उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन और संघर्ष उत्तराखंड राज्य का निर्माण कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि यह दशकों लंबे संघर्ष, बलिदान और जन-आंदोलन का परिणाम था । हालांकि अलग राज्य की मांग 1897 से ही समय-समय पर उठती रही थी, लेकिन 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद इस संघर्ष ने एक नया मोड़ लिया । जब आप उत्तराखंड का आंदोलन ध्यानपूर्वक पढ़ रहे होंगे तो आपको आभास होगा जिस प्रकार भारत ने अंग्रेजों से आजादी पाई ठीक उसी प्रकार उत्तराखंड राज्य को बनाने में संघर्ष हुए। यह बात तो सच है की उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर में बांध बनाने के अलावा कोई भी कार्य नहीं किए। न सड़कें बनवायी न ही पर्यटन में विकास किया और बिजली तो पहाड़ों में दूर दूर तक नहीं पहुंची । जबकि दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश काफी आगे बढ़ गया। तो जरूरत तो थी एक नये राज्य की इसलिए तो संघर्ष हुआ। आप जब उत्तराखंड निर्माण आंदोलन के बारे में पढ़ें तो स्वतंत्र भारत आंदोलन से तुलना करें। जैसे भारत आजाद करने की प्रथम लड़ाई 1857 का स्वतंत्रता संग्राम वैसे ही उत्तराखंड की प्रथम लड़ाई 1947 से तुलना करें। ये बात अलग है कि भारत का वह संग्राम असफल हुआ औ...
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 भारतीय शिक्षा की पृष्ठभूमि भारत में शिक्षा के उत्थान के लिए 1870 में ब्रिटेन ने अनिवार्य शिक्षा अधिनियम पारित किया। ज्योतिबा फुले ने सर्वप्रथम प्रत्येक बच्चे को निश्चित और प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने की मांग की। उसी के अनुरूप 1882 में शिक्षा के लिए हंटर कमीशन लागू किया गया। गोपाल कृष्ण गोखले ने भी 1910-11 में इंपीरियल लेजिस्लेटिव असेंबली से शिक्षा सुधार के लिए मांग की। देश के महानायक महात्मा गांधी जी ने 1937 में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की बैठक में बच्चों के लिए सार्वभौमिक शिक्षा का प्रस्ताव रखा। स्वतंत्रता के पश्चात 1948-49 में संविधान सभा की सलाहकार समिति ने शिक्षा को मौलिक अधिकार के स्थान पर नीति निर्देशक के तत्व के रूप में स्वीकार किया। और संविधान के अनुच्छेद 45 में 6 से 14 वर्ष के बच्चों की निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया। शिक्षा के अधिकार पर पहला आधिकारिक दस्तावेज वर्ष 1990 में राम मूर्ति समिति की रिपोर्ट थी। 1999 में तपस मजूमदार समिति ने अनुच्छेद 21(A) को शामिल करने की अनुशंसा की थी। 86वां संविधान संशोधन...