पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
भारत का इतिहास संक्षिप्त परिचय भारत का सम्पूर्ण इतिहास -(प्राचीन इतिहास से लेकर आधुनिक इतिहास तक) जैसा कि आप सभी को पता है कि उत्तराखंड के आगामी सभी परीक्षाओं का पैटर्न एक समान हो गया है। जिसमें उत्तराखंड सामान्य ज्ञान से 40 प्रश्न , हिन्दी से 20 प्रश्न, रिजनिंग से 10 प्रश्न, और सामान्य विज्ञान से 30 प्रश्न (इतिहास, भूगोल, संविधान, अर्थशास्त्र) पूछे जाएंगे। इसलिए उत्तराखंड का अध्ययन सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि उत्तराखंड से 40 प्रश्न पूछे जाएंगे। अब वो उत्तराखंड पुलिस भर्ती हो या पटवारी एवं लेखपाल चाहे हो फोरेस्ट गार्ड और बंदीरक्षक। उत्तराखंड का अध्ययन बेहतर ढंग से करने के लिए आपको भारत का सम्पूर्ण इतिहास का ज्ञान होना अति आवश्यक है। यदि आपको भारत के इतिहास के बारे में कुछ भी पता नहीं होगा तो आप सभी उत्तराखंड का इतिहास रटने की कोशिश करेंगें। और जहां रटने की बात आ जाए । तो मात्र तीन महीने में ही रटा हुआ भूल जाते हैं। इसलिए देवभूमि उत...