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Uksssc Mock Test 2026

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भारत के 15वें उपराष्ट्रपति C. P. (Chandrapuram Ponnusamy) Radhakrishnan

 भारत के 15वें उपराष्ट्रपति

भारत के 15वें उपराष्ट्रपति C. P. (Chandrapuram Ponnusamy) Radhakrishnan बने हैं । राष्ट्रपति के बाद यह देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।



निर्वाचन की जानकारी

  • उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 का मतदान 9 सितम्बर, 2025 को हुआ। 
  • चुनाव भारत के दोनों सदनों (लोकसभा + राज्यसभा) के सांसदों द्वारा गुप्त मताधिकार से हुआ।
  • कुल निर्वाचक (electors) 781 थे, जिनमें से 767 ने मतदान किया।
  • 15 मतपत्र अमान्य घोषित हुए। 

परिणाम

  • C. P. Radhakrishnan (NDA उम्मीदवार) ने 452 मत प्राप्त किये। 
  • उनके मुकाबले B. Sudershan Reddy, जिन्हें विपक्ष (INDIA गठबंधन) ने समर्थन दिया था, ने 300 मत प्राप्त किये। 
  • मतों का अंतर 152 रहा। 

सी. पी. राधाकृष्णन — व्यक्तिगत एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि

  • जन्म : 20 अक्टूबर, 1957, तिरुप्पुर, तमिलनाडु।
  • शिक्षा : उन्होंने BBA (बैचलर ऑफ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन) की डिग्री प्राप्त की है।
  • आरएसएस और जनसंघ से जुड़ाव: युवावस्था से ही RSS/भाजपा के संगठनों से सक्रियता रही है। 

पहले के पद :

  • महाराष्ट्र राज्यपाल (Governor of Maharashtra)
  • झारखंड राज्यपाल का पद भी संभाला है। 
  • भाजपा का तमिलनाडु इकाई में काम किया है। 

शपथ ग्रहण एवं पदभार संभालना

  • सी. पी. राधाकृष्णन ने 12 सितंबर, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की देख-रेख में उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। 
इस प्रकार वह भारत के संवैधानिक पदों में राष्ट्रपति के बाद दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पद पर आ गए हैं। 

विशेष बातें / राजनीतिक महत्व

  • यह चुनाव Jagdeep Dhankhar के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे के बाद हुआ।
  • मतदान में बहुत उच्च भागीदारी हुई (~98%)।
  • विपक्षी उम्मीदवार B. Sudershan Reddy थे, जो पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज हैं। 
  • यह चुनाव पिछले कई उपराष्ट्रपति चुनावों में से एक था जिसमें मुकाबला अपेक्षाकृत करीबी रहा। 

1. भारत के उपराष्ट्रपति की संवैधानिक व्याख्या

  • संविधान के अनुच्छेद 63 में कहा गया है कि “भारत में एक उपराष्ट्रपति होगा।”
  • अनुच्छेद 64 : उपराष्ट्रपति राज्यसभा (Rajya Sabha) के पदेन सभापति (Ex-officio Chairman) होते हैं।
  • अनुच्छेद 65 : राष्ट्रपति के मृत्यु, त्यागपत्र, पदमुक्ति या अस्थायी अनुपस्थिति की स्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यकारी राष्ट्रपति (Acting President) के रूप में कार्य करते हैं।

चुनाव प्रक्रिया :

  • अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों (लोकसभा + राज्यसभा) के निर्वाचित व नामित सदस्य मिलकर करते हैं।
  • चुनाव एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से होता है।

कार्यकाल 

5 वर्ष (दोबारा निर्वाचित हो सकते हैं)।

योग्यता :

  • भारत का नागरिक हो,
  • आयु कम से कम 35 वर्ष,
  • राज्यसभा का सदस्य चुने जाने योग्य होना चाहिए।

भारत के सभी उपराष्ट्रपति का विवरण 

1. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1952–1962)

भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने। वे महान दार्शनिक, शिक्षक और शिक्षा शास्त्री थे। उपराष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने भारतीय शिक्षा व्यवस्था और संस्कृति के प्रचार में योगदान दिया। बाद में वे भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने। उनके जन्मदिन 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

2. डॉ. ज़ाकिर हुसैन (1962–1967)

वे दूसरे उपराष्ट्रपति और पहले मुस्लिम उपराष्ट्रपति बने। शिक्षा और सामाजिक सुधारों में उनकी गहरी रुचि थी। बाद में वे राष्ट्रपति बने और राष्ट्रपति पद पर रहते हुए ही 1969 में उनका निधन हो गया।

3. वी. वी. गिरी (1967–1969)

वे तीसरे उपराष्ट्रपति बने। 1969 में राष्ट्रपति डॉ. ज़ाकिर हुसैन के निधन के बाद उन्होंने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभाली। बाद में वे राष्ट्रपति भी बने।

4. गोपालस्वामी पाथक (1969–1974)

वे चौथे उपराष्ट्रपति बने। उनका कार्यकाल आपातकाल से पहले का था। उन्होंने संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करते हुए राज्यसभा की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाई।

5. बी. डी. जट्टी (1974–1979)

पाँचवें उपराष्ट्रपति रहे। 1977 में राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के निधन पर वे कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। उनके समय में भारतीय राजनीति अस्थिर दौर से गुज़र रही थी।

6. मोहम्मद हिदायतुल्लाह (1979–1984)

वे पहले ऐसे उपराष्ट्रपति थे जो मुख्य न्यायाधीश (CJI) रह चुके थे। न्यायपालिका से उपराष्ट्रपति बनने वाले वे अनोखे व्यक्तित्व रहे। उन्होंने विधिक और संवैधानिक मामलों में गहरी पकड़ दिखाई।

7. आर. वेंकटरमण (1984–1987)

वे सातवें उपराष्ट्रपति बने और बाद में राष्ट्रपति पद पर भी पहुँचे। उनके समय में भारतीय राजनीति में स्थिरता आई और उन्होंने संसदीय परंपराओं को मज़बूत किया।

8. डॉ. शंकर दयाल शर्मा (1987–1992)

वे आठवें उपराष्ट्रपति बने और बाद में राष्ट्रपति बने। वे संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध थे।

9. के. आर. नारायणन (1992–1997)

वे पहले दलित उपराष्ट्रपति बने। उनकी सादगी और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें अलग पहचान दी। बाद में वे भारत के राष्ट्रपति बने और “जनता के राष्ट्रपति” कहे गए।

10. कृष्ण कांत (1997–2002)

वे दसवें उपराष्ट्रपति बने। उनका कार्यकाल पूरा नहीं हो पाया क्योंकि 2002 में कार्यकाल के दौरान उनका निधन हो गया।

11. भैरोंसिंह शेखावत (2002–2007)

वे ग्यारहवें उपराष्ट्रपति बने। इससे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहे। वे पहले उपराष्ट्रपति थे जिन्होंने राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ा लेकिन सफल नहीं हुए।

12. मोहम्मद हामिद अंसारी (2007–2017)

वे बारहवें उपराष्ट्रपति बने और लगातार दो कार्यकाल (10 वर्ष) तक इस पद पर रहे। विदेश नीति, अल्पसंख्यक मामलों और संसदीय कार्यवाही में उनका बड़ा योगदान रहा।

13. एम. वेंकैया नायडू (2017–2022)

तेरहवें उपराष्ट्रपति बने। वे आंध्र प्रदेश से थे और भारतीय राजनीति में उनके वक्तृत्व कौशल के कारण जाने जाते थे। राज्यसभा में उन्होंने कई बार संसदीय अनुशासन पर जोर दिया।

14. जगदीप धनखड़ (2022–2025)

वे चौदहवें उपराष्ट्रपति बने। इससे पहले वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। वे किसान पृष्ठभूमि से आते थे। स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया।

15. सी. पी. राधाकृष्णन (2025–वर्तमान)

वे पंद्रहवें और वर्तमान उपराष्ट्रपति हैं। वे लंबे समय तक भाजपा और आरएसएस से जुड़े रहे तथा महाराष्ट्र और झारखंड के राज्यपाल भी रह चुके हैं। 2025 में उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार को हराकर उपराष्ट्रपति पद संभाला।

प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं का संक्षिप्त उल्लेख

  • 1952 : पहला उपराष्ट्रपति चुनाव — डॉ. राधाकृष्णन निर्विरोध चुने गए।
  • 1977 : राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के निधन पर बी. डी. जट्टी कार्यवाहक राष्ट्रपति बने।
  • 1997 : के. आर. नारायणन पहले दलित उपराष्ट्रपति बने, बाद में राष्ट्रपति पद भी संभाला।
  • 2007–2017 : हामिद अंसारी दो बार उपराष्ट्रपति बनने वाले दूसरे व्यक्ति बने।
  • 2025 : स्वास्थ्य कारणों से जगदीप धनखड़ का कार्यकाल अधूरा रहा और समयपूर्व चुनाव कराए गए।

इस तरह उपराष्ट्रपति का पद न केवल राष्ट्रपति का उत्तराधिकारी है बल्कि राज्यसभा के संचालन और भारतीय संसदीय लोकतंत्र में संतुलन बनाए रखने का भी प्रमुख संवैधानिक स्तंभ है।

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