उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल उत्तराखंड का प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Era) अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है। इस काल का कोई लिखित प्रमाण नहीं है, इसलिए इसका इतिहास गुफाओं में मिले शैल-चित्रों (Rock Paintings), पत्थरों के औजारों और प्राचीन कंकालों के आधार पर लिखा गया है। आइए जानते हैं विस्तार से - “धूल से भरी राहें और तपता हुआ सूरज... उत्तर भारत के एक गुमनाम गाँव के किनारे एक ऊँचा सा मिट्टी का टीला था। लोग वहाँ से ईंटें उखाड़ रहे थे, कोई अपने घर की दीवार बना रहा था, तो कोई उन पत्थरों को कचरा समझकर फेंक रहा था। वहीं दूर खड़ा एक अंग्रेज अफसर, जिसका नाम अलेक्जेंडर कनिंघम था, यह सब बड़े गौर से देख रहा था। उसके पास एक पुरानी किताब थी—चीनी यात्री ह्वेनसांग की डायरी। कनिंघम को यकीन था कि जिस टीले को लोग 'कचरा' समझ रहे हैं, उसके नीचे सम्राट अशोक का कोई महान शहर या बुद्ध का कोई पवित्र मठ दफन है। वो बेचैनी और वो खत कनिंघम रात भर सो नहीं पाए। उन्हें लग रहा था जैसे वो दफन शहर उन्हें पुकार रहे हों। उन्होंने सोचा, "अगर आज मैंने इन पत्थरों को नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियाँ कभी नहीं...
नैनीताल का इतिहास वादियों से घिरा झीलों का शहर - नैनीताल । नैनीताल उत्तराखंड की पावन भूमि पर एक विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। यह शहर तीन ओर से टिफिन टॉप, चाइना पीक, लड़ियां कांटा, स्नोव्यू, हाड़ी गड़ी, शेर का डांडा आदि ऊंची ऊंची पहाड़ियों से घिरा हुआ है। नैनीताल उत्तराखंड का ही नहीं बल्कि पूरे भारत में सर्वाधिक लोकप्रिय पर्यटक स्थल है। प्राकृतिक सौंदर्य और मनलुभावन दृश्यों का प्रतीक यह शहर एक लंबे अरसे से विश्व में टॉप 10 पर्यटक स्थलों में जगह बनाए हुए। नैनीताल की नैनी झील, नैना देवी मंदिर, कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान व कार्बेट जलप्रपात और नैना पीक के प्रमुख स्थलों में आते हैं। भयंकर गर्मी हो या सर्दी यहां प्रतिवर्ष देश-विदेश से लाखों सैलानी घूमने के लिए आते हैं। सर्दियों में बर्फ के दिवाने, बर्फ देखने आते हैं तो वहीं मई-जून के महीनों में गर्मी से बचने के लिए आते हैं। नैनीताल की आय का मुख्य स्रोत पर्यटक स्थलों से प्र...