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पर्वतों के निर्माण (Geography Notes - part 06)

पर्वतों के निर्माण  प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...

शब्दालय : काव्य संग्रह (Happy New Year)

Happy New Year 2023

देवभूमि उत्तराखंड की तरफ से सभी देशवासियों को वर्ष 2023 की हार्दिक शुभकामनाएं। बीता वर्ष बीते साल आपके जैसे भी गए वो तो गए। अच्छे गए बुरे गए फर्क नहीं पड़ता। फर्क पड़ता है आने वाला साल कैसा हो ? तो आशा करते हैं आपका आने वाला साल सभी वर्षों से बेहतर हो । आने वाले नये साल में बूढ़ों को बच्चों से की गयी उम्मीद से ज्यादा सुख मिले। देवभूमि उत्तराखंड के चारों धामों की यात्रा करने का सौभाग्य मिले। और युवाओं ने अभी तक जितनी भी मेहनत की है उसका फल मिले। साथ ही अविवाहितों को मनपसंद का वर मिले। नव वर्ष के उपलक्ष में देवभूमि उत्तराखंड आप सभी के सामने एक कविता प्रस्तुत करता है जिसका शीर्षक है - "अब के बरस"

अल्फ़ाज़ अनकहे : शब्दालय

शीर्षक : अब के बरस 



इश्क मुकम्मल हो गर,
हमको भी पता दीजिए,
वो सोए हैं अरसों से, 
जरा उनको भी जगा दीजिए।

नया साल आया है,
जरा उनको भी आगाह कीजिए।
बैचैनी से भरा है आलम,
शरमो हया के परदे गिरा दीजिए,

रूत-ए-इश्क का
आईना उनको भी दिखा दीजिए।
गुज़ारिश है खुदा से
अब के बरस हमको भी मिला दीजिए। 

पहाड़ी बन्दे : देवभूमि उत्तराखंड 

देवभूमि उत्तराखंड के हमारे स्थायी भाइयों के लिए समर्पित मेरी कविता - पहाड़ी बंदे। जो अभी भी पहाड़ों को देश की शान बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जो पलायन करने के स्थान पर पहाड़ में ही रोजगार की नई जगह बना रहे हैं।

हम आजाद परिंदे ठहरे 
पहाड़ों में हमारा बसेरा है,
झरने, नदियां हमारे खेल खिलौने
सफेद चादर, मखमली घास पर
हमारा बिछौना है ।

भूस्खलन देखा, भूकंप देखा
तनिक मन न भयभीत होता, 
हम पहाड़ के बंदे ठहरे,
बादलों में हमारा बसेरा है ।

ऊंचे पर्वत, गहरे दर्रे
हिमनदों से होकर राह बनायी है।
फूलों की घाटी से लेकर,
चार धाम की यात्रा करवायी है ।

शब्दालय : काव्य संग्रह 

और कुछ शब्द उन मित्रों, रिश्तेदारों, परिवार वालों, गांवों वालों, शहर वालों के लिए जो हमारे शब्दों को समझ न सके।

काश ! तुम समझ पाते,
मेरे शब्दालय के शब्दों को,
सब समझ गए,
एक तुम न समझे,
मेरे हृदय में बसे प्रेम की,
अविरल धारा को,

हमारी कविताओं को पढ़ने के लिए धन्यवाद यदि आपको हमारी कविताएं पसंद आती है तो अपनी राय व्यक्त कीजिए। और अधिक से अधिक शेयर कीजिए। अंत में एक बार मैं फिर से आप सभी को नववर्ष की हार्दिक बधाईयां। आपका जीवन मंगलमय हो।

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