पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
काव्य रचना
पार्ट - 1
कभी तेरे कभी मेरे,
शब्दों के लम्हे पिरोने हैं,
बनी ऐसी काव्य रचना,
जो सभी के जीने में है,
पत्थर दिल हो गए हैं जिनके
उनके भी हृदय में ,
प्रेम के बीज बोने हैं।
रूठ गए हैं जो अपनों से,
टूट चुके हैं जो सपनों से ।
आशा की एक किरण,
जीवन में उनके सिरोने हैं।
बने ऐसी काव्य रचना ,
जो सभी के जीने में है ।
एक पंक्ति तेरी हो ,
एक पंक्ति मेरी हो,
भावनाओं का समंदर हो ,
उमंगों की बारिश हो ,
पढ़े जो हमारी काव्य रचना,
दिल उसका भी आभारी हो।।
इश्क की गलियां
पार्ट - 2
आसान नहीं है "इश्क की गलियां"!
यहां सजदा करना पड़ता है,
वक्त - वक्त की बात है - यारा
वक्त के आगे झुकना पड़ता है।
पहचानना उनको आसान नहीं ,
जिनके दिलों के राज बहुत हैं,
मिले रहा में, राही - अकेला
साथ चलने की कोशिश करना।
शायद सफर हम सफर बन जाए ।
मोहब्बत का कब कोई सिकंदर बन जाए।
आसान नहीं है इश्क की गलियां
यहां धैर्य रखना पड़ता है ।
जीवन कोई गुड़िया - गुड्डे का खेल नहीं ,
यहां सारा गम सहना पड़ता है।
बहुत खूब होते हैं वह लोग।
जिनका खुद पर बस चलता है,
आसान नहीं है इश्क की गलियां ।
यहां सजदा करना पड़ता है।
काव्य संग्रह
सांसे भी आवाज देती?
सांसे भी आवाज देती,
तो कितना अच्छा होता ।
किसका दिल क्या बोल रहा है ?
सबको पता चला होता ,
कोई दिल बेईमान ना होता?
किसी के साथ धोखा ना होता,
कसूर सब सांसो का है ?
सांसे भी आवाज देती ,
तो कितना अच्छा होता !
कमबख्त बिना बोलकर रुक जाती हैं।
अच्छी खासी हंसती खेलती ,जिंदगी
बेरंग कर जाती है।
अक्सर दिल देर कर जाते हैं
मोहब्बत का पैगाम पहुंचाने में।
सांसे तो पल-पल चलती है
तो कितना अच्छा होता ?
सांसे भी आवाज देती ।
रहस्यमयी जीवन
बेवक्त सा हो गया हूं मैं।
ना सुबह का पता ना शाम का,
एक अंदेशा है मन में ?
क्या रहस्य छुपा है जीवन में?
जितना समझाता हूं उतना ही
उलझता जाता हूं !
हर बार कुछ छूट-सा जाता है ।
कोई ना कोई अपना रूठ से जाता है।
बेवस हूं मैं अपनों के आगे ,
बेवास हूं मैं सपनों के आगे ,
रातों को भी मैं पैगाम लिखता हूं।
इस जन्म में मोहब्बत मुमकिन नहीं यारा
क्योंकि मैं यह जिंदगी,
यूपीएससी के नाम लिखता हूं।
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