भारती चंद की अमर गाथा आज हम इस लेख में चंद राजाओं के बारे में विस्तार से पढ़ने वाले हैं। हालांकि चंद राजवंश केवल उत्तराखंड तक ही सीमित था और बहुत बड़ा साम्राज्य नहीं था लेकिन चंद राजवंश का सम्पूर्ण इतिहास रोचकमय है और यह हमें सिखाता है जिंदगी में उतार चढ़ाव आते हैं लेकिन उस उतार चढ़ाव में संतुलन किस प्रकार स्थापित करना होता है। इतने उतार चढ़ाव के बाद भी चंद राजवंश 700 वर्ष शासन किया। तीन राजाओं की तिकड़ी भारती चंद - रत्न चंद - कीर्ति चंद चंद वंश की स्थापना के 400 साल बीत चुके थे लेकिन चंद शासक फिर भी पूर्ण रूप से आजाद नहीं थे वो अभी डोटी (नेपाल) के राजा को कर दे रहे थे, हालांकि इससे पूर्व 26वें चंद शासक ने थोहर चंद स्वयं को स्वतंत्र राजा घोषित कर दिया और 31वें चंद शासक गरुड़ ज्ञान चंद ने सोर और सीरा क्षेत्रों को जीत लिया था फिर भी चंद वंश अधीन था डोटी राजाओं के, कितने राजा आए और गये लेकिन किसी ने डोटी पर आक्रमण करने का दुस्साहस नहीं किया। ऐसे में जन्म होता है एक वीर का जिसका नाम भारती चंद होता है और वह चंद वंश का 35वां शासक बनता है और वो डोटी पर आक्रमण करने वाला पहला र...
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 भारतीय शिक्षा की पृष्ठभूमि भारत में शिक्षा के उत्थान के लिए 1870 में ब्रिटेन ने अनिवार्य शिक्षा अधिनियम पारित किया। ज्योतिबा फुले ने सर्वप्रथम प्रत्येक बच्चे को निश्चित और प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने की मांग की। उसी के अनुरूप 1882 में शिक्षा के लिए हंटर कमीशन लागू किया गया। गोपाल कृष्ण गोखले ने भी 1910-11 में इंपीरियल लेजिस्लेटिव असेंबली से शिक्षा सुधार के लिए मांग की। देश के महानायक महात्मा गांधी जी ने 1937 में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की बैठक में बच्चों के लिए सार्वभौमिक शिक्षा का प्रस्ताव रखा। स्वतंत्रता के पश्चात 1948-49 में संविधान सभा की सलाहकार समिति ने शिक्षा को मौलिक अधिकार के स्थान पर नीति निर्देशक के तत्व के रूप में स्वीकार किया। और संविधान के अनुच्छेद 45 में 6 से 14 वर्ष के बच्चों की निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया। शिक्षा के अधिकार पर पहला आधिकारिक दस्तावेज वर्ष 1990 में राम मूर्ति समिति की रिपोर्ट थी। 1999 में तपस मजूमदार समिति ने अनुच्छेद 21(A) को शामिल करने की अनुशंसा की थी। 86वां संविधान संशोधन...