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पर्वतों के निर्माण (Geography Notes - part 06)

पर्वतों के निर्माण  प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...

उत्तराखंड भर्ती घोटाले पर कविता

उत्तराखंड भर्ती घोटाले पर कविता

क्या होगा मेरे देश का ?
चोला पहने हैं ईमानदारी का,
आंखों में पट्टी सजा के,
करते हैं न्याय भर्ती घोटाले का,

चोर ही चोर को बचा रहे हैं।
देश के मंत्री कुछ छुपा रहे हैं।
शपथ लेते हैं मैं न्याय करूंगा।
ईमानदारी से शासन करूंगा।

जनता जानती है, पुलिस जानती है,
नहीं जानते तो बस टोपी वाले,
ऐसा सबको जता रहे हैं।
पहले भी होता था ऐसा
यह बात सबको बता रहे हैं।

देवभूमि उत्तराखंड

उत्तराखंड भर्ती घोटाला 2022

सुना है पुलिस जांच पूरी होने वाली है। जिसमें 41 गिरफ्तारियां हो चुकी है। और इन सभी 41 गिरफ्तारियां में न किसी अधिकारी का नाम आया है और न ही विधायकों का । यह कैसे संभव हो सकता किसी भी विधायक ने घोटाला न‌ किया हो । ये तो बच्चा बच्चा जानता है प्रत्येक विधायक कम से कम दो से तीन सीट पर अपने रिश्तेदारों या परिवार वालों को लगवाता है। और भर्ती के घोटाले को देखते हुए यह तो कहा ही नहीं जा सकता एक विधायक ने कितने लगवाए होंगे। और पुलिस वाले कहते हैं। घोटाले की जांच पूर्ण होने वाली है। ऐसे में क्या होगा देश का। अधिकारियों ने नेताओं को बचाया नेताओं ने अधिकारियों को। और पुलिस वालों ने अपनी नौकरी को बचाया। बस यही चल रहा है हमारे देश में। खाने के लिए तो यह ईमानदारी की कसम खाते हैं शपथ लेते हैं। इससे अच्छा तो शपथ और ईमानदारी का सिस्टम ही खत्म कर देना चाहिए जब करना ही है घोषखोरी। और हमारे मुख्यमंत्री जो राज्य को न्याय पूर्ण चलाने की बात करते हैं क्या इनको नहीं दिखता है कि देश में क्या हुआ है और नेता हमारे कैसे होते हैं सबको अपनी सत्ता प्यारी है? 

और तो और उत्तराखंड भर्ती घोटाले को एक फिल्म की कहानी बना दी गई है। जिससे जिससे मंत्रियों से ध्यान केंद्रित ना होकर किसी तीसरे पक्ष की ओर जाए जिसमें एक मूसे वाला नाम का गुंडा नाम उभरकर आया है। वह भी अचानक से। 

जिस हिसाब से राज्य सरकार के निर्णय रहे हैं इस हिसाब से तो भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा। दोषियों को कोई अभी तक सजा का प्रावधान नहीं किया गया। ना नाम का उल्लेख किया गया है। गलती की है उन्होंने सजा तो मिलनी चाहिए। और एक समाज को संदेश देना चाहिए। कि इस तरह की गलती में कोई माफी नहीं होगी अन्यथा आगे भी ऐसे ही घोटाले होते रहेंगे। और जो एक ईमानदार और मेहनत अभ्यर्थी होगा वह कभी भी सरकारी पदों पर नहीं आ पाएगा। इससे ना तो देश का विकास होगा और जो हमारी सत्ता पक्ष की सरकारें देश के उज्जवल भविष्य की कामना कर रहे हैं वह एक सपना ही बना रहे जाएगा।

उत्तराखंड भर्ती घोटाले पर कविता

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