पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
कस्तूरी मृग उत्तराखंड का राज्य पशु - कस्तूरी मृग चाहे भारत का राष्ट्र पशु हो या हो, किसी भी राज्य का राज्य पशु। यह जानना बहुत जरूरी है कि किसी भी देश व राज्य के लिए राज्य प्रतीक चिन्ह की आवश्यकता क्यों होती है? या फिर किसी भी पुष्प, पशु, पक्षी को प्रतीक चिन्ह का दर्जा क्यों दिया जाता है तो आइए जानते हैं। प्रतीक चिन्हों की आवश्यकता क्यों? किसी भी देश या राज्य के विकास को सही दिशा प्रदान करने के लिए प्रतीक चिन्ह बनाए जाते हैं। प्रतीक चिन्हों से देश को एक विशिष्ट पहचान मिलती है और यह प्रतीक चिन्ह देश की उन्नति में सहायक होते हैं। प्रतीक चिन्हों का चुनाव प्रतीक चिन्हों की विशेषता व लाभ देखकर किया जाता है। जैसे - भारत के राष्ट्रीय पुष्प कमल की मुख्य विशेषता यह है कि वह कीचड़ में पैदा होने के बाद भी स्वयं को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखता है। जो संदेश देता है की जन्म कहीं भी हो 'मानव को अपना व्यवहार और आचरण सदैव मधुर रखना चाहिए' इसी प्रकार हम जानेंगे आखिर उत्तराखंड राज्य ने कस्तूरी मृग को राज्य पशु क्यों बनाया। कस्तूरी मृग की विशेषता देवभूमि उत्तराखंड में प...