सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

गजानन माधव मुक्तिबोध : Biography

हिन्दी भाषा के प्रमुख साहित्यकार  नमस्कार दोस्तों आज हम हिंदी साहित्य के सिलेबस के अनुसार बाहरी राज्यों में जन्म लेने वाले साहित्यकारों का अध्ययन करेंगे।‌ जो उत्तराखंड की परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं आज के लेख में गजानन माधव मुक्तिबोध के जीवन परिचय और उनकी प्रमुख सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे । इससे पूर्व हम सुमित्रानंदन पंत, राहुल सांकृत्यायन, महादेवी वर्मा, शैलेश मटियानी और मंगलेश डबराल के बारे में विस्तार से पढ़ चुके हैं। जिनके लिंक लेख के अंत में नीचे दिए गए हैं। तो आईए जानते हैं गजानन मुक्तिबोध के बारे में विस्तार से - गजानन माधव मुक्तिबोध  हिंदी साहित्य में 'अंधेरे के कवि' और फेंटेसी के बेजोड़ शिल्पी के रूप में विख्यात गजानन माधव मुक्तिबोध का नाम आधुनिक हिंदी काव्य के इतिहास में सबसे अलग और चमकीला है । वे प्रगतिशील चेतना और प्रयोगवाद के एक ऐसे अनूठे सेतु थे, जिन्होंने कविता को आत्म संघर्ष, आत्मा खोज और व्यवस्था के खिलाफ एक तीव्र बौद्धिक हथियार बनाया।  जीवन परिचय  गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवंबर, 1917 को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के 'श्...

उत्तराखंड करंट अफेयर्स : फरवरी 2026 (MCQs)

 उत्तराखंड करंट अफेयर्स : फरवरी 2026 (MCQs)

प्रश्न 1. उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर किस नई संस्था का गठन किया गया है?

(A) अल्पसंख्यक कल्याण परिषद

(B) राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण

(C) उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद

(D) देवभूमि अल्पसंख्यक बोर्ड


उत्तर: (B) राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण

व्याख्या: सरकार ने मदरसा बोर्ड को भंग कर 'राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' बनाया है। इसमें अध्यक्ष सहित 11 सदस्य होंगे और डॉ. सुरजीत सिंह गांधी को इसका पहला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

1. नई संस्था का नाम और स्वरूप

मदरसा बोर्ड को समाप्त करने के बाद, अब राज्य के मदरसों को 'उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद' (Uttarakhand Board of School Education - UBSE) के अधीन लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

  • अब मदरसों के लिए कोई अलग बोर्ड नहीं होगा, बल्कि वे राज्य के सामान्य स्कूलों की तरह शिक्षा विभाग के मुख्य बोर्ड से संचालित होंगे।

  • इसके साथ ही, सरकार ने मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए 'मदरसा आधुनिकीकरण प्रकोष्ठ' (Madarsa Modernization Cell) के गठन पर भी विचार किया है।


2. इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य

सरकार ने इस बदलाव के लिए निम्नलिखित प्रमुख कारण बताए हैं:

  • समान पाठ्यक्रम (NCERT): मदरसों में दीनी तालीम (धार्मिक शिक्षा) के साथ-साथ आधुनिक विषयों जैसे विज्ञान, गणित और कंप्यूटर को अनिवार्य करना ताकि वहां के छात्र मुख्यधारा की प्रतियोगिता में शामिल हो सकें।

  • प्रशासनिक पारदर्शिता: मदरसों के पंजीकरण, अनुदान और शिक्षकों की नियुक्ति में पारदर्शिता लाना।

  • शिक्षा का अधिकार (RTE): सभी बच्चों को एक समान शिक्षा का अधिकार मिले और उन्हें सामान्य स्कूली सर्टिफिकेट प्राप्त हो, जो उच्च शिक्षा के लिए हर जगह मान्य हो।


