पृथ्वी की आंतरिक संरचना "नमस्कार साथियों/छात्रों, आज के इस लेख में हम पृथ्वी की आंतरिक संरचना पढ़ने वाले हैं। यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है प्रत्येक परीक्षा में 2-3 प्रश्न यहां से अवश्य पूछे जाते हैं। देवभूमि उत्तराखंड द्वारा यह प्रयास किया गया है कि सभी तथ्यों को आसान भाषा में परिभाषित किया जा सके। इस लेख में दिए गए सभी तथ्य 6-12 तक की एनसीईआरटी पुस्तक और माजिद हुसैन की भूगोल से लिए गए हैं। प्रस्तावना, जिस पृथ्वी पर हम रहते हैं, उसके बाहरी रूप—जैसे ऊंचे पर्वत, गहरी नदियाँ, विशाल महासागर और हरे-भरे मैदानों से तो हम भली-भांति परिचित हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस ठोस जमीन पर हम खड़े हैं, उसके हजारों किलोमीटर नीचे पैर पसारकर बैठी दुनिया कैसी दिखती होगी? जैसे एक पके हुए आम का सबसे बाहरी हिस्सा उसका पतला छिलका होता है, बीच में उसका रसदार गूदा और सबसे अंदर एक ठोस गुठली होती है; या जैसे एक उबले हुए अंडे में सबसे बाहर एक पतला सफेद छिलका, फिर सफेद भाग और केंद्र में पीला भाग (Yolk) होता है—ठीक वैसे ही हमारी पृथ्वी भी परतों में बंटी हुई है। भले ...
उत्तराखंड का भू-कानून चर्चा में क्यों? हाल ही में प्रदेश में लगातार चल रही मांग के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एलान किया है कि उनकी सरकार वृहद भू-कानून लाने जा रही है। अगले साल बजट सत्र में कानून का प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 250 वर्ग मीटर आवासीय और 12.50 एकड़ अन्य भूमि के नियम तोड़ने वालों की भूमि जांच के बाद सरकार में निहित की जाएगी। क्या है उत्तराखंड का वर्तमान भू-कानून ? वर्तमान में लागू भू-कानून के तहत एक व्यक्ति को 250 वर्गमीटर जमीन ही खरीद सकता है। लेकिन व्यक्ति के अपने नाम से 250 वर्गमीटर जमीन खरीदने के बाद पत्नी के नाम से भी जमीन खरीदी है तो ऐसे लोगों को मुश्किल आ सकती है। तय सीमा से ज्यादा खरीदी गई जमीन को सरकार में निहित करने की कार्रवाई करेगी। यह कानून केवल बाहरी राज्यों के लोगाें पर लागू है। उत्तराखंड के स्थायी निवासी कितनी भी जमीन खरीद सकते हैं। भू-कानून का इतिहास राज्य में बाहरी लोगों द्वारा भूमि खरीद सीमित करने के लिए वर्ष 2003 में तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार ने उत्तर प्रदेश के कानून में संशोधन किया और राज्य का अपना भूमि कानून अस्तित्व में आया। इस संशोध...