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पर्वतों के निर्माण (Geography Notes - part 06)

पर्वतों के निर्माण  प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...

उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोककथाएं (एक गंगोल सौ रंगोल)

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लोककथा : एक गंगोल सौ रंगोल 

बहुत समय पहले की बात है। पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र में हर महीने 'हाट' यानी 'बाजार' लगा करती थी। जिसमें लगभग सौ व्यापारियों की दुकान लगती थी। दूर-दूर से व्यापारी उस बाजार में व्यापार करने आते थे। तत्कालीन समय में व्यापार के लिए विनिमय प्रणाली और सिक्कों के माध्यम से व्यापार होता था। व्यापार में मुख्य रूप से सूती व ऊनी वस्त्र, सूखे मेवे, विभिन्न प्रकार के बर्तन चीनी, तेल, गुड़, तम्बाकू, साबुन, सौन्दर्य सामग्री, जूते व खालें आदि प्रमुख थे।

गंगोलीहाट के लोग उन व्यापारियों को अपने खेतों में दुकान लगाने के लिए जगह देते थे। जिसके बदले किराया और उनकी सामग्री मुफ्त में लिया करते थे जो व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा होता था। इससे नाखुश होकर व्यापारियों को एक तरकीब सूझी। और उन्होंने मिलकर यह फैसला किया कि वह अगली बार अपने व्यापार के लिए किसी दूसरे स्थान पर बाजार लगाएंगे। 

यह बात एक गंगोल यानी कि गंगोलीहाट के व्यक्ति को मालूम पड़ गई और उसने एक योजना बनाई। वह उन व्यापारियों के पास गया और उनसे कहा - मेरे पास 4 नाली का एक बड़ा खेत है। (आज के वर्तमान समय में 4 नाली को 8640 वर्ग के बराबर फुट माना जाता है) जहां आप सभी लोग मुफ्त में अपना व्यापार कर सकते हो । सभी व्यापारी इस बात से सहमत हुए और उन्होंने व्यापार करने के लिए हामी भर दी।

व्यक्ति ने उनसे कहा - आप सभी लोग अपना सामान सुरक्षित तरीके से इस खेत में रख दें और कल प्रातः आकर अपनी बाजार लगाएं। व्यापारी अपना सारा सामान उस खेत में रखकर निश्चिंत होकर अपने-अपने स्थान पर चले गए। उनके जाने के बाद वह व्यक्ति उस क्षेत्र के स्थानीय राजा के मंत्री को बुलाकर लाया। और एक निश्चित राशि में पूरा खेत सामान सहित उसे बेचकर वहां से चला गया। 

अगली सुबह जब सभी व्यापारी उस जगह पर आए और मंत्री ने उनसे वहां आने का कारण पूछा ? व्यापारियों ने उसे अपने व्यापार के बारे में बताया । यह सुनकर मंत्री ने कहा - यह जगह सामान सहित मैंने खरीद ली है। अगर तुम्हें यहां बाजार लगानी है तो तुम्हें जगह और सामान का किराया देना पड़ेगा। मजबूरन व्यापारियों को उसकी बात माननी पड़ी। व्यापारी अपना फायदा करने के स्थान पर अपना दोगुना घाटा कर चुके थे और एक गंगोल (गंगोलीहाट का व्यक्ति) सौ व्यापारियों को बेवकूफ बनाकर वहां से जा चुका था।

इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में एक कहावत "एक गंगोल सौ रंगोल" प्रचलित हो गई। जिसका अर्थ है - गंगोलीहाट का एक व्यक्ति सौ अन्य लोगों के बराबर बुद्धिमान व चालक हो सकता है।

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