3. प्रमुख बदलाव और नई व्यवस्था

  • सर्टिफिकेट की मान्यता: पहले मदरसा बोर्ड के प्रमाण पत्रों को लेकर कुछ तकनीकी दिक्कतें आती थीं, लेकिन अब शिक्षा बोर्ड (रामनगर बोर्ड) से जुड़ने के बाद इनकी मान्यता सामान्य स्कूल के प्रमाणपत्रों के समान होगी।

  • कौशल विकास: नई संस्था का ध्यान अब छात्रों के 'कौशल विकास' (Skill Development) पर भी होगा ताकि वे रोजगार परक शिक्षा प्राप्त कर सकें।

  • जांच और सर्वे: इस प्रक्रिया के दौरान राज्य में अवैध मदरसों की पहचान करने के लिए एक व्यापक सर्वे भी किया गया, ताकि केवल मान्यता प्राप्त संस्थाएं ही संचालित हों।


4. वर्तमान स्थिति (2026)

  • जनवरी 2026 तक, राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड के ढांचे को पूरी तरह से स्कूल शिक्षा विभाग में मर्ज करने की आधिकारिक औपचारिकताएं काफी हद तक पूरी कर ली हैं।

  • मदरसों के शिक्षकों के लिए अब सामान्य पात्रता परीक्षा (TET) जैसे मानकों को लागू करने की तैयारी है।


परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण (Quick Recap):

  • पुरानी संस्था: उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद।

  • नई नियामक संस्था: उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (रामनगर, नैनीताल)।

  • लागू पाठ्यक्रम: NCERT।

  • फोकस: आधुनिक शिक्षा और कौशल विकास।

प्रश्न 2. 16वीं राष्ट्रीय महिला बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली प्रतिभा थपलियाल उत्तराखंड के किस जिले से संबंधित हैं?

(A) पौड़ी गढ़वाल

(B) नैनीताल

(C) देहरादून

(D) अल्मोड़ा


उत्तर: (C) देहरादून

व्याख्या: देहरादून की प्रतिभा थपलियाल ने तेलंगाना में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का मान बढ़ाया। वे मूल रूप से यमकेश्वर (पौड़ी) की रहने वाली हैं।


प्रश्न 3. हाल ही में 'भीष्म' (BHISM) नामक थिंक टैंक का शुभारंभ कहाँ किया गया है, जिसका नेतृत्व CDS जनरल अनिल चौहान कर रहे हैं?

(A) ऋषिकेश

(B) मसूरी

(C) देहरादून

(D) हल्द्वानी


उत्तर: (C) देहरादून

व्याख्या: देहरादून में राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक चिंतन के लिए 'भारत हिमालयन इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक मंच' (भीष्म) शुरू किया गया है। यह मंच राष्ट्रीय सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर सरकार को परामर्श देगा।


प्रश्न 4. केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के कितने स्कूलों में 'समग्र शिक्षा' के तहत व्यवसायिक शिक्षा शुरू करने की स्वीकृति दी है?

(A) 444

(B) 544

(C) 644

(D) 744


उत्तर: (B) 544


व्याख्या: उत्तराखंड के 544 सरकारी स्कूलों में अब एग्रीकल्चर, आईटी और ऑटोमोटिव जैसे विषयों की व्यवसायिक शिक्षा दी जाएगी, ताकि छात्रों में कौशल विकास (Skill Development) हो सके।


प्रश्न 5. देश की 5वीं 'साइंस सिटी' का निर्माण उत्तराखंड के किस स्थान पर किया जा रहा है?

(A) रानीखेत

(B) श्रीनगर

(C) झाझरा (देहरादून)

(D) पन्तनगर


उत्तर: (C) झाझरा (देहरादून)


व्याख्या: देहरादून के झाझरा स्थित विज्ञान धाम को देश की 5वीं साइंस सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विज्ञान के प्रति जागरूकता और शोध को बढ़ावा देना है।


प्रश्न 6. मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के तहत पात्र महिलाओं को परियोजना लागत पर कितने प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है?

