उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Era) अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है। इस काल का कोई लिखित प्रमाण नहीं है, इसलिए इसका इतिहास गुफाओं में मिले शैल-चित्रों (Rock Paintings), पत्थरों के औजारों और प्राचीन कंकालों के आधार पर लिखा गया है। आइए जानते हैं विस्तार से - “धूल से भरी राहें और तपता हुआ सूरज... उत्तर भारत के एक गुमनाम गाँव के किनारे एक ऊँचा सा मिट्टी का टीला था। लोग वहाँ से ईंटें उखाड़ रहे थे, कोई अपने घर की दीवार बना रहा था, तो कोई उन पत्थरों को कचरा समझकर फेंक रहा था। वहीं दूर खड़ा एक अंग्रेज अफसर, जिसका नाम अलेक्जेंडर कनिंघम था, यह सब बड़े गौर से देख रहा था। उसके पास एक पुरानी किताब थी—चीनी यात्री ह्वेनसांग की डायरी। कनिंघम को यकीन था कि जिस टीले को लोग 'कचरा' समझ रहे हैं, उसके नीचे सम्राट अशोक का कोई महान शहर या बुद्ध का कोई पवित्र मठ दफन है। वो बेचैनी और वो खत कनिंघम रात भर सो नहीं पाए। उन्हें लग रहा था जैसे वो दफन शहर उन्हें पुकार रहे हों। उन्होंने सोचा, "अगर आज मैंने इन पत्थरों को नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियाँ कभी नहीं...
Uttarakhand Current Affairs 2025 उत्तराखंड करेंट अफेयर्स जनवरी 2025 से जून 2025 तक प्रश्न 1 : राष्ट्रीय शिक्षा रत्न पुरस्कार 2025 किस संगठन द्वारा आयोजित किया गया? A) उत्तराखंड शिक्षा विभाग B) पृथ्वी अभुदय एजुकेटर एसोसिएशन इंडिया (PAEI) C) एमटी यूनिवर्सिटी D) संस्कृत अकादमी व्याख्या: यह पुरस्कार देशभर में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, रचनात्मकता, संस्कृति और भाषा के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को दिया गया। यह सम्मान समारोह पृथ्वी अभुदय एजुकेटर एसोसिएशन इंडिया (PAEI) द्वारा एमटी यूनिवर्सिटी, मोहाली, पंजाब में आयोजित किया गया। उत्तराखंड के नौ शिक्षकों को सम्मानित किया गया, जिसमें पौड़ी गढ़वाल की तीन शिक्षिकाएं शामिल हैं: रश्मि उनियाल (सहायक अध्यापक विज्ञान, कोटद्वार), कविता असवाल (सहायक अध्यापक अंग्रेजी, दुगड्डा) सरिका कैस्टवाल (प्रवक्ता, रसायन विज्ञान, रिकनी खाल)। इन्हें शैक्षिक नवाचार, विद्यार्थियों में वैज्ञानिक व रचनात्मक दृष्टिकोण के विकास, विद्यालय के भौतिक व बौद्धिक स्तर को ऊँचाई तक पहुँचाने, और स्थानीय संस्कृति, भाषा व परंपराओं के संरक्षण हेतु ...