पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
उत्तराखंड करेंट अफेयर्स 2024
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तीलू रौतेली पुरस्कार 2024
हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों के लिये 13 उत्कृष्ट महिलाओं को देहरादून में राज्य शक्ति तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार महिलाओं को विभिन्न खेलों, कला, संस्कृति, साहित्य, पर्यावरण, साहस और समाजसेवा आदि के क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं योगदान के लिए दिया जाता है।
तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित महिलाऐ :-
- खेलों में उत्कृष्ट योगदान के लिए - अल्मोड़ा की पैरा-तैराक और एथलीट प्रीति गोस्वामी, बागेश्वर की ताइक्वांडो खिलाड़ी नेहा देवली, हरिद्वार की पावरलिफ्टर संगीता राणा और उधम सिंह नगर की पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी मंदीप कौर तथा गढ़वाल मंडल में पौड़ी की एथलेटिक्स खिलाड़ी अंकिता ध्यानी को दिया गया। (बता दें कि अंकिता ध्यानी ने पेरिस ओलंपिक 2024 में 3000 मीटर की रेस में प्रतिभाग किया था।)
- लोक गायन के लिये पद्मश्री से सम्मानित - माधुरी बर्थवाल (पौड़ी गढ़वाल)
- हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने के लिये - चंपावत की सोनिया आर्य (सोनम आर्या)
- साहस एवं जीवन रक्षा के लिए (इन्होंने जून में जंगली जानवर के हमले से अपनी सास को बचाया था) - रुद्रप्रयाग की विनीता देवी (रुद्रप्रयाग)
- हस्तशिल्प और हथकरघा को आगे बढ़ाने के लिये - नर्मदा रावत (चमोली)
- समाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए - शकुंतला दताल (पिथौरागढ़), रीना उनियाल (टिहरी गढ़वाल) और गीता गैरोला (उत्तरकाशी)
- विज्ञान में योगदान के लिये - नैनीताल की सुधा पाल (नैनीताल)
राज्य शक्ति तीलू रौतेली पुरस्कार
यह पुरस्कार उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रतिवर्ष वीरबाला तीलू रौतेली के नाम पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को दिया जाता है।राज्य सरकार ने उत्तराखंड की वीरांगना तीलू रौतेली की जयंती पर वर्ष 2006 से महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं एवं किशोरियों के लिये तीलू रौतेली पुरस्कार की शुरुआत की थी। इसके तहत राज्य सरकार 51 हजार रुपए और प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है।
तीलू रौतेली कौन थीं?
तीलू रौतेली का जन्म पौड़ी गढ़वाल के अन्तर्गत चौंदकोट पट्टी के गुराड़ तल्ला गांव में हुआ था। इनका का वास्तविक नाम तिलोत्तमा देवी था। तीलू रौतेली एक ऐसी वीरांगना है जो केवल 15 वर्ष की उम्र में रणभूमि में कूद पड़ी थी और सात साल तक जिसने अपने दुश्मन राजाओं को कड़ी चुनौती दी थी। 22 वर्ष की आयु में सात युद्ध लड़ने वाली तीलू रौतेली एक वीरांगना है।
तीलू रौतेली भारत की रानी लक्ष्मीबाई, चांद बीबी, झलकारी बाई, बेगम हजरत महल के समान ही देश विदेश में ख्याति प्राप्त हैं।

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