(A) 50%

(B) 60%

(C) 75%

(D) 90%


उत्तर: (C) 75%


व्याख्या: इस योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ₹2 लाख तक के प्रोजेक्ट पर 75% (अधिकतम ₹1.5 लाख) की सब्सिडी दी जाती है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।


प्रश्न 7. फरवरी 2026 में 'धर्म गार्जियन' संयुक्त सैन्य अभ्यास भारत और किस देश के बीच चौबटिया में आयोजित हुआ?

(A) फ्रांस

(B) जापान

(C) अमेरिका

(D) नेपाल


उत्तर: (B) जापान

व्याख्या: भारत और जापान की सेनाओं के बीच 'धर्म गार्जियन' अभ्यास का 7वाँ संस्करण रानीखेत के चौबटिया में आयोजित किया गया। यह दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करता है।


प्रश्न 8. उत्तराखंड की किन दो हवाई पट्टियों को 'एडवांस लैंडिंग ग्राउंड' के रूप में विकसित करने के लिए रक्षा मंत्रालय को लीज पर दिया गया है?

(A) जौलीग्रांट और पंतनगर

(B) गौचर और चिन्यालीशौण

(C) नैनी-सैनी और गौचर

(D) पंतनगर और चिन्यालीशौण


उत्तर: (B) गौचर और चिन्यालीशौण

व्याख्या: सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण गौचर (चमोली) और चिन्यालीशौण (उत्तरकाशी) हवाई पट्टियों को अब सेना की जरूरतों के अनुसार 'एडवांस लैंडिंग ग्राउंड' के रूप में अपग्रेड किया जाएगा।


प्रश्न 9. 'अतिथि देवोभव' थीम के साथ वर्ष 2026 में किस मुख्य आयोजन का शुभारंभ किया गया है?

(A) नंदा देवी राजजात

(B) कुम्भ मेला

(C) चारधाम यात्रा

(D) जागेश्वर महोत्सव


उत्तर: (C) चारधाम यात्रा


व्याख्या: वर्ष 2026 की चारधाम यात्रा को 'अतिथि देवोभव' की थीम पर आधारित किया गया है, ताकि तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं और सत्कार मिल सके।


प्रश्न 10. खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 की पदक तालिका में उत्तराखंड का कौन सा स्थान रहा?

(A) 5वाँ

(B) 7वाँ

(C) 9वाँ

(D) 10वाँ


उत्तर: (C) 9वाँ


व्याख्या: उत्तराखंड ने इस बार 9वीं रैंक हासिल की। पिछले साल की 10वीं रैंक की तुलना में इस बार राज्य के प्रदर्शन में सुधार हुआ है।


खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 इस प्रतियोगिता का छठा संस्करण (6th Edition) था, जिसे दो चरणों में आयोजित किया गया:

  • प्रथम चरण (लेह, लद्दाख): 20 से 26 जनवरी 2026। यहाँ मुख्य रूप से आइस हॉकी और आइस स्केटिंग जैसे 'आइस स्पोर्ट्स' आयोजित हुए।

  • द्वितीय चरण (गुलमर्ग, जम्मू-कश्मीर): 23 से 26 फरवरी 2026। यहाँ स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और नॉर्डिक स्कीइंग जैसे 'स्नो स्पोर्ट्स' हुए।

2. उत्तराखंड का प्रदर्शन (Performance)

  • पदक तालिका में स्थान: उत्तराखंड पदक तालिका में 10वें स्थान पर रहा। (नोट: कुछ रिपोर्टों के अनुसार यह शीर्ष 10 में शामिल है, जबकि बीच गेम्स में रैंक 20वीं थी)।

  • मुख्य खिलाड़ी: राज्य के खिलाड़ियों ने अल्पाइन स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग जैसी स्पर्धाओं में भाग लिया।

  • नया आकर्षण: इस वर्ष प्रतियोगिता में फिगर स्केटिंग (Figure Skating) को पहली बार शामिल किया गया था, जिसमें उत्तराखंड के एथलीटों ने भी अपनी प्रतिभा दिखाई।

3. पदक तालिका 2026 (शीर्ष टीमें)

रैंक

टीम/राज्य

स्वर्ण

रजत

कांस्य

कुल पदक

1

भारतीय सेना (Army)

