का युद्ध -1764

 बक्सर का युद्ध -1764 बक्सर के युद्ध की पृष्ठभूमि 1757 की प्लासी की जंग के बाद बंगाल का नवाब मीर जाफर को बनाया गया । जो कि वह अंग्रेजों का एक कठपुतली था। कंपनी के अधिकारियों द्वारा उपहार और रिश्वत संबंधी मांगों ने जल्दी बंगाल का खजाना खाली कर दिया। कंपनी भारत के साथ व्यापार के स्थान पर नवाब पर नियंत्रण करके बंगाल को लूट रही थी। खजाना खाली हो जाने के कारण मीर जाफर ने जनता पर अधिक कर लगा दिए। इससे जनता परेशान हो गई। अंग्रेजों को डर था कि जनता विद्रोह ना कर दे । तो उन्होंने मीर जाफर को मजबूर किया कि वह अपने दामाद मीर कासिम को गद्दी दे दें। इस तरह 1760 में मीर कासिम बंगाल का नवाब बना। मीर  कासिम योग्य एवं कुशल शासक था। मीर कासिम के नवाब बनने पर अंग्रेजों ने कुछ मांगे रखी:- बर्दवान, मिदनापुर और चटगांव जिले की जमींदारी मांगी की।  बंगाल में प्रसिद्ध चूना व्यापार में 50% की दावेदारी मांग की।  मीर कासिम नवाब बनने की खुशी में कंपनी को सब कुछ दे दिया, साथ ही बड़े अंग्रेज अधिकारियों को अच्छे-अच्छे उपहार दिए । जिनकी कुल कीमत ₹29 लाख थी। लेकिन बदले में मीर कासिम ने अंग्रेजों से द...

कर्नाटक युद्ध (आधुनिक इतिहास)

 कर्नाटक  युद्ध (1748-1754)  वर्ष - 2018  प्रश्नपत्र - 2 प्रश्न संख्या 2(c) (इतिहास) क्या आप इस बात से सहमत हैं कि कर्नाटक में आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष ने दक्षिण भारत के प्रांतीय छत्रपों की आंतरिक अवनति को प्रदर्शित किया ? समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए । Do you subscribe to the view  that the Anglo French tussle is Carnatic demonstrated the internal decay of the provincivle chieftains of South India. यह कहा जा सकता है कि कर्नाटक में आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष ने दक्षिण भारत के प्रांतीय क्षत्रपों की  आंतरिक अवनति को  प्रदर्शित किया । क्योंकि भारतीय शासकों में राष्ट्रवादी भावना का अभाव था। लाभ कि संकुचित भावना से प्रेरित थे। सत्ता की लालच के लिए विदेशियों की सहायता मांगने में उन्हें कोई हिचक नहीं होती थी। इसी का फायदा अंग्रेजों और फ्रांसीसीयों ने कर्नाटक और हैदराबाद के प्रांतीय शासकों से उठाया । वह भी तब जब अंग्रेजों और फ्रांसीसीयों  का युद्ध चल रहा था। कर्नाटक की पृष्ठभूमि कर्नाटक कोरोमंडल तट से जुड़ा ऐसा क्षेत्र था जिस पर हैदराबाद के निजाम उल मुल्क आसफजाह ...

प्लासी का युद्ध - 1757

 प्लासी का युद्ध - 1757 2018 प्रश्नपत्र-2  (इतिहास) प्रश्न 1 (a):- "प्लासी का युद्ध (1757) ने इस तरह से भारत में इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी की राजनीतिक सर्वोच्चता की शुरुआत को चिन्हित किया था" समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भारत में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता का आरंभ 1757 की प्लासी के युद्ध से माना जा सकता है। क्योंकि प्लासी की जंग के बाद ही ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल तथा पूरे भारत पर अधिकार करने का रास्ता मिला था । व्यापार करने की स्वतंत्रता मिली थी।  लेकिन 1757 से पहले भारत में ऐसी कुछ ऐसी घटनाएं घटी । जिससे ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना का साहस सिराजुद्दौला से युद्ध करने का हुआ। अतः प्लासी के युद्ध से पहले और बाद की चर्चा के बाद ही निष्कर्ष  निकलाना उचित रहेगा। कि प्लासी के युद्ध (1757) ने इस तरह से भारत में इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी की राजनीतिक सर्वोच्चता की शुरुआत को चिन्हित किया था। 1757 से पहले की स्थिति ईस्ट इंडिया कंपनी ने आरंभ से ही व्यापार और कूटनीति के साथ-साथ युद्धों का सहारा लेकर फैक्ट्रियां स्थापित की । और उन क्षेत्रों पर कब्जा भी किया । अंग्रेजों ने दक्षिण में अप...

