उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन और संघर्ष उत्तराखंड राज्य का निर्माण कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि यह दशकों लंबे संघर्ष, बलिदान और जन-आंदोलन का परिणाम था । हालांकि अलग राज्य की मांग 1897 से ही समय-समय पर उठती रही थी, लेकिन 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद इस संघर्ष ने एक नया मोड़ लिया । जब आप उत्तराखंड का आंदोलन ध्यानपूर्वक पढ़ रहे होंगे तो आपको आभास होगा जिस प्रकार भारत ने अंग्रेजों से आजादी पाई ठीक उसी प्रकार उत्तराखंड राज्य को बनाने में संघर्ष हुए। यह बात तो सच है की उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर में बांध बनाने के अलावा कोई भी कार्य नहीं किए। न सड़कें बनवायी न ही पर्यटन में विकास किया और बिजली तो पहाड़ों में दूर दूर तक नहीं पहुंची । जबकि दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश काफी आगे बढ़ गया। तो जरूरत तो थी एक नये राज्य की इसलिए तो संघर्ष हुआ। आप जब उत्तराखंड निर्माण आंदोलन के बारे में पढ़ें तो स्वतंत्र भारत आंदोलन से तुलना करें। जैसे भारत आजाद करने की प्रथम लड़ाई 1857 का स्वतंत्रता संग्राम वैसे ही उत्तराखंड की प्रथम लड़ाई 1947 से तुलना करें। ये बात अलग है कि भारत का वह संग्राम असफल हुआ औ...
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स 2025
संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24
संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2025 को सतत विकास रिपोर्ट 24 जून 2025 को जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 167 देशों में 99वां स्थान हासिल किया है, जो पिछले वर्ष (2024) के 109वें स्थान (64.0 स्कोर) से उल्लेखनीय सुधार है। इस प्रकार भारत की रैंक में 10 पायदान का सुधार इस वर्ष हुआ है।
- भारत का इस रिपोर्ट के 10 साल के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत का समग्र स्कोर 2025 में 66.95 बताया गया है।
- वैश्विक स्तर पर केवल 16% SDG लक्ष्य 2030 तक पूरे होने की राह पर हैं, जबकि 84% में सीमित प्रगति दिख रही है। भारत का प्रदर्शन इस संदर्भ में सकारात्मक है, विशेष रूप से ब्रिक्स देशों में उल्लेखनीय प्रगति के साथ।
167 देश में फिनलैंड (87.02) शीर्ष स्थान पर है। दूसरे व तीसरे स्थान पर क्रमशः स्वीडन (85.74) और डेनमार्क (85.26) है जबकि सबसे निचले स्थान अर्थात् 167वें स्थान पर दक्षिणी सूडान (41.55) है। और 166वें स्थान पर केंद्रीय अफ्रीकी गणराज्य (45.21) है।
सतत् विकास लक्ष्यों में भारत के पड़ोसी राज्यों की स्थिति
- चीन - 49वां स्थान
- भूटान - 74वां स्थान
- श्रीलंका - 93वां स्थान
- बांग्लादेश - 114वां स्थान
- म्यांमार - 116 वां स्थान
- पाकिस्तान - 140वां स्थान
- अफगानिस्तान - 160वां स्थान
नीति आयोग द्वारा जारी SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24
नीति आयोग द्वारा जारी SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 के अनुसार, भारत का समग्र SDG स्कोर 2020-21 में 66 से बढ़कर 2023-24 में 71 हो गया है। यह प्रगति मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में लक्षित सरकारी हस्तक्षेपों से प्रेरित है:
- गरीबी उन्मूलन (SDG 1): 2015-16 से 2019-22 के बीच बहुआयामी गरीबी में 24.85% से 14.96% की कमी आई, जिसके परिणामस्वरूप 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। भारत SDG लक्ष्य 1.2 (2030 तक गरीबी को आधा करना) को समय से पहले हासिल करने की राह पर है।
- आर्थिक विकास और समुचित कार्य (SDG 8): भारत ने आर्थिक विकास में प्रगति दिखाई, जिसमें वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 2024 में 8.2% रही।
- जलवायु कार्रवाई (SDG 13): भारत ने 2005 से 2016 के बीच अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 24% की कमी की और पेरिस समझौते के तहत 2030 तक 33-35% कमी के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
- भूमि पर जीवन (SDG 15) : स्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण में प्रगति हुई है।
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का प्रदर्शन :
- शीर्ष प्रदर्शनकर्ता : केरल और उत्तराखंड 79 अंकों के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष पर हैं, इसके बाद तमिलनाडु (78) और गोवा (77) हैं। केंद्रशासित प्रदेशों में चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, और पुडुचेरी शीर्ष प्रदर्शनकर्ता हैं।
- सबसे कम प्रदर्शन : बिहार (57), झारखंड (62), और नागालैंड (63) सूचकांक में सबसे निचले स्थान पर हैं
- सबसे तेज प्रगति : उत्तर प्रदेश ने 2018 से 2023-24 के बीच समग्र स्कोर में 25 अंकों की वृद्धि के साथ सबसे तेज प्रगति की।
सतत् विकास लक्ष्य क्या है ?
सतत् विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals - SDGs) संयुक्त राष्ट्र द्वारा 25 सितंबर 2015 में शुरू किए गए 17 वैश्विक लक्ष्य हैं, जो 1 जनवरी 2016 से सभी सदस्य देशों में लागू किए गए। इन 17 लक्ष्यों में 2030 तक गरीबी उन्मूलन, ग्रह की सुरक्षा, और सभी के लिए शांति व समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। ये लक्ष्य सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देते हैं और इन्हें 169 विशिष्ट लक्ष्यों (targets) के साथ लागू किया गया है। ये लक्ष्य आठ सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (MDGs) का स्थान लेते हैं जिन्हें 2015 तक प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया था।
सतत् विकास के 17 प्रमुख लक्ष्यों में शामिल हैं:
- निर्धनता निवारण
- शून्य भूख
- अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
- लैंगिक समानता
- स्वच्छ जल और स्वच्छता
- आर्थिक पहुंच के भीतर एवं स्वच्छता
- समुचित कार्य और आर्थिक विकास
- उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा
- असमानताओं में कमी
- सतत् शहर और समुदाय
- उत्तरदायी उपभोग एवं उत्पादन
- जलवायु कार्रवाही
- समुद्री जीवन
- स्थलीय जीवन
- शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएं
- लक्ष्यों के लिए साझेदारी
इन लक्ष्यों का उद्देश्य एक समग्र दृष्टिकोण के साथ सतत विकास को बढ़ावा देना है, जहां एक क्षेत्र में प्रगति दूसरे क्षेत्रों को प्रभावित करती है।
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