उत्तराखंड के प्रमुख साहित्यकार : शैलेश मटियानी आज हम उत्तराखंड के प्रमुख साहित्यकारों की सीरीज में चौथे प्रमुख साहित्यकार शैलेश मटियानी के जीवन परिचय एवं उनकी सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से पढ़ने वाले हैं। यूं तो आपने अनेकों किताबें पढ़ी हैं लेकिन जहां तक मैं समझता हूं बहुत कम छात्र होंगे जिन्होंने शैलेश मटियानी के बारे में विस्तार से पढ़ा होगा। कोई भी साहित्यकार शौक से रचनाएं नहीं लिखते। हालांकि की रचनाएं रुचि पर निर्भर हैं लेकिन उस भी ज्यादा निर्भर करती है परिस्थितियां। जो सबकी अलग-अलग होती है। उत्तराखंड की माटी से सरोकार रखने वाले और हिंदी साहित्य में 'आंचलिक कथाकार' व 'मजदूरों-शोषितों के मसीहा' के रूप में प्रतिष्ठित शैलेश मटियानी का नाम समकालीन कथा साहित्य में एक विशेष स्थान रखता है। उन्होंने हिंदी कहानी और उपन्यास को केवल मध्यवर्गीय समाज से हटाकर बोरीवली के कुलियों, अलमोड़ा की वादियों के उपेक्षित लोगों और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के वास्तविक यथार्थ से जोड़ा। तो आइए आज हम जानते हैं शैलेश मटियानी कैसे साहित्यकार बने। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा कहां ...
हिन्दी साहित्य "नमस्कार दोस्तों, आज हम इस लेख से हिन्दी साहित्य के सभी प्रमुख साहित्यकारों की एक श्रृंखला शुरू कर रहे हैं। जिसमें प्रत्येक साहित्यकार के बारे में विस्तार से बताया गया है। और इसके साथ ही शार्ट नोट्स हमारे टेलीग्राम चैनल पर उपलब्ध कराए जाएंगे। और अन्त में 200 बहुविकल्पीय प्रश्न तैयार किए जाएंगे। यदि आप सभी साहित्यकारों के बारे में पढ़ना चाहते हैं तो संपर्क करें। आज के इस आर्टिकल में हम उत्तराखंड समूह ग और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के हिंदी पाठ्यक्रम के अंतर्गत आने वाले सुकुमार सुमित्रानंदन पंत के जीवन परिचय और उनकी सभी प्रमुख रचनाओं के बारे में पढ़ेंगे। सुमित्रानंदन पंत हिंदी साहित्य के 'सुकुमार कवि' और छायावाद के प्रमुख स्तंभ सुमित्रानंदन पंत का जीवन और उनकी रचनाएँ हिंदी जगत की अनमोल धरोहर हैं। अल्मोड़ा की वादियों से निकलकर ज्ञानपीठ पुरस्कार तक पहुँचने का उनका सफर बेहद प्रेरणादायक है। आइए, उनके जीवन, शिक्षा और साहित्य के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं। जीवन परिचय और बचपन का संघर्ष सुमित्रानंदन पंत का जन्म 20 मई, 1900 को कौसानी (अब जिला बागेश्वर,...