पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
उत्तराखडं राज्य के प्रतीक 9 नवम्बर 2000 को उत्तर प्रदेश (UP) के 13 पहाड़ी जिलों को काटकर भारतीय गणतन्त्र के 27वेंराज्य के रूप उत्तराखंड का गठन किया गया। उत्तराखंड को हिमालयी राज्यों के गठन के क्रम में 11वें राज्य के रूप में शामिल किया गया उत्तराखडं का राज्य पुष्प – ब्रह्मकमल उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद सन् 2000 में सरकार द्वारा ब्रह्मकमल को उत्तराखंड का राज्य पुष्प घोषित किया गया, जिसे "हिमालयी पुष्पों का सम्राट" कहा जाता है। उत्तराखडं का राज्य पुष्प ब्रह्मकमल "मध्य हिमालयी क्षेत्र" में 4800 से 6000 मीटर की ऊँचाई पर पाया जाता है, जिसकी औसत ऊँचाई 70 से 80 सेमी. के मध्य तक होती है। यह ऐसटेरसी कुल का पौधा है, ब्रह्मकमल का वैज्ञानिक नाम सोसूरिया अबवेलेटा है जिसकी उत्तराखंड में 24 और सपंर्णू विश्व में 210 प्रजातियाँ पाई जाती है। ब्रह्मकमल को स्थानीय भाषा में "कौल पद्म" के नाम से जाना जाता है, तथा महाभारत के वन पर्व में इसे सौगंधिक पुष्प कहा गया है। हिमाचल प्रदेश में ब्रह्मकमल को दूधफला कहा जाता है तथा कश्मीर में गलगल कहा जाता है। और पड़ोसी देश नेपा...