9

6

8

23

2

हिमाचल प्रदेश

6

7

1

14

3

हरियाणा

4

1

2

7



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उत्तराखंड में भूमि बंदोबस्त का इतिहास

  भूमि बंदोबस्त व्यवस्था         उत्तराखंड का इतिहास भूमि बंदोबस्त आवश्यकता क्यों ? जब देश में उद्योगों का विकास नहीं हुआ था तो समस्त अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर थी। उस समय राजा को सर्वाधिक कर की प्राप्ति कृषि से होती थी। अतः भू राजस्व आय प्राप्त करने के लिए भूमि बंदोबस्त व्यवस्था लागू की जाती थी । दरअसल जब भी कोई राजवंश का अंत होता है तब एक नया राजवंश नयी बंदोबस्ती लाता है।  हालांकि ब्रिटिश शासन से पहले सभी शासकों ने मनुस्मृति में उल्लेखित भूमि बंदोबस्त व्यवस्था का प्रयोग किया था । ब्रिटिश काल के प्रारंभिक समय में पहला भूमि बंदोबस्त 1815 में लाया गया। तब से लेकर अब तक कुल 12 भूमि बंदोबस्त उत्तराखंड में हो चुके हैं। हालांकि गोरखाओ द्वारा सन 1812 में भी भूमि बंदोबस्त का कार्य किया गया था। लेकिन गोरखाओं द्वारा लागू बन्दोबस्त को अंग्रेजों ने स्वीकार नहीं किया। ब्रिटिश काल में भूमि को कुमाऊं में थात कहा जाता था। और कृषक को थातवान कहा जाता था। जहां पूरे भारत में स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी बंदोबस्त और महालवाड़ी बंदोबस्त व्यवस्था लागू थी। वही ब्रिटिश अधिकारियों ...

परमार वंश - उत्तराखंड का इतिहास (भाग -1)

उत्तराखंड का इतिहास History of Uttarakhand भाग -1 परमार वंश का इतिहास उत्तराखंड में सर्वाधिक विवादित और मतभेद पूर्ण रहा है। जो परमार वंश के इतिहास को कठिन बनाता है परंतु विभिन्न इतिहासकारों की पुस्तकों का गहन विश्लेषण करके तथा पुस्तक उत्तराखंड का राजनैतिक इतिहास (अजय रावत) को मुख्य आधार मानकर परमार वंश के संपूर्ण नोट्स प्रस्तुत लेख में तैयार किए गए हैं। उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में 688 ईसवी से 1947 ईसवी तक शासकों ने शासन किया है (बैकेट के अनुसार)।  गढ़वाल में परमार वंश का शासन सबसे अधिक रहा।   जिसमें लगभग 12 शासकों का अध्ययन विस्तारपूर्वक दो भागों में विभाजित करके करेंगे और अंत में लेख से संबंधित प्रश्नों का भी अध्ययन करेंगे। परमार वंश (गढ़वाल मंडल) (भाग -1) छठी सदी में हर्षवर्धन की मृत्यु के पश्चात संपूर्ण उत्तर भारत में भारी उथल-पुथल हुई । देश में कहीं भी कोई बड़ी महाशक्ति नहीं बची थी । जो सभी प्रांतों पर नियंत्रण स्थापित कर सके। बड़े-बड़े जनपदों के साथ छोटे-छोटे प्रांत भी स्वतंत्रता की घोषणा करने लगे। कन्नौज से सुदूर उत्तर में स्थित उत्तराखंड की पहाड़ियों में भी कुछ ऐसा ही...