मेहरबानी : काव्य संग्रह by sunil

मेहरबानी : काव्य संग्रह प्रिय मित्रोंमुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि कड़ी मेहनत के बाद मेरी वेबसाइट  देवभूमिउत्तराखंड.com  में earning शुरू हो गई है। तो इस उपलक्ष्य में एक स्पेशल थैंक्स तो आप सबके लिए बनता है। आप सभी का  दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद। आपने मेरे द्वारा लिखी गई कविताएं ध्यानपूर्वक पढा और लोगों तक भी पहुंचाया। उम्मीद है यदि आप सभी का सहयोग रहा तो -3 महीनों में यूट्यूब चैनल से भी earning शुरू हो सकती हैै। तो  जिसने भी मेरा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब नहीं किया है तो सब्सक्राइब कर लें। आप सभी के सहयोग के उपलक्ष्य में इन्हीं शब्दों से प्रेरित आप सभी दोस्तों के धन्यवाद  लिए मैंने एक कविता लिखी है। जरा गौर फरमाना........। मेहरबानी  दोस्तों, आप सभी की मेहरबानी है, आप लोगों से जुड़ी जिंदगानी है, आपके प्यार और सहयोग से , मेरे अरमानों में तूफानी है , थोड़े से शब्द है, थोड़ी-सी जुबानी है  थोड़ी हकीकत है , छोटी-सी कहानी है चुरा सकूं मैं ! वो लम्हे दुनिया से, जो बच्चों को सुनानी है , दिन भी गजब के है,  रातें भी सुहानी है। कोई इंतजार करें ना...

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

 संयुक्त राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद Evergreen topic - 2015 प्रश्नपत्र-2 प्रश्न संख्या -18 दोस्तों जब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता मिल नहीं जाती है। तब तक यह प्रश्न किसी ना किसी रूप में आता रहेगा। इसलिए प्रयास करते रहिए और मेरे द्वारा दिए गए उत्तर का मूल्यांकन कीजिए। प्रश्न संख्या 18 - संयुक्त राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट की खोज में भारत के समक्ष आने वाली बाधाओं पर चर्चा कीजिए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्य बनने के लिए मूल ढांचे को समझना होगा । उसके बाद ही आने वाली बाधाओं को समझ सकते हैं । द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सभी राष्ट्रों ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए 1945 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थापना 51 सदस्य देशों के साथ की । जिसमें पांच स्थाई सदस्य  अमेरिका, रूस , ब्रिटेन , फ्रांस और चीन को बनाया गया । वहीं 10 अस्थाई सदस्यों का प्रावधान किया गया जो प्रत्येक 2 वर्षों में परिवर्तित होते रहेंगे। स्थाई सदस्य बनने की चुनाव प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्य बनने के लिए दो तिहाई सदस्य देशों ...

हमसफर : काव्य संग्रह by Sunil

         काव्य संग्रह        ‌‌ ‌‌         हमसफर  मेरे विचार से तो जो आपके साथ चल सके। आपके कामों में मदद कर सके।  आपके हर काम में सपोर्ट कर सके । साधारण शब्दों में कहें तो जो जीवन को सरल बना सकें। प्यार तो बहुत सारे करते हैं। प्यार के लिए मर मिटते  हैं। लेकिन क्या लगता है? जो दिन रात मोबाइल में आपसे बात करते हैं । जो बाप के पैसों से सपने सजाते हैं। वह आपको पूरी दुनिया की खुशी देंगे। फिर यह 10 th , 12 th  का प्यार । बेवजह , बेहिसाब , 4 दिन की चांदनी, पल दो पल का साथ, तनिक धीरज रखिए थोड़ा सपने सजाइए। बिना सपनों के हकीकत में जाओगे तो शायद वह मजा ना आए। थोड़ी बेचैनी बढ़ाइए , थोड़ा दिमाग - थोड़ा दिल की सुनिए। और ग्रेजुएशन के बाद ही दिल लगाई है। वरना अपनी बर्बादी का जश्न बनाइए । फिर सबको दिल टूटने का दुखड़ा सुनाइए। और कहिएगा  कभी आपने प्यार किया होता तो पता चलता ?     इन्हीं शब्दों से प्रेरित मेरी कविता......... मेरी डायरी से, हमसफ़र कठिन सफर, सरल रास्ते, सबको चाहिए।  तलाश तो उस...

