पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
लिव इन रिलेशनशिप मानवता का पाठ : वास्तविक स्वतंत्रता आपके विचार से मानव का धर्म क्या होना चाहिए? मेरे विचार से मानव का धर्म किसी भी जीवित प्राणी को हानि पहुंचाए बिना पर्यावरण की रक्षा करते हुए एक स्वतंत्र जीवन ही मानव का धर्म होना चाहिए । जिसमें ना कोई अत्यधिक कठिन नियम हो, ना ही कठोर संविधान, ना काले-गोरे का भेद, ना ही कोई धर्म, ना ही किसी की कोई जात और ना ही ऐसे रीति रिवाज व परंपराएं जो इंसान को गुलाम बनाती हैं । मैंने अक्सर शादी हो जाने के बाद लोगों को गुलाम बनते देखा है चाहें वो स्त्रियां हो? या वो पुरुष हो? आपको मैं पहले ही अवगत करा दूं कि मेरे आर्टिकल का उद्देश्य बिल्कुल नहीं है कि आप सदियों से चली आ रही परंपराओं का पालन ना करें । लेकिन सभी महान विद्वानों ने कहा है कि जिस प्रकार किसी धर्म में कुछ गलत नियम या गलत प्रथाएं हैं उनमें बदलाव जरूरी है । उसी प्रकार यदि हमारे किसी भी प्रकार के रीति रिवाज और परंपराएं इंसान को कमजोर बनाती हैं और उसकी आजादी व उसकी सोच पर लगाम लगाती हैं । तो क्यों...