कुणिंद वंश का इतिहास (1500 ईसा पूर्व - 300 ईसवी)

कुणिंद वंश का इतिहास   History of Kunid dynasty   (1500 ईसा पूर्व - 300 ईसवी)  उत्तराखंड का इतिहास उत्तराखंड मूलतः एक घने जंगल और ऊंची ऊंची चोटी वाले पहाड़ों का क्षेत्र था। इसका अधिकांश भाग बिहड़, विरान, जंगलों से भरा हुआ था। इसीलिए यहां किसी स्थाई राज्य के स्थापित होने की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती है। थोड़े बहुत सिक्कों, अभिलेखों व साहित्यक स्रोत के आधार पर इसके प्राचीन इतिहास के सूत्रों को जोड़ा गया है । अर्थात कुणिंद वंश के इतिहास में क्रमबद्धता का अभाव है।               सूत्रों के मुताबिक कुणिंद राजवंश उत्तराखंड में शासन करने वाला प्रथम प्राचीन राजवंश है । जिसका प्रारंभिक समय ॠग्वैदिक काल से माना जाता है। रामायण के किस्किंधा कांड में कुणिंदों की जानकारी मिलती है और विष्णु पुराण में कुणिंद को कुणिंद पल्यकस्य कहा गया है। कुणिंद राजवंश के साक्ष्य के रूप में अभी तक 5 अभिलेख प्राप्त हुए हैं। जिसमें से एक मथुरा और 4 भरहूत से प्राप्त हुए हैं। वर्तमान समय में मथुरा उत्तर प्रदेश में स्थित है। जबकि भरहूत मध्यप्रदेश में है। कुणिंद वंश का ...

Uttarakhand Current Affairs 2025

उत्तराखंड करेंट अफेयर्स 2025 नवंबर 2025 से अप्रैल 2025 तक जैसा कि आप सभी जानते हैं देवभूमि उत्तराखंड प्रत्येक मा उत्तराखंड के विशेष करंट अफेयर्स उपलब्ध कराता है। किंतु पिछले 6 माह में व्यक्तिगत कारणों के कारण करेंट अफेयर्स उपलब्ध कराने में असमर्थ रहा। अतः उत्तराखंड की सभी आगामी परीक्षाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि नवंबर 2024 से अप्रैल 2025 तक के सभी करेंट अफेयर्स चार भागों में विभाजित करके अप्रैल के अन्त तक उपलब्ध कराए जाएंगे। जिसमें उत्तराखंड बजट 2025-26 और भारत का बजट 2025-26 शामिल होगा। अतः सभी करेंट अफेयर्स प्राप्त करने के लिए टेलीग्राम चैनल से अवश्य जुड़े। 956816280 पर संपर्क करें। उत्तराखंड करेंट अफेयर्स (भाग - 01) (1) 38वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन कहां किया गया ? (a) उत्तर प्रदेश  (b) हरियाणा (c) झारखंड  (d) उत्तराखंड व्याख्या :- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जनवरी 2025 को राजीव गाँधी अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम रायपुर देहरादून, उत्तराखंड में 38वें ग्रीष्मकालीन राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन किया। उत्तराखंड पहली बार ग्रीष्मकालीन राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी की और य...

उत्तराखंड का इतिहास : चंद राजवंश (भाग-2)

  उत्तराखंड का इतिहास चंद राजवंश का इतिहास (भाग-२) विस्तार से चंद राजा कन्नौज के शासकों के वंशज थे । जो महमूद गजनवी के आक्रमण के समय कुर्मांचल में प्रविष्ट हुए थे। उस समय कुर्मांचल में ब्रह्मदेव का शासन था। ब्रह्मदेव कत्यूर वंश का अंतिम सम्राट था। 10 वीं शताब्दी में लोहाघाट के आसपास सुई राज्य था। सुई राज्य पर ब्रह्मदेव शासन कर रहा था। *इतिहासकार श्यामलाल, एटकिंसन, वाल्टन व बद्रीदत्त पांडे के अनुसार चंद शासक इलाहाबाद के निकट झूंसी से आया था। चंद राजवंश का उदय चंद वंश के संस्थापक - (1) सोमचंद (1025-1046 ईसवी) 1025 ईस्वी के आसपास सोमचंद ने चंपावत में अपनी राजधानी स्थापित की। इतिहासकार श्यामलाल के अनुसार सोमचंद इलाहाबाद के निकट झूंसी से आया था। कुमाऊं में सोमचंद के आने की अनेक कहानियां है । परीक्षाओं की दृष्टि से यह मान सकते हैं कि सोमचंद 11 वीं सदी के आरंभ में बद्रीनाथ की यात्रा पर आया था। संयोगवश उसकी मुलाकात कत्यूरी नरेश ब्रह्मदेव से हो जाती है। ब्रह्मदेव सोमचंद की राजोचित, योग्यता, रूप-रंग व व्यक्तित्व को देखकर अत्यधिक प्रभावित हो जाता है। और अपनी एकलौती पुत्री चंपा का विवाह सोमचंद...

