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पर्वतों के निर्माण (Geography Notes - part 06)

पर्वतों के निर्माण  प्रस्तावना "पर्वत हमारी पृथ्वी की सबसे भव्य और प्रभावशाली संरचनाओं में से एक हैं। ये न केवल हमारे भूगोल को तय करते हैं, बल्कि मौसम से लेकर हमारी नदियों तक सब कुछ बदलते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति के पीछे की कहानी उतनी ही जटिल और दिलचस्प है। इस अध्याय में हम बेहद आसान भाषा में समझेंगे कि प्लेटों के टकराने, ज़मीन के फटने और ज्वालामुखी के विस्फोट से इन पर्वतों का जन्म कैसे होता है।" पर्वतों के निर्माण पर्वतों के निर्माण का मुख्य आधार टेक्टोनिक प्लेटों की गति है। हमारी पृथ्वी का सबसे ऊपरी हिस्सा (स्थलमंडल) कई टुकड़ों में टूटा हुआ है जिन्हें 'टेक्टोनिक प्लेट्स' कहते हैं। ये प्लेटें मेंटल की अर्ध-तरल परत (एस्थेनोस्फीयर) पर बहुत धीमी गति (सालाना 1 से 10 सेमी) से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे की ओर बढ़ती हैं, दूर जाती हैं या आपस में रगड़ खाती हैं, तो पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पर भीषण तनाव और दबाव बनता है। इसी हलचल के कारण ज़मीन का हिस्सा या तो ऊपर उठ जाता है या फिर ज्वालामुखी के मैग्मा के जमाव से पहाड़ का रूप ले लेता है। पर्वतों के मुख्य प्रकार पर्...

मेरे सपनों का भारत

       मेरे सपनों का भारत सकारात्मक सोच का नजरिया "भारत की खोज पुस्तक" सबने पड़ी होगी। उस पुस्तक के लेखक भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी हैं। उन्होंने आजादी के बाद मेरे सपनों का भारत की कल्पना की थी और अपनी इच्छा अनुसार रखने की कोशिश भी की थी , इसलिए तो  और पाकिस्तान दो भागों में बंट गए । उस समय की परिस्थितियों के अनुसार उनको जैसा ठीक लगा  ।  उन्होंने किए जिनके कुछ परिणाम काफी महत्वपूर्ण साबित हुए। वहीं कुछ कदमों के चलते जम्मू-कश्मीर हाथों से आधा निकल गया। लेकिन फिर भी सब कुछ ठीक रहा उसके बाद मिसाइल मैन के नाम से कुख्यात डॉ एपीजे अब्दुल कलाम । उन्होंने भी अपनी खुली आंखों से भारत को सजाया । अब्दुल कलाम जी 2002 से 2007 के बीच भारत के राष्ट्रपति रहे और उन्होंने 2020 तक एक सक्षम भारत होने की कल्पना की थी। यूं तो सभी आज़ादी के परवानोंं- क्या महात्मा गांधी, क्या वल्लभभई पटेल और क्या विवेकानंद जी सभी ने एक महान भारत की कल्पना की और अनेकों कदम उठाएं। भारत की विकास प्रक्रिया भारत को विदेशी शक्तियों ने इतना अधिक कमजोर कर दिया था। कि 70 साल लग गए भ...

RCEP : मेगा मुक्त व्यापार समझौता

  क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी(RCEP)  क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी से भारत के बाहर रहने के कारण और निहितार्थ का विश्लेषण कीजिए.  क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी वैश्विक स्तर पर मेगा मुक्त व्यापार समझौता है। जिसका प्रारंभ 21 वें आसियान शिखर सम्मेलन में कंबोडिया की राजधानी नोमपेन्ह   में 2012 में हुआ था। वैश्विक स्तर में कुल जीडीपी का 30 % का योगदान करता है। एक प्रकार से यह कहा जा सकता है कि दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है। अगर इसके सदस्य देशों की बात करें तो 10 आसियान देशों तथा 5 देशों का समूह है। आस्ट्रेलिया, चीन, जापान,दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड इन सभी देशों का मानना था कि वस्तुओं एवं सेवाओं बौद्धिक संपदा ई-कॉमर्स और कम्युनिकेशन के साथ-साथ छोटे और मध्य व्यापार को बढ़ावा मिले। जिससे सभी देश आपस में एक दूसरे के बाजार में सरलता से प्रवेश कर सकें। इसीलिए प्रत्येक वर्ष सभी सदस्य दे  देश और आरसीएपी में हस्ताक्षर करते हैं।  वर्तमान समय में 15 नवंबर को 15 देशों ने वियतनाम के हनोई शहर में RCEP में हस्ताक्षर किए हैं । लेकिन भारत ने इस समझ...