पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था को भारत के संवैधानिक ढांचे के तहत संचालित किया जाता है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का विभाजन स्पष्ट रूप से परिभाषित है, उत्तराखंड जो 9 नवंबर 2000 को भारत का 27वां राज्य बना एक संसदीय लोकतंत्र के रूप में कार्य करता है । इसकी प्रशासनिक व्यवस्था को निम्नलिखित स्तरों पर समझा जा सकता है। प्रशासनिक ढांचा विभागीय संरचना : उत्तराखंड सरकार विभिन्न विभागों के माध्यम से प्रशासन संचालित करती है जैसे - गृह, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, पर्यटन, लोक निर्माण और कृषि । प्रत्येक विभाग का एक नेतृत्व एक मंत्री करता है जबकि प्रशासनिक कार्यों का प्रबंध भारतीय प्रशासनिक सेवा और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी करते हैं। सचिवालय : देहरादून में स्थित सचिवालय राज्य सरकार का प्रशासनिक केंद्र है जहां सभी प्रमुख नीतिगत निर्णय लिए जाते हैं। मुख्य सचिव : यह राज्य राज्य का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है जो सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करता है और सरकार को नीतिगत सलाह देता है। उत्तराखंड राज्य प्रशासन...