भारती चंद की अमर गाथा आज हम इस लेख में चंद राजाओं के बारे में विस्तार से पढ़ने वाले हैं। हालांकि चंद राजवंश केवल उत्तराखंड तक ही सीमित था और बहुत बड़ा साम्राज्य नहीं था लेकिन चंद राजवंश का सम्पूर्ण इतिहास रोचकमय है और यह हमें सिखाता है जिंदगी में उतार चढ़ाव आते हैं लेकिन उस उतार चढ़ाव में संतुलन किस प्रकार स्थापित करना होता है। इतने उतार चढ़ाव के बाद भी चंद राजवंश 700 वर्ष शासन किया। तीन राजाओं की तिकड़ी भारती चंद - रत्न चंद - कीर्ति चंद चंद वंश की स्थापना के 400 साल बीत चुके थे लेकिन चंद शासक फिर भी पूर्ण रूप से आजाद नहीं थे वो अभी डोटी (नेपाल) के राजा को कर दे रहे थे, हालांकि इससे पूर्व 26वें चंद शासक ने थोहर चंद स्वयं को स्वतंत्र राजा घोषित कर दिया और 31वें चंद शासक गरुड़ ज्ञान चंद ने सोर और सीरा क्षेत्रों को जीत लिया था फिर भी चंद वंश अधीन था डोटी राजाओं के, कितने राजा आए और गये लेकिन किसी ने डोटी पर आक्रमण करने का दुस्साहस नहीं किया। ऐसे में जन्म होता है एक वीर का जिसका नाम भारती चंद होता है और वह चंद वंश का 35वां शासक बनता है और वो डोटी पर आक्रमण करने वाला पहला र...
उत्तराखडं राज्य के प्रतीक 9 नवम्बर 2000 को उत्तर प्रदेश (UP) के 13 पहाड़ी जिलों को काटकर भारतीय गणतन्त्र के 27वेंराज्य के रूप उत्तराखंड का गठन किया गया। उत्तराखंड को हिमालयी राज्यों के गठन के क्रम में 11वें राज्य के रूप में शामिल किया गया उत्तराखडं का राज्य पुष्प – ब्रह्मकमल उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद सन् 2000 में सरकार द्वारा ब्रह्मकमल को उत्तराखंड का राज्य पुष्प घोषित किया गया, जिसे "हिमालयी पुष्पों का सम्राट" कहा जाता है। उत्तराखडं का राज्य पुष्प ब्रह्मकमल "मध्य हिमालयी क्षेत्र" में 4800 से 6000 मीटर की ऊँचाई पर पाया जाता है, जिसकी औसत ऊँचाई 70 से 80 सेमी. के मध्य तक होती है। यह ऐसटेरसी कुल का पौधा है, ब्रह्मकमल का वैज्ञानिक नाम सोसूरिया अबवेलेटा है जिसकी उत्तराखंड में 24 और सपंर्णू विश्व में 210 प्रजातियाँ पाई जाती है। ब्रह्मकमल को स्थानीय भाषा में "कौल पद्म" के नाम से जाना जाता है, तथा महाभारत के वन पर्व में इसे सौगंधिक पुष्प कहा गया है। हिमाचल प्रदेश में ब्रह्मकमल को दूधफला कहा जाता है तथा कश्मीर में गलगल कहा जाता है। और पड़ोसी देश नेपा...