उत्तराखंड के प्रमुख साहित्यकार : शैलेश मटियानी आज हम उत्तराखंड के प्रमुख साहित्यकारों की सीरीज में चौथे प्रमुख साहित्यकार शैलेश मटियानी के जीवन परिचय एवं उनकी सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से पढ़ने वाले हैं। यूं तो आपने अनेकों किताबें पढ़ी हैं लेकिन जहां तक मैं समझता हूं बहुत कम छात्र होंगे जिन्होंने शैलेश मटियानी के बारे में विस्तार से पढ़ा होगा। कोई भी साहित्यकार शौक से रचनाएं नहीं लिखते। हालांकि की रचनाएं रुचि पर निर्भर हैं लेकिन उस भी ज्यादा निर्भर करती है परिस्थितियां। जो सबकी अलग-अलग होती है। उत्तराखंड की माटी से सरोकार रखने वाले और हिंदी साहित्य में 'आंचलिक कथाकार' व 'मजदूरों-शोषितों के मसीहा' के रूप में प्रतिष्ठित शैलेश मटियानी का नाम समकालीन कथा साहित्य में एक विशेष स्थान रखता है। उन्होंने हिंदी कहानी और उपन्यास को केवल मध्यवर्गीय समाज से हटाकर बोरीवली के कुलियों, अलमोड़ा की वादियों के उपेक्षित लोगों और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के वास्तविक यथार्थ से जोड़ा। तो आइए आज हम जानते हैं शैलेश मटियानी कैसे साहित्यकार बने। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा कहां ...
भारती चंद की अमर गाथा आज हम इस लेख में चंद राजाओं के बारे में विस्तार से पढ़ने वाले हैं। हालांकि चंद राजवंश केवल उत्तराखंड तक ही सीमित था और बहुत बड़ा साम्राज्य नहीं था लेकिन चंद राजवंश का सम्पूर्ण इतिहास रोचकमय है और यह हमें सिखाता है जिंदगी में उतार चढ़ाव आते हैं लेकिन उस उतार चढ़ाव में संतुलन किस प्रकार स्थापित करना होता है। इतने उतार चढ़ाव के बाद भी चंद राजवंश 700 वर्ष शासन किया। तीन राजाओं की तिकड़ी भारती चंद - रत्न चंद - कीर्ति चंद चंद वंश की स्थापना के 400 साल बीत चुके थे लेकिन चंद शासक फिर भी पूर्ण रूप से आजाद नहीं थे वो अभी डोटी (नेपाल) के राजा को कर दे रहे थे, हालांकि इससे पूर्व 26वें चंद शासक ने थोहर चंद स्वयं को स्वतंत्र राजा घोषित कर दिया और 31वें चंद शासक गरुड़ ज्ञान चंद ने सोर और सीरा क्षेत्रों को जीत लिया था फिर भी चंद वंश अधीन था डोटी राजाओं के, कितने राजा आए और गये लेकिन किसी ने डोटी पर आक्रमण करने का दुस्साहस नहीं किया। ऐसे में जन्म होता है एक वीर का जिसका नाम भारती चंद होता है और वह चंद वंश का 35वां शासक बनता है और वो डोटी पर आक्रमण करने वाला पहला र...