जनसंख्या और निर्धनता में संबंध-

 जनसंख्या और निर्धनता में संबंध- क्या लगता है? कि बढ़ती हुई जनसंख्या निर्धनता का मुख्य कारण है या निर्धनता जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण है? प्रश्न बहुत मुश्किल नहीं है । बस समझने की जरूरत है। जी हां  ऐसे ही प्रश्न UPSC और PCS की परीक्षा में पूछे जाते हैं। मेरे विचार से निर्धनता और जनसंख्या एक दूसरे के पूरक हैं। अर्थात जनसंख्या बढ़ेगी तो निर्धनता भी बढ़ेगी। और निर्धनता बढ़ेगी तो जनसंख्या भी बढ़ेगी और इसके विपरीत भी।  अतः प्रश्न का उत्तर हम दो कथनों में विभाजित करके अध्ययन करेंगे पहले कथन के अनुसार बढ़ती हुई जनसंख्या निर्धनता का मुख्य कारण है, अर्थात हम कह सकते हैं कि जनसंख्या बढ़ती है तो निर्धनता भी बढ़ेगी, और जनसंख्या घटती है तो निर्धनता भी घटेगी। कृषि भूमि में कमी - आजादी के बाद भारत की कुल जनसंख्या 36 करोड़ थी। और वर्तमान समय में भारत की जनसंख्या 131 करोड़ हो गई है। केवल 70 वर्षों में जनसंख्या 3 गुनी वृद्धि हुई है 1951 से 2001 के बीच प्रति व्यक्ति कृषि क्षेत्र 0.77 से घटकर 0.20 रह गया है। आने वाले कुछ वर्षों में कृषि भूमि काफी कम रह जाएगी। हालांकि खाद्य सुरक्षा में भ...

Human development index in hindi

 मानव विकास सूचकांक क्या है? मानव विकास सूचकांक प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण टॉपिक है। यह एक ऐसा टॉपिक है जिससे प्रतिवर्ष कोई ना कोई प्रश्न आता ही है । अर्थात evergreen टॉपिक है। अतः इसे जितनी जल्दी समझ ले उतना बेहतर है। मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट 2020 के अनुसार भारत को 189 देशों में से 131 रैंक प्राप्त हुई है । जबकि पिछले वर्ष भारत को 129 वी रैंक प्राप्त हुई थी। मानव विकास सूचकांक की रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम(UNDP) द्वारा जारी की जाती है। इस रिपोर्ट के अनुसार नॉर्वे को पहले स्थान पर रखा गया है। आयरलैंड को दूसरे । वहीं नाइजर अंतिम रैंक प्राप्त हुई है। मानव विकास सूचकांक क्या है HDI मानव के विकास को मापने की एक प्रक्रिया है। जिसका मुख्य आधार जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और आय का स्तर है। सबसे पहले 1990 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा मानव विकास सूचकांक की रिपोर्ट जारी की गई थी । मानव विकास सूचकांक को विकसित करने का श्रेय पाकिस्तान के महबूब उल हक को जाता है। जिन्होंने विकास के स्तर को मापने और परिभाषित करने का पहला प्रयास किया। एचड...

APMC क्या है ? इसके उद्देश्य एवं लाभ-हानि

 कृषि उत्पाद बाजार समिति APMC क्या है ?  यह जाने वगैर किसान APMC का बचाव कर रहे हैं, सरकार के द्वारा लाए गए बिलों का विरोध कर रहे हैं? तो  सवाल खडा होता है कि क्या वास्तव में APMC‌ ( कृषि उत्पाद बाजार समिति ) से सभी किसानों को मदद मिलती भी है ? क्या APMC के अंतर्गत सभी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता है ? तो आइये APMC के सम्पूर्ण इतिहास के साथ ही जानें APMC किसान के विकास के लिए कितनी सहायक है । APMC क्या है? ए पी एम सी का पूरा नाम कृषि उत्पाद बाजार समिति है। जिसे अंग्रेजी में Agriculture Producing Market company कहते हैं । APMC को ही स्थानीय भाषा में "मंडी " कहा जाता है।  इसमें लगभग 2477 प्रमुख कृषि बाजार है। और 4843 उप-बाजार आते हैं। जो APMC के तहत भारत में संचालित होते हैं। एपीएमसी एक्ट में यह प्रावधान किया गया है। कि देश में उत्पादित होने वाली वस्तुएं जैसे - अनाज दालें खाद्य, तेल ,फल और सब्जियां यहां तक कि चिकन , बकरी, भेड़,  मछली आदि । वस्तुओं  की पहली बिक्री एपीएमसी के तहत लाइसेंस धारी दलालों के जरिए होगी । मतलब यदि देश में कोई भी फसल उगाई जा रह...