ब्रिटिश कुमाऊं कमिश्नर : उत्तराखंड

ब्रिटिश कुमाऊं कमिश्नर उत्तराखंड 1815 में गोरखों को पराजित करने के पश्चात उत्तराखंड में ईस्ट इंडिया कंपनी के माध्यम से ब्रिटिश शासन प्रारंभ हुआ। उत्तराखंड में अंग्रेजों की विजय के बाद कुमाऊं पर ब्रिटिश सरकार का शासन स्थापित हो गया और गढ़वाल मंडल को दो भागों में विभाजित किया गया। ब्रिटिश गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल। अंग्रेजों ने अलकनंदा नदी का पश्चिमी भू-भाग पर परमार वंश के 55वें शासक सुदर्शन शाह को दे दिया। जहां सुदर्शन शाह ने टिहरी को नई राजधानी बनाकर टिहरी वंश की स्थापना की । वहीं दूसरी तरफ अलकनंदा नदी के पूर्वी भू-भाग पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया। जिसे अंग्रेजों ने ब्रिटिश गढ़वाल नाम दिया। उत्तराखंड में ब्रिटिश शासन - 1815 ब्रिटिश सरकार कुमाऊं के भू-राजनीतिक महत्व को देखते हुए 1815 में कुमाऊं पर गैर-विनियमित क्षेत्र के रूप में शासन स्थापित किया अर्थात इस क्षेत्र में बंगाल प्रेसिडेंसी के अधिनियम पूर्ण रुप से लागू नहीं किए गए। कुछ को आंशिक रूप से प्रभावी किया गया तथा लेकिन अधिकांश नियम स्थानीय अधिकारियों को अपनी सुविधानुसार प्रभावी करने की अनुमति दी गई। गैर-विनियमित प्रांतों के जिला प्रमु...

भारत की जनगणना 2011 से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न (भाग -01)

भारत की जनगणना 2011 मित्रों वर्तमान परीक्षाओं को पास करने के लिए रखने से बात नहीं बनेगी अब चाहे वह इतिहास भूगोल हो या हमारे भारत की जनगणना हो अगर हम रटते हैं तो बहुत सारे तथ्यों को रटना पड़ेगा जिनको याद रखना संभव नहीं है कोशिश कीजिए समझ लीजिए और एक दूसरे से रिलेट कीजिए। आज हम 2011 की जनगणना के सभी तथ्यों को समझाने की कोशिश करेंगे। यहां प्रत्येक बिन्दु का भौगोलिक कारण उल्लेख करना संभव नहीं है। इसलिए जब आप भारत की जनगणना के नोट्स तैयार करें तो भौगोलिक कारणों पर विचार अवश्य करें जैसे अगर किसी की जनसंख्या अधिक है तो क्यों है ?, अगर किसी की साक्षरता दर अधिक है तो क्यों है? अगर आप इस तरह करेंगे तो शत-प्रतिशत है कि आप लंबे समय तक इन चीजों को याद रख पाएंगे साथ ही उनसे संबंधित अन्य तथ्य को भी आपको याद रख सकेंगे ।  भारत की जनगणना (भाग -01) वर्ष 2011 में भारत की 15वीं जनगणना की गई थी। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का कुल क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किलोमीटर था तथा भारत की कुल आबादी 121,08,54,922 (121 करोड़) थी। जिसमें पुरुषों की जनसंख्या 62.32 करोड़ एवं महिलाओं की 51.47 करोड़ थी। जनसंख्या की दृष...