पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
ट्रैक ऑफ द ईयर -2024 हाल ही में उत्तराखण्ड के सिनला पास और सरुताल बुग्याल को “ट्रैक ऑफ द ईयर” घोषित किया गया। जिसका उत्तराखण्ड पर्यटन मंत्रालय द्वारा 25 सितम्बर में आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया जायेगा। उद्देश्य ट्रेक ऑफ द ईयर द्वारा, स्थानीय संस्कृतियों एवं पर्यावरणीय गतिविधियों के सम्बन्ध जागरूकता प्रदान की जा सकती है, इसी प्रकार पर्यटन को बढावा देकर राज्य की G.D.P. में अहम् योगदान दिया जा सकता है। महत्व ट्रैक ऑफ द ईयर उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग द्वारा संचालित पहल है जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के पर्यटन स्थलों को विकसित करना एवं वैश्विक स्तर पर इन स्थलों का प्रचार-प्रसार करना है। जिससे की मुख्य रूप से स्थानीय पर्यटन एवं रोजगार को बढ़ावा मिलता है। सिनला पास (पिथौरागढ़) पिथौरागढ़ जिले में उपस्थित स्थित सिन-ला दर्रा (पास) दारमा और व्यास घाटियों को जोड़ता है, जिसके अन्तर्गत बर्फ से ढके क्षेत्रों में पार्वती कुंड, कैलाश, ओम पर्वत और पंचाचूली बेस कैंप जैसे रमणीय स्थल सम्मिलित हैं। सरुताल बुग्याल (उत्तरकाशी) उत्तरकाशी जनपद के बड़कोट तहसील में स्थित सरुताल बुग्याल गोविन्द राष्ट्रीय उद...