सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

गजानन माधव मुक्तिबोध : Biography

हिन्दी भाषा के प्रमुख साहित्यकार  नमस्कार दोस्तों आज हम हिंदी साहित्य के सिलेबस के अनुसार बाहरी राज्यों में जन्म लेने वाले साहित्यकारों का अध्ययन करेंगे।‌ जो उत्तराखंड की परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं आज के लेख में गजानन माधव मुक्तिबोध के जीवन परिचय और उनकी प्रमुख सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे । इससे पूर्व हम सुमित्रानंदन पंत, राहुल सांकृत्यायन, महादेवी वर्मा, शैलेश मटियानी और मंगलेश डबराल के बारे में विस्तार से पढ़ चुके हैं। जिनके लिंक लेख के अंत में नीचे दिए गए हैं। तो आईए जानते हैं गजानन मुक्तिबोध के बारे में विस्तार से - गजानन माधव मुक्तिबोध  हिंदी साहित्य में 'अंधेरे के कवि' और फेंटेसी के बेजोड़ शिल्पी के रूप में विख्यात गजानन माधव मुक्तिबोध का नाम आधुनिक हिंदी काव्य के इतिहास में सबसे अलग और चमकीला है । वे प्रगतिशील चेतना और प्रयोगवाद के एक ऐसे अनूठे सेतु थे, जिन्होंने कविता को आत्म संघर्ष, आत्मा खोज और व्यवस्था के खिलाफ एक तीव्र बौद्धिक हथियार बनाया।  जीवन परिचय  गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवंबर, 1917 को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के 'श्...

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act 2009)

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 भारतीय शिक्षा की पृष्ठभूमि  भारत में शिक्षा के उत्थान के लिए 1870 में ब्रिटेन ने अनिवार्य शिक्षा अधिनियम पारित किया। ज्योतिबा फुले ने सर्वप्रथम प्रत्येक बच्चे को निश्चित और प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने की मांग की। उसी के अनुरूप 1882 में शिक्षा के लिए हंटर कमीशन लागू किया गया। गोपाल कृष्ण गोखले ने भी 1910-11 में इंपीरियल लेजिस्लेटिव असेंबली से शिक्षा सुधार के लिए मांग की। देश के महानायक महात्मा गांधी जी ने 1937 में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की बैठक में बच्चों के लिए सार्वभौमिक शिक्षा का प्रस्ताव रखा। स्वतंत्रता के पश्चात 1948-49 में संविधान सभा की सलाहकार समिति ने शिक्षा को मौलिक अधिकार के स्थान पर नीति निर्देशक के तत्व के रूप में स्वीकार किया। और संविधान के अनुच्छेद 45 में 6 से 14 वर्ष के बच्चों की निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया। शिक्षा के अधिकार पर पहला आधिकारिक दस्तावेज वर्ष 1990 में राम मूर्ति समिति की रिपोर्ट थी। 1999 में तपस मजूमदार समिति ने अनुच्छेद 21(A) को शामिल करने की अनुशंसा की थी। 86वां  संविधान संशोधन...

उत्तराखंड राज्य की 17वीं वन रिपोर्ट (2021)

उत्तराखंड की 17वीं वन रिपोर्ट भारत में वनों की स्थिति पर केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का 17वां द्विवार्षिक रिपोर्ट 13 जनवरी 2022 को जारी किया गया, जिसके अनुसार राज्य में वन विभागाधीन वन की स्थिति निम्न प्रकार हैं- उत्तराखंड राज्य की 17वीं वन रिपोर्ट 17वीं वन रिपोर्ट के अनुसार राज्य में वनों का कुल क्षेत्रफल 24,305.13 वर्ग किमी. है जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का 45.44% भाग है। रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक वन वृद्धि नैनीताल जनपद में हुयी है। राज्य में सर्वाधिक वन क्षेत्रफल पौड़ी जिले में एवं सबसे कम वन क्षेत्रफल वाला जिला ऊधम सिंह नगर है- राज्य में सबसे कम वन क्षेत्रफल वाले जनपद क्रमशः - ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, रूद्रप्रयाग, चम्पावत । राज्य में सर्वाधिक वन क्षेत्रफल वाले जनपद क्रमशः पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल, उत्तरकाशी एवं चमोली । प्रतिशत की दृष्टि से सर्वाधिक वन क्षेत्रफल वाला जिला नैनीताल (71.62%) एवं सबसे कम प्रतिशत वाला जिला ऊधमसिंह नगर (16.84%) है सर्वाधिक वन प्रतिशत वाले जिले क्रमशः नैनीताल, चम्पावत, पौड़ी, रूद्रप्रयाग । सबसे कम वन प्रतिशत वाले जिले क्रमशः ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, प...

Uksssc Mock Test - 132

Uksssc Mock Test -132 देवभूमि उत्तराखंड द्वारा आगामी परीक्षाओं हेतु फ्री टेस्ट सीरीज उपलब्ध हैं। पीडीएफ फाइल में प्राप्त करने के लिए संपर्क करें। और टेलीग्राम चैनल से अवश्य जुड़े। Join telegram channel - click here उत्तराखंड समूह ग मॉडल पेपर  (1) सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियां के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।              सूची-I.                  सूची-II  A. पूर्वी कुमाऊनी वर्ग          1. फल्दाकोटी B. पश्चिमी कुमाऊनी वर्ग       2. असकोटी  C. दक्षिणी कुमाऊनी वर्ग       3. जोहार D. उत्तरी कुमाऊनी वर्ग.        4.  रचभैसी कूट :        A.   B.  C.   D  (a)  1.    2.  3.   4 (b)  2.    1.  4.   3 (c)  3.    1.   2.  4 (d) 4.    2....

उत्तराखंड बजट 2024-25

उत्तराखंड बजट 2024-25 उत्तराखंड का बजट जानने से आइए पहले जानते हैं, बजट क्या है? संविधान में बजट शब्द उल्लेख किया गया है या नहीं। बजट एक प्रकार से धन से संबंधित योजना है जिसके तहत सरकार द्वारा यह अनुमान लगाया जाता है कि आने वाले एक वर्ष में विभिन्न स्रोतों से कुल कितनी कमाई होगी और कुल कितना खर्च होगा ? भारतीय संविधान में बजट शब्द के स्थान पर "वार्षिक वित्तीय विवरण" का उल्लेख मिलता है।  केंद्र सरकार के लिए भारतीय संविधान में अनुच्छेद 112 में वार्षिक वित्तीय विवरण का उल्लेख किया गया है। जबकि राज्यों के लिए वार्षिक वित्तीय विवरण की व्यवस्था अनुच्छेद 202 में की गई है। जिसको विधानमंडल में राज्यपाल की पूर्व सहमति के बाद ही प्रस्तुत किया जाता है। केंद्र और राज्य के लिए वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक का होता है। बजट (वार्षिक वित्तीय विवरण) को तीन भागों में विभक्त किया जाता है। समेकित निधि  आकस्मिकता निधि  लोक खाता  समेकित निधि के दो भाग हैं। राजस्व लेखा  पूंजीगत लेखा राजस्व लेखा  राजस्व लेखा के अंतर्गत राजस्व आय और राजस्व व्यय को शामिल किया जाता है।  र...