पर्वतों के निर्माण प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...
पूर्णागिरी मंदिर : धार्मिक पर्यटक स्थल पूर्णागिरी मंदिर के बारे में उधम सिंह नगर का शायद ही कोई ऐसा वासी हो जिसने पूर्णागिरी मंदिर का नाम नहीं सुना होगा। सभी धर्मों के लोग यहां भारी संख्या में मनोकामना पूरी करने के लिए श्रद्धा भाव से आते हैं । खटीमा, सितारगंज के लोगों की इतनी आस्था है कि मंदिर में दर्शन करने के लिए परिवार सहित ट्रैक्टर ट्राली में प्रतिवर्ष पूर्णागिरी आते हैं। पूर्णागिरी मंदिर का नाम इतनी दूर दूर तक है कि भारत के सभी स्थलों से श्रद्धालु अपने सभी दुखों को दूर करने के लिए पूरे मन-तन से माता रानी के दर्शन को आते हैं। पूर्णागिरी मंदिर टनकपुर से 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यूं तो आपने भी कई बार पूर्णागिरी मंदिर की यात्रा की होगी। कभी परिवार के साथ, कभी दोस्तों के साथ, तो कभी हमसफर के साथ लेकिन कभी आपने सोचा है की पूर्णागिरि का अपना एक इतिहास रहा है । शायद ही कोई होगा जिसने इतिहास जानने की कोशिश की होगी और लोग इतने ऊंचे पर्वत पर इतनी दूर क्यों आते हैं? कौन से पर्वत में पूर्णागिरी मंदिर स्थित है? व इसका निर्माण किसने कराया? आइए हम आपको ले चलते हैं - देवभूम...