उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Era) अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है। इस काल का कोई लिखित प्रमाण नहीं है, इसलिए इसका इतिहास गुफाओं में मिले शैल-चित्रों (Rock Paintings), पत्थरों के औजारों और प्राचीन कंकालों के आधार पर लिखा गया है। आइए जानते हैं विस्तार से - “धूल से भरी राहें और तपता हुआ सूरज... उत्तर भारत के एक गुमनाम गाँव के किनारे एक ऊँचा सा मिट्टी का टीला था। लोग वहाँ से ईंटें उखाड़ रहे थे, कोई अपने घर की दीवार बना रहा था, तो कोई उन पत्थरों को कचरा समझकर फेंक रहा था। वहीं दूर खड़ा एक अंग्रेज अफसर, जिसका नाम अलेक्जेंडर कनिंघम था, यह सब बड़े गौर से देख रहा था। उसके पास एक पुरानी किताब थी—चीनी यात्री ह्वेनसांग की डायरी। कनिंघम को यकीन था कि जिस टीले को लोग 'कचरा' समझ रहे हैं, उसके नीचे सम्राट अशोक का कोई महान शहर या बुद्ध का कोई पवित्र मठ दफन है। वो बेचैनी और वो खत कनिंघम रात भर सो नहीं पाए। उन्हें लग रहा था जैसे वो दफन शहर उन्हें पुकार रहे हों। उन्होंने सोचा, "अगर आज मैंने इन पत्थरों को नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियाँ कभी नहीं...
भारत का इतिहास संक्षिप्त परिचय भारत का सम्पूर्ण इतिहास -(प्राचीन इतिहास से लेकर आधुनिक इतिहास तक) जैसा कि आप सभी को पता है कि उत्तराखंड के आगामी सभी परीक्षाओं का पैटर्न एक समान हो गया है। जिसमें उत्तराखंड सामान्य ज्ञान से 40 प्रश्न , हिन्दी से 20 प्रश्न, रिजनिंग से 10 प्रश्न, और सामान्य विज्ञान से 30 प्रश्न (इतिहास, भूगोल, संविधान, अर्थशास्त्र) पूछे जाएंगे। इसलिए उत्तराखंड का अध्ययन सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि उत्तराखंड से 40 प्रश्न पूछे जाएंगे। अब वो उत्तराखंड पुलिस भर्ती हो या पटवारी एवं लेखपाल चाहे हो फोरेस्ट गार्ड और बंदीरक्षक। उत्तराखंड का अध्ययन बेहतर ढंग से करने के लिए आपको भारत का सम्पूर्ण इतिहास का ज्ञान होना अति आवश्यक है। यदि आपको भारत के इतिहास के बारे में कुछ भी पता नहीं होगा तो आप सभी उत्तराखंड का इतिहास रटने की कोशिश करेंगें। और जहां रटने की बात आ जाए । तो मात्र तीन महीने में ही रटा हुआ भूल जाते हैं। इसलिए देवभूमि उत...