लोककथा : खरिया और भरिया नमस्कार दोस्तों आज हम थारू जनजाति कि संस्कृति के संरक्षण के लिए सदियों से प्रचलित लोककथाओं और लोकगीतों को शुरू करने जा रहे हैं। यूं तो थारू जनजाति के लोगों की अपनी कोई भाषा नहीं है। लेकिन सर्वाधिक प्रभाव ब्रजभाषा का देखने को मिलता है। किंतु समय परिर्वतन के साथ पहाड़ी, खड़ी बोली और हिन्दी का प्रभाव देखने को मिलता है। यदि हमारे द्वारा लिखी यह कहानी आपने कभी सुनी हो तो कमेंट अवश्य करें। खरिया और भरिया : लोककथा यह कहानी दो भाइयों की है - खरिया और भरिया। इस कहानी में खरिया बड़ा भाई और थोड़ा चालक था वहीं बढ़िया छोटा भाई और बहुत सीधा साधा था। यह कथा थारू समाज के उसे समय की है जब उनके पास धन के रूप में केवल खेती और मवेशी हुआ करते थे। एक गांव में दो भाई रहा करते थे। दोनों भाई बहुत मेहनती थे लेकिन अक्सर वे आपस के छोटे छोटे विवादों में फंस जाया करते थे। एक दिन अचानक पिता की मृत्यु जाती है। उनके पिता की मृत्यु के बाद, खरिया ने चालाकी से घर की संपत्तियों का बंटवारा कुछ इस तरह किया : कंबल का बंटवारा : खरिया ने कहा, "भाई, यह कंबल दिन में मेरा रहेगा और रात में तुम्...
चंद्रयान मिशन -3 से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न (Chandrayan Misson -3) चंद्रयान मिशन-3 वर्ष का सर्वाधिक महत्वपूर्ण करेंट अफेयर्स टॉपिक है। यहां से इस वर्ष प्रत्येक परीक्षा में शत प्रतिशत प्रश्न आने की संभावना है। देवभूमि उत्तराखंड द्वारा इस टॉपिक को तैयार करने हेतु महत्त्वपूर्ण प्रश्नों का सेट तैयार किया गया है। जो सभी पैटर्न पर आधारित है। अतः सभी प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़ें। चंद्रयान मिशन -3 इसरो द्वारा भारत का चंद्रयान -3 मिशन 14 जुलाई 2023 को दोपहर 2:35 पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ। यह रॉकेट LVM3-M4 से लांच किया गया। तथा इसमें लगे प्रमुख रॉकेट इंजन का नाम ICE क्रायोजेनिक था। जिसमें लगभग 27000 किलोग्राम से भी अधिक की ईंधन की क्षमता थी। और चंद्रयान-3 का कुल वजन 3900 किलोग्राम था। पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 384400 किलोमीटर है। पहली बार चांद पर कदम रखने का खिताब अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग को प्राप्त है जिन्होंने 20 जुलाई 1969 को चांद पर पहला कदम रखा था। चंद्रयान मिशन -3 की कुल लागत 615 करोड रुपए थी। इसके साथ विक्रम नाम का लैंडर तथा प्रज्ञान नाम ...