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पर्वतों के निर्माण (Geography Notes - part 06)

पर्वतों के निर्माण  प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...

परिमेय संख्या । Basic math part -2

परिमेय संख्या क्या है ?

Rational Number


नमस्कार मित्रों बेसिक मैथ्स का पहला टॉपिक हो चुका है। जिसमें प्राकृत , पूर्ण और पूर्णांक के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है। अब जिसने भी वह आर्टिकल नहीं देखा है तो वह उसे अच्छी तरह से पढ़ लें। आज का टॉपिक है - परिमेय संख्या क्या है ?  अपरिमेय संख्या क्या है ? वास्तविक संख्या क्या है ? जानेंगे।

परिमेय संख्या क्या है?

गणित की कक्षा 9th की किताब में पहला अध्याय परिमेय संख्या ही है । इसमें परिमेय संख्या की परिभाषा दी गई है । जिन संख्याओं को p/q   के रूप में लिख सकते हैं जहां q बराबर 0 नहीं है। तथा और q पूर्णांक हो तो वह परिमेय संख्या कहलाती हैं। जैसे - 1, 0, 1/2, 2/3, 3/4 ........... आदि।

 यदि आपको पूर्णांक का अर्थ समझ आता है तो आसानी से समझ सकते हैं। कि परिमेय संख्या क्या है? परिभाषा को और सरल बनाया जाए तो हम कह सकते हैं कि जिन संख्याओं को भिन्न के रूप में लिख सकते हैं। अर्थात अंश और हर । जहां हर का मान 0 नहीं होना चाहिए।

अब आपके मन में सीधा सा सवाल उठना चाहिए तो कौन सी संख्याएं हैं जिन्हें p/q के रूप  में नहीं लिख सकते हैं? तो सामान्यतः  महसूस करोगे । सभी संख्याएं प्राकृत, पूर्णांक, सम ,विषम, अभाज्य और भाज्य सभी को p/q के रूप में लिख सकते हैं । तो कौन सी संख्या बची रहती है तो वे संख्याएं हैं - √2, √3, √5 .........। 

अपरिमेय संख्या (Irrational Number)

प्रत्येक परिमेय संख्या p/q के रूप में होती है । अर्थात 1/2, 1/3, 2/5...... आदि । इन संख्याओं को का मान निकाला जाए तो बहुत-सी परिमेय संख्या का मान दशमलव के रूप में आएगा । 

कोई भी संख्या एक निश्चित बिंदु के बाद रुक जाएगी जैसे - 1/2=0.5, 1/4=0.25, 1/4=0.5 तो इसमें संख्या शांत  हो जाती है । वहीं दूसरी परिमेय संख्या 1/3=0.333....., 1/6 =0.166......आदि  इन संख्याओं को देखते हैं कि इनका दशमलव प्रसार बढ़ता रहता है। इसलिए इन्हें अशांत कहते हैं।

दशमलव प्रसार के आधार पर संख्याओं को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है:-
(1) शांत संख्या 
(2) अशांत संख्या

शांत संख्या

जिनका दशमलव प्रसार एक बिंदु के बाद रुक जाता है । जैसे- 1/2=0.5, 2/5=0.4 

अशांत संख्या

अशांत संख्या को पुनः दो वर्गों में विभाजित किया गया है :-
(1) अनावसानी आवर्ती(non-terminating recurring)
 (2) अनावसानी अनावृत्ति(non-terminating, non- recurring)

अनावसानी आवर्ती :- यह ऐसी संख्याएं हैं जिनका दशमलव प्रसार पुनः व्यक्ति करता है अर्थात बार-बार एक ही संख्याएं आने लगती हैं। जैसे -1/3=0.333......., 1/6=0.1666666.......। इन्हें परिमेय संख्या में ही सम्मिलित किया जाता है।

अनावसानी अनावृत्ति (अपरिमेय संख्या):- ऐसी संख्याएं होती जिन का दशमलव प्रसार बदलता रहता है बिना तरीके के परिवर्तन होता रहता है जैसे- √2=1.4121356.........। √3=1.7320508..........। π........यह ऐसी संख्या होती हैं जिनका मान कभी रुकता नहीं है ना ही  पुनवृत्ति  करता है। ऐसी ही संख्या को अपरिमेय संख्या कहा जाता है।

वास्तविक संख्या(Real Numbers)

परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का संग्रह ही वास्तविक संख्या कहलाता है जिनको आप भली-भांति जान चुके हैं या फिर हम कह सकते हैं सभी परिमेय और अपरिमेय संख्या वास्तविक संख्या होती हैं। जैसे- √2, √3, √5, π,  1, 0, 1/2, 2/3, 3/4...........।

अवास्तविक संख्या 

जिस संख्याओं का मान नहीं होता उसे काल्पनिक संख्या कहते हैं अर्थात आवास्तविक संख्या कहते हैं जैसे- √-7, √-36, √-81.......।

परिमेय संख्याओं की उपयुक्त शब्दावली को समझना अति आवश्यक है । क्योंकि बेसिक का यह दूसरा पाठ है और यहां से ऐसे प्रश्न बनते हैं । जो आसानी से समझ में नहीं आते हैं क्योंकि हमने परिभाषाएं ठीक से नहीं पढ़ी होती है। इसलिए यह मैथ हमें कठिन लगने लगती है। अतः जरूरी है की परिमेय संख्याओं का अच्छी तरह से ज्ञान हो इस प्रश्नावली से बनने वाले प्रश्न कुछ इस प्रकार से हैं:-

(1) यदि a तथा b दो वास्तविक संख्याएं ऐसी हो कि ab=0  हो तो  -                                  (रेलवे परीक्षा 2006)

(a) a=0 तथा b=0

(b)  a=0 अथवा b=0 (दोनों में से एक)

(c)  a=0 तथा b, 0 के बराबर नहीं है 

(d)  b=0 तथा  a, 0 के बराबर नहीं है .

(2) निम्न में से कौन सी अपरिमेय संख्या है?

(a) 4

(b) √4

(c) √2

(d) 1/2


इस तरह के प्रश्न अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं ।अब जिन्हें वास्तविक संख्या और परिमेय संख्या तथा आपने में संख्या का ज्ञान होगा वही परीक्षार्थी उनका जवाब दे पाएगा और यह अत्यधिक सिंपल होते हैं । जिसे इसको अधिक हो सकता है इसलिए इसको हल्के में ना लें बेहद जरूरी है बेसिक शब्दों की जानकारी आते दी गई जानकारी आपको महत्वपूर्ण लगती है तो पोस्ट को शेयर कीजिए।

 धन्यवाद।

Basic math class part -1

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