पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 भारतीय शिक्षा की पृष्ठभूमि भारत में शिक्षा के उत्थान के लिए 1870 में ब्रिटेन ने अनिवार्य शिक्षा अधिनियम पारित किया। ज्योतिबा फुले ने सर्वप्रथम प्रत्येक बच्चे को निश्चित और प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने की मांग की। उसी के अनुरूप 1882 में शिक्षा के लिए हंटर कमीशन लागू किया गया। गोपाल कृष्ण गोखले ने भी 1910-11 में इंपीरियल लेजिस्लेटिव असेंबली से शिक्षा सुधार के लिए मांग की। देश के महानायक महात्मा गांधी जी ने 1937 में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की बैठक में बच्चों के लिए सार्वभौमिक शिक्षा का प्रस्ताव रखा। स्वतंत्रता के पश्चात 1948-49 में संविधान सभा की सलाहकार समिति ने शिक्षा को मौलिक अधिकार के स्थान पर नीति निर्देशक के तत्व के रूप में स्वीकार किया। और संविधान के अनुच्छेद 45 में 6 से 14 वर्ष के बच्चों की निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया। शिक्षा के अधिकार पर पहला आधिकारिक दस्तावेज वर्ष 1990 में राम मूर्ति समिति की रिपोर्ट थी। 1999 में तपस मजूमदार समिति ने अनुच्छेद 21(A) को शामिल करने की अनुशंसा की थी। 86वां संविधान संशोधन...