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भारती चंद की अमर गाथा (35वां चंद शासक)

भारती चंद की अमर गाथा   आज हम इस लेख में चंद राजाओं के बारे में विस्तार से पढ़ने वाले हैं। हालांकि चंद राजवंश केवल उत्तराखंड तक ही सीमित था और बहुत बड़ा साम्राज्य नहीं था लेकिन चंद राजवंश का सम्पूर्ण इतिहास रोचकमय है और यह हमें सिखाता है जिंदगी में उतार चढ़ाव आते हैं लेकिन उस उतार चढ़ाव में संतुलन किस प्रकार स्थापित करना होता है। इतने उतार चढ़ाव के बाद भी चंद राजवंश 700 वर्ष शासन किया।  तीन राजाओं की तिकड़ी भारती चंद - रत्न चंद - कीर्ति चंद चंद वंश की स्थापना के 400 साल बीत चुके थे लेकिन चंद शासक फिर भी पूर्ण रूप से आजाद नहीं थे वो अभी डोटी (नेपाल) के राजा को कर दे रहे थे, हालांकि इससे पूर्व 26वें चंद शासक ने थोहर चंद स्वयं को स्वतंत्र राजा घोषित कर दिया और 31वें चंद शासक गरुड़ ज्ञान चंद ने सोर और सीरा क्षेत्रों को जीत लिया था फिर भी चंद वंश अधीन था डोटी राजाओं के, कितने राजा आए और गये लेकिन किसी ने डोटी पर आक्रमण करने का दुस्साहस नहीं किया। ऐसे में जन्म होता है एक वीर का जिसका नाम भारती चंद होता है और वह चंद वंश का 35वां शासक बनता है और वो डोटी पर आक्रमण करने वाला पहला र...

उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था

उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था  उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था को भारत के संवैधानिक ढांचे के तहत संचालित किया जाता है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का विभाजन स्पष्ट रूप से परिभाषित है, उत्तराखंड जो 9 नवंबर 2000 को भारत का 27वां राज्य बना एक संसदीय लोकतंत्र के रूप में कार्य करता है । इसकी प्रशासनिक व्यवस्था को निम्नलिखित स्तरों पर समझा जा सकता है।  प्रशासनिक ढांचा  विभागीय संरचना : उत्तराखंड सरकार विभिन्न विभागों के माध्यम से प्रशासन संचालित करती है जैसे - गृह, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, पर्यटन, लोक निर्माण और कृषि । प्रत्येक विभाग का एक नेतृत्व एक मंत्री करता है जबकि प्रशासनिक कार्यों का प्रबंध भारतीय प्रशासनिक सेवा और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी करते हैं।  सचिवालय : देहरादून में स्थित सचिवालय राज्य सरकार का प्रशासनिक केंद्र है जहां सभी प्रमुख नीतिगत निर्णय लिए जाते हैं।  मुख्य सचिव : यह राज्य राज्य का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है जो सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करता है और सरकार को नीतिगत सलाह देता है।  उत्तराखंड राज्य प्रशासन...

SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स 2025 संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2025 को सतत विकास रिपोर्ट 24 जून 2025 को जारी की।  इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 167 देशों में 99वां स्थान हासिल किया है, जो पिछले वर्ष (2024) के 109वें स्थान (64.0 स्कोर) से उल्लेखनीय सुधार है। इस प्रकार भारत की रैंक में 10 पायदान का सुधार इस वर्ष हुआ है। भारत का इस रिपोर्ट के 10 साल के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत का समग्र स्कोर 2025 में 66.95 बताया गया है। वैश्विक स्तर पर केवल 16% SDG लक्ष्य 2030 तक पूरे होने की राह पर हैं, जबकि 84% में सीमित प्रगति दिख रही है। भारत का प्रदर्शन इस संदर्भ में सकारात्मक है, विशेष रूप से ब्रिक्स देशों में उल्लेखनीय प्रगति के साथ। 167 देश में फिनलैंड (87.02) शीर्ष स्थान पर है। दूसरे व तीसरे स्थान पर क्रमशः स्वीडन (85.74) और डेनमार्क (85.26) है जबकि सबसे निचले स्थान अर्थात् 167वें स्थान पर दक्षिणी सूडान (41.55) है। और 166वें स्थान पर केंद्रीय अफ्रीकी गणराज्य (45.21) है। सतत् विकास लक्ष्यों में भारत के पड़ोसी राज्यों की स्थिति...

18वीं वन‌ रिपोर्ट

वन रिपोर्ट 2023 केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) द्वारा 21 जनवरी, 2024 को भारत में वनों की स्थिति के सम्बन्ध में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की वर्ष 2023 की रिपोर्ट जारी की गई.  18वीं द्विवार्षिक वन रिपोर्ट फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा इस रिपोर्ट का प्रकाशन 2-2 वर्ष के अन्तराल पर वर्ष 1987 से किया जाता है तथा 2023 की यह रिपोर्ट इस श्रृंखला में 18वीं द्विवार्षिक रिपोर्ट है, ऐसी पिछली 17वीं रिपोर्ट (2021 की रिपोर्ट) जनवरी 2022 में जारी की गई थी. फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की 2023 की इस रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल वन क्षेत्र 7,15,343 वर्ग किमी है, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 21.76 प्रतिशत है.  देश में वृक्ष आच्छादित क्षेत्र 1,12,014 वर्ग किमी है जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 3.41 प्रतिशत है.  इस प्रकार कुल वन एवं वृक्ष आच्छादित (Forest and Tree Cover) क्षेत्र 8,27,357 वर्ग किमी जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 25-17 प्रतिशत है.  (कुल वन क्षेत्र 7,15,343 वर्ग किमी + वृक्ष आच्छादित क्षेत्र 1,12,014 वर्ग किमी = ...

उत्तराखंड लोकगीत और‌ लोकनृत्य (part -01)

उत्तराखंड के लोकगीत और लोक नृत्य पहाड़ की अपनी ही बोली और संस्कृति है यहाँ के लोक गीतों का विस्तृत स्वरूप मुक्तको के रूप में मिलता है। विभिन्न अवसरों तथा विविध प्रसंगी में मुक्तकों का व्यवहार होता है, पहाड़ी समाज में अपनी विशिष्ट संस्कृति पौराणिक काल से रही है. न्यौली इसे न्यौली, न्यौल्या या वनगीत के नामों से पुकारा जाता है, न्यौली का अर्थ किसी नवीन स्त्री को नवीन रुप में सम्बोधन करना और स्वर बदल बदलकर प्रेम परक अनुभूतियों को व्यक्त करना है। न्यौली प्रेम परक संगीत प्रधान गीत है जिसमें दो-दो पंक्ति होती है। पहली पंक्ति प्रायः तुक मिलाने के लिए होती है। न्यौली में जीवन चिन्तन की प्रधानता का भाव होता है। ब्योली ब्योली रैना, मेरो मन बस्यो परदेश, कब आलो मेरो सैंया, मेरो मन लियो हदेश। (अर्थ: रात बीत रही है, मेरा मन परदेश में बसा है। कब आएगा मेरा प्रिय, जिसने मेरा मन ले लिया।) "सबै फूल फुली यौछ मैथा फुलौ ज्ञान,  भैर जूँला भितर भूला माया भूलै जन,  न्यौली मया भूलै जन", बैरा (नृत्य गीत) बैरा का शाब्दिक अर्थ संघर्ष है जो गीत युद्ध के रूप में गायकों के बीच होता है। अर्थात् यह कुमाऊं क्षे...