हिन्दी भाषा के प्रमुख साहित्यकार नमस्कार दोस्तों आज हम हिंदी साहित्य के सिलेबस के अनुसार बाहरी राज्यों में जन्म लेने वाले साहित्यकारों का अध्ययन करेंगे। जो उत्तराखंड की परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं आज के लेख में गजानन माधव मुक्तिबोध के जीवन परिचय और उनकी प्रमुख सभी रचनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे । इससे पूर्व हम सुमित्रानंदन पंत, राहुल सांकृत्यायन, महादेवी वर्मा, शैलेश मटियानी और मंगलेश डबराल के बारे में विस्तार से पढ़ चुके हैं। जिनके लिंक लेख के अंत में नीचे दिए गए हैं। तो आईए जानते हैं गजानन मुक्तिबोध के बारे में विस्तार से - गजानन माधव मुक्तिबोध हिंदी साहित्य में 'अंधेरे के कवि' और फेंटेसी के बेजोड़ शिल्पी के रूप में विख्यात गजानन माधव मुक्तिबोध का नाम आधुनिक हिंदी काव्य के इतिहास में सबसे अलग और चमकीला है । वे प्रगतिशील चेतना और प्रयोगवाद के एक ऐसे अनूठे सेतु थे, जिन्होंने कविता को आत्म संघर्ष, आत्मा खोज और व्यवस्था के खिलाफ एक तीव्र बौद्धिक हथियार बनाया। जीवन परिचय गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवंबर, 1917 को मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के 'श्...
भारतीय हस्तकला भारतीय शिल्पकार वो मूरत है खुदा की ! बेजान धातु में भी जान डाल दे, हम कद्र करें तो, कला की। भारत के शिल्पकारों के हाथों में जादू होता है जब भी किसी लकड़ी, मिट्टी, पीतल, तांबा या हाथी के दांत को उकेरते हैं तो एक अदभुत कलाकृति बना देते हैं । जिसकी चमक को विश्व में भी लोहा माना जाता हैै । आइए दोस्तों हम जाने अपने हस्तकलाओं की दुनिया और भारत में उसका योगदान कितना है । और भारतीय हस्तकला का भविष्य । जब भारत में आत्मनिर्भरता की बात आ ही गई है तो क्यों ना हस्तशिल्प कलाओं का उपयोग जान ले ताकि चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने में देश को सक्षम बना सकें और एक नए भारत का निर्माण करने में मदद कर सकें यदि आपके पास भी कोई हुनर है तो आप भी अपना भारत निर्माण में सहयोग दे सकते हैं हाथों से निर्मित भारतीय उत्पादों की विदेशी बाजारों में अत्यधिक मांग रहती और यह उत्पाद